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सिलिकोसिस का प्रमाण-पत्र देने में दलाल सक्रिय, पीड़ित परेशान

एक वर्ष पहले
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सिलिकोसिस रोग से पीड़ित जानकारी के अभाव में दलालों के हत्थे चढ़ रहे हैं। एक तरफ सिलिकोसिस पीड़ितों के नाम से अन्य लोग फायदा उठा रहे हैं तो दूसरी ओर असली हकदार हैं वे सिलिकोसिस रोग का प्रमाण पत्र लेने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। टीबी अस्पताल से प्रमाण पत्र लेने आने वालों को सिर्फ एक ही जवाब मिलता है फोन कर देंगे। अलग-अलग फोन से दलाल के जरिए फोन कराकर खुले आम रुपए मांगे जा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला शुक्रवार को कलेक्टर के जनता दरबार में पहुंचा है। इस सिलिकोसिस पीड़ित की बीमारी अंतिम चरण में है। कलेक्टर को दी गई फरियाद में पीड़ित ने टीबी अस्पताल पर प्रमाण पत्र के एवज में 30 हजार रुपए मांगने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि सिलिकोसिस बीमारी के आड़ में दलालों द्वारा असली हकदार के मुंह से निवाला छीनने का काम लंबे समय से चल रहा है। पिछले दिनों ही 50 फर्जी सिलिकोसिस प्रमाण पत्र देने का मामला उजागर हुआ था। श्रम विभाग की एक जांच टीम ने इस संबंध में जांच की तो चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई। डॉ. पीके सिसोदिया ने इस मामले में कुल 140 सर्टिफिकेट की जांच की गई थी। जिनमें से कुल 50 प्रमाण पत्र फर्जी मिले। स्वास्थ्य विभाग में 3 चिकित्सकों के बने बोर्ड पर भी इससे सवाल उठ चुके हैं।

जानकारी अनुसार मेड़ता तहसील के रेण निवासी बंसीनाथ ने कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होकर बताया कि करीब 25 वर्षों से पत्थर का कार्य कर रहा था इसलिए दो वर्ष से सिलिकोसिस बीमारी से ग्रस्त हो गया हूं। नागौर, अजमेर, जोधपुर, जयपुर से दवाइयां ले चुके हैं, अब मरने की स्थिति में हूं। सिलिकोसिस बीमारी का प्रमाण पत्र लेने के लिए टीबी अस्पताल के पिछले 12 महीने से चक्कर काट रहा हूं लेकिन प्रमाण पत्र नहीं मिला। टीबी अस्पताल से बार-बार एक ही जवाब दिया जाता है कि फोन कर देंगे। ज्ञापन में आरोप लगाया कि टीबी अस्पताल से किसी दलाल के माध्यम से फोन आता है जिसमें बताते हैं कि आपका सिलिकोसिस प्रमाणपत्र हम बनवा देंगे, आपको 30 हजार रुपए देने होंगे। पीड़ित ने टीबी अस्पताल के सुरेंद्र चौधरी का नाम लेकर बताया कि वे मुझे कई बार धमकियां दे चुके हैं। पीड़ित ने बताया कि वह 10 बार एक्स-रे करवा चुके हैं और अजमेर जाकर सीटी स्कैन की जांच भी करवा चुके हैं। रिपोर्ट में सभी डॉक्टर सिलिकोसिस बीमारी से पीड़ित भी बता रहे हैं। लेकिन प्रमाण पत्र देने में आनाकानी की जा रही है।

पीड़त बंसीनाथ।
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