डायबिटीज की आयुर्वेदिक दवाई में मिला रहे थे एलोपैथी के साल्ट

Bhaskar News Network

Jun 15, 2019, 06:25 AM IST

Nagour News - आयुर्वेद दवाओं में ऐलोपैथी की मिलावट का बड़ा खेल सामने आया है। आयुर्वेद दवाओं में एलाेपैथी साल्ट मिलाने वाली फर्म...

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आयुर्वेद दवाओं में ऐलोपैथी की मिलावट का बड़ा खेल सामने आया है। आयुर्वेद दवाओं में एलाेपैथी साल्ट मिलाने वाली फर्म विदेशों तक दवाएं बेच रही थी। विभाग की ओर से जब्त दवाओं की कीमत साढ़े आठ करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है। वहीं ड्रग औषधि नियंत्रण विभाग की अोर से नौ मई को की गई कार्रवाई और सैंपल फेल होने के बाद 12 जून को मामला दर्ज कराना भी विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है।

मामले के अनुसार नौ मई को आयुष राज एंटरप्राइजेज प्रा. लिमिटेड मानसिंह पुरा, अजमेर रोड पर ड्रग विभाग की टीम पहुंची। ड्रग कंट्रोलर की ओर से गठित टीम में सहायक औषधि नियंत्रक अनूप रावत, अनिल अग्रवाल सहित पांच जनों की टीम ने छापा मारा। इसमे आयुष विभाग के ड्रग इंस्पेक्टर महेश शर्मा भी टीम में शामिल थे। निरीक्षण में फर्म के पास आयुर्वेदिक ड्रग लाइसेंस जारी किए हुए सामने आए। अधिकारियों के निर्देश पर टीम की ड्रग इंस्पेक्टर अमृता सोनगरा ने यहां हर्बल डाइट्री सप्लीमेंट, डीबी केयर और केप्सूल पेरानिक डीबी केयर के सैंपल लिए। इन सैंपल को जांच के लिए भेजा गया जहां इनमें डायबिटीज की दवा मेटफोर्मिन हाइड्रोक्लोराइड पाई गई। ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा ने बताया कि डायबिटीज के उपचार में काम आने वाली दो औषधियों धन्वतरी डीबी केयर तथा प्रानिक डीबी केयर में एलोपैथिक दवा पाई गई। इन दवाओं में 500 एमजी के कैप्सूल में 168 एमजी से 201 एमजी तक की मात्रा में मेटफोर्मिन पाया गया। गौरतलब है कि फर्म मालिक मनोज अग्रवाल आयुष राज एंटरप्राइजेज धन्वन्तरि हर्बोकेम को लोन लाइसेंस पर आयुर्वेदिक दवाइयां देता है।

ऐसे है साढ़े आठ करोड़ कीमत

एक अन्य औषधि क्यूरालिन हर्बल डायटरी सप्लीमेंट में भी मेटफोर्मिन हाइड्रोक्लोराइड पाया गया। यहां मिले रिकॉर्ड के अनुसार क्यूरालिन हर्बल डायटरी सप्लीमेंट के एक बैच में 31 लाख 90 हजार कैप्सूल, धन्वतरी डीबी केयर कैप्सूल के 3 लाख कैप्सूल एवं प्रानिक डीबी केयर के 95 हजार कैप्सूल का निर्माण किया गया था। डीबी केयर कैप्सूल के 180 कैप्सूल पैक की कीमत 2 हजार 200 रुपए, प्रानिक डीबी केयर के 60 कैप्सूल पैक की कीमत 999 रूपये एवं क्यूरालिन हर्बल डायटरी सप्लीमेंट के 180 कैप्सूल पैक की आॅनलाइन कीमत 4 हजार 840 रु. निर्धारित है। इनके आधार पर फर्म द्वारा मेटफार्मिन युक्त कैप्सूल बनाने की बाजार कीमत 8 करोड़ 50 लाख रुपए आंकी गई है।

एलोपैथी के ड्रग इंस्पेक्टर से क्यों दिलाया गया सैंपल : नौ मई को जब कार्रवाई की गई तो फर्म के नाम आयुर्वेद का लाइसेंस था। जब सैंपल लिए गए, उस समय आयुर्वेद ड्रग इंस्पेक्टर महेश शर्मा मौजूद थे। आयुर्वेदिक दवाइयों में एलोपैथी दवाई मिलने का संदेह होने की स्थिति को देखते हुए ही आयुष ड्रग इंस्पेक्टर को साथ लिया गया था। लेकिन सैंपल एलौपैथी के ड्रग इंस्पेक्टर से भराए गए। अब सवाल यह उठता है कि ऐसा क्यों किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा किया जाने से कोर्ट में एलोपैथी के ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा सैंपल लिए जाने के कारण कंपनी का बचाव होना तय है।

अधिकारी बार्गेनिंग कर रहे थे : मैनेजिंग डायरेक्टर

आयुष राज एंटरप्राइजेज प्रा. लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अग्रवाल ने कहा कि सैंपल लेने के बाद से ही अधिकारी हमसे बार्गेनिंग कर रहे थे। जबकि हम तो धन्वन्तरि हर्बोकेम से साल्ट लेते हैं। उनका कहीं नाम भी एफआईआर में दर्ज नहीं है। यहां तक नियमों में है कि सैंपल फेल होने के बाद 21 दिन का समय दिया जाता है ताकि हम कहीं अपील और सैंपल की जांच करा सकें। यह भी नहीं किया गया और एफआईआर दर्ज करा दी गई। जबकि आंकडे देख लें, ऐसा कभी नहीं किया गया।

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