अमरपुरा में भजन संध्या का आयोजन आज

Nagour News - नागाैर. अमरपुरा में कथा के बाद यज्ञ हवन करते हुए। भास्कर संवाददाता | नागौर अमरपुरा में 1 दिसंबर से प्रारंभ हुए...

Dec 04, 2019, 11:05 AM IST
नागाैर. अमरपुरा में कथा के बाद यज्ञ हवन करते हुए।

भास्कर संवाददाता | नागौर

अमरपुरा में 1 दिसंबर से प्रारंभ हुए संत लिखमीदास महाराज स्मारक उद्घाटन व देव मंदिर लोकार्पण के तृतीय पाटोत्सव पांच दिवसीय कार्यक्रमों की श्रंखला में 4 दिसंबर को विशाल भजन संध्या का आयोजन होगा। संस्थान कार्यकारिणी के सदस्य धर्मेंद्र सोलंकी के अनुसार 4 दिसंबर रात 8 बजे से आयोजित होने वाली इस भजन संध्या में माली सैनी समाज के युवा व अनुभवी भजन गायकों का संगम होगा। इस विशाल भजन संध्या में भजन सम्राट प्रकाश माली बालोतरा, छंवरलाल गहलोत, रमेश सोलंकी, दिनेश के द्वारा भजनों की प्रस्तुतियां की जाएगी। इसी प्रकार प्रकाश माली एडवोकेट, राजेश माली छगन माली, इंद्रचंद नागौर व पिंकी गहलोत द्वारा भी भजनों की प्रस्तुतियां दी जाएगी। 5 दिसंबर को हवन, ध्वजारोहण व महाआरती का कार्यक्रम सुबह 9 बजे से होगा। जिसके बाद महाप्रसादी होगी। इस अवसर पर आचार्य रामदुलारे उपाध्याय द्वारा 4 व 5 दिसंबर को भी विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होंगे। इस विशाल भजन संध्या के लिए मेड़ता रोड से अमरपुरा पैदल यात्रा संघ के तत्वावधान में श्रद्धालु भक्त अमरपुरा पहुंचेंगे।

नागाैर. अमरपुरा में कथा के दौरान मौजूद श्रद्धालु।

मूंदियाड़ ग्राम में ब्रह्माणी माता मंदिर में भागवत कथा आयोजन

खरनाल| मूंदियाड़ ग्राम में ब्रह्माणी माता मंदिर में मंगलवार को आयोजित भागवत कथा के तहत त्यागी संत हेतमराम महाराज ने गजेंद्र मोक्ष के पावन प्रसंग में कहा कि मनुष्य के जन्म के पहले उसका कोई संबंधी नहीं था। और न ही मरने के बाद कोई रहेगा। फिर भी जन्म और मृत्यु के बीच का जो समय है। उसमें एक दूसरे के बिना बैचेन हो रहा है। किंतु अंत समय में कोई काम नहीं आएगा। भगवान निराधार के है। सच्चे मन से पुकारे तो दौड़ते हुए आएंगे। समुंद्र मंथन की कथा का वाचन करते हुए त्यागी संत ने कथा कि जीवन का मंथन ही समुंद्र मंथन है। संसार समुंद्र का मंथन करके ज्ञान आैर भक्ति रुपी अमृत का पान करने वाला अमर हो जाता है।

खरनाल. ब्रह्माणी माता मंदिर में भागवत कथा आयोजन में माैजूद श्रद्धालु।

मनुष्य में लोभ रुपी आवरण जमने से हमारी आत्मा भारी हो गई है- महासती विनीता

नागौर| साधुमार्गी जैन संघ में आचार्य रामलाल महाराज की शिष्या महासती विनीता आदि चोरड़िया समता साधना भवन में विराजमान है। संघ मंत्री छीमूसा ललवानी ने बताया महाराज ने प्रवचन बताया कि राजा हो रंक खाली हाथ आया और खाली हाथ ही जाएगा। भगवान ने फरमाया हमारी आत्मा अनादी काल से परिग्रमण कर रही है। कसाय के कारण क्रोध, मान, माया, लोभ रुपी आवरण हमारी आत्मा पर जम होने के कारण हमारी आत्मा भारी हो गई है। आत्मा को सरल करने के लिए हमे धर्म को मन में उतराना चाहिए। अहिंसा, संयम, तप यह तीनों तत्व पाए जाते हैं। वो ही धर्म हैं। इसीलिए जीवन में धर्म की शरण लेकर जीनवाणी काे अपने जीवन में उतारनी चाहिए। रोजाना सुबह प्रार्थना, साढ़े 9 बजे प्रवचन, दोपहर ढाई बजे से साढ़े 3 बजे पचीस बोल धार्मिक शिविर व शाम को प्रतिक्रमण निरंतर चल रहे हैं।

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