• Hindi News
  • National
  • Gotan News Rajasthan News 261 Anganwadi Centers Not Getting Nutrition From 3 Months Department Claims To Be Issued From July

261 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 3 माह से नहीं मिल रहा पोषाहार, विभाग का दावा जुलाई से करेंगेे वितरण

2 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भास्कर संवाददाता | मेड़ता सिटी/गोटन

महिला एवं बाल विकास विभाग मेड़ता के अधीन संचालित 261 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 3 माह से पोषाहार वितरण नहीं हो रहा है। ऐसे में बच्चों व गर्भवती-धात्री महिलाओं को कुपोषण से बचाने की योजना उपयोगी साबित नहीं हो पा रही है। विभागीय आंकड़ों की मानें तो मेड़ता पंस क्षेत्र के 261 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 3500 के करीब बच्चे पंजीकृत है। बच्चे पोषाहार खाने आंगनबाड़ी केंद्र आते हैं मगर उन्हें निराशा हाथ लग रही है। महिला अधिकारिता विभाग ने अक्टूबर 2018 में एक परिपत्र जारी कर पांच बिन्दुओं के मानक पूरे करने वाले स्वयं सहायता समूहों को ही पोषाहार आवंटित करने के आदेश दिए मगर इस परिपत्र को जैसे ही मार्च में लागू किया गया तो मेड़ता पंचायत समिति क्षेत्र के सभी 261 आंगनबाड़ी केन्द्र नियमानुसार अपूर्ण पाए गए। ऐसे में महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों का पोषाहार रोक दिया। इससे गर्भवती महिलाएं भी प्रभावित हो रही है क्योंकि सरकार उनको एक सप्ताह में 930 ग्राम का बेबी मिक्स खाने को दे रही थी। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि अधिकांश स्वयं सहायता समूहों ने विभागीय शर्तें पूरी कर दी हैं। जुलाई में वितरण शुरू कर दिया जाएगा।

दूध वितरण की योजना भी हुई फेल साबित, पात्रों को नहीं मिल पा रहा लाभ
जानकारों के अनुसार सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर रोजाना नौनिहालों को नाश्ता दिया जा रहा था। उन्हें एक दिन गर्म खिचड़ी व एक दिन गर्म दलिया भी दिया जा रहा है। इसके अलावा सप्ताह में एक बार बेबी मिक्स भी प्रदान किया जा रहा था।

गर्भवती महिलाओं को एक सप्ताह में एक बार 930 ग्राम बेबी मिक्स दिया जा रहा था। गर्भ में पल रहे बच्चे के पोषण के लिए सरकार सोयाबीन, गेहूं, दाला, चीनी आदि से मिश्रित एक सुपाच्य खाद्य सामग्री बेबी मिक्स के नाम से गर्भवती महिलाओं व बच्चों को निशुल्क वितरित कर रही थी मगर वो भी तीन से चार माह से बंद पड़ी है। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सु पोषण योजना चलाई गई। इस परियोजना के अन्तर्गत बाल पंजीकृत गर्भवती महिलाओं व 7 माह से 9 माह तक के बच्चों को दिया जाने वाला साप्ताहिक पोषाहार पिछले 4 माह से बन्द है। उधर सितंबर 2018 में दूध वितरण करने की योजना भी फिसड्डी साबित हुई। सितंबर से अभी तक मात्र एक बार दूध का वितरण हो पाया।

जच्चा-बच्चा व कार्यकर्ताओं को भी नहीं मिल रहा भुगतान

प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना के तहत जच्चा की मां का भुगतान भी समय पर नहीं हो रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 7 जून से प्रत्येक आंगनवाड़ी केन्द्र पर सु पोषण दिवस मनाए जाने की घोषणा की थी। इस दिवस का खर्चा भामाशाह द्वारा दिया जाता था लेकिन बाद में प्रधानमंत्री ने महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम 750 रुपए कार्यकर्ता के खाते में जमा करवाने का आश्वासन दिया था। लेकिन सितम्बर 2018 से अभी तक का भुगतान खातों में नहीं किया गया है। उधर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सर्वे से लेकर मातृ वन्दना योजना सु पोषण दिवस सहित अन्य गतिविधियों का कार्य करती है लेकिन वेतन सबसे कम दिया जाता है। वही वर्ष 2019 का रजिस्टर सहित स्टेशनरी का सामान भी नहीं मिला है।

इन शर्तों की नहीं हो रही पालना

सीडीपीओ के अनुसार गांवों में संचालित स्वयं सहायता समूहों को सबसे पहले अमृता योजना में अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। यह परिपत्र अक्टूबर 2018 में आ गया। इसे नए वित्तीय वर्ष में जैसे ही लागू किया गया तो अधिकांश का पंजीयन नहीं मिला। इस एक बिंदु पर ही आंगनबाड़ी केन्द्र पोषाहार से वंचित हो गए।

दूसरे बिंदू में मासिक बैठकों की अनिवार्यता की पालना, बैंक खाते की अनिवार्यता, फूड लाइसेंस व लोन आदि गतिविधियों का पाया जाना जरूरी था मगर अधिकांश स्वयं सहायता समूह केवल कागजों में चल रहे हैं। कोई समूह निर्धारित पंच सूत्री बिन्दुओं की पालना नहीं कर रहा है। उसके बगैर पोषाहार रोक दिया गया है।

जुलाई माह से नियमित वितरण होगा शुरु

ये सच है कि मार्च के बाद आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषाहार वितरण रोक दिया गया। कारण कि हमारे विभाग ने अक्टूबर 2018 में एक परिपत्र निकाल पांच बिंदु निर्धारित किए। जो स्वयं सहायता समूह पांच बिंदु के मानकों पर खरा उतरता है उसे ही पोषाहार देना तय किया गया मगर मेड़ता क्षेत्र के सभी 261 आंगनबाड़ी केन्द्रों के समूह ऐसा नहीं कर पाए।

इस कारण मार्च से पोषाहार बंद है मगर हम धीरे धीरे सभी के शर्तें पूरे करवा रहे हैं। पूरी उम्मीद है कि जुलाई से पोषाहार वितरण पूर्व की भांति नियमित शुरू हो जाएगा।- दुर्गासिंह उदावत, कार्यवाहक सीडीपीओ, महिला अधिकारिता व बाल विकास विभाग, मेड़ता

गोटन. एक आंगनवाड़ी केन्द्र पर उपस्थित बच्चे व कार्यकर्ता।

खबरें और भी हैं...