बच्चों में बस्ते के बोझ से हो सकती है रीढ़ की हड्‌डी में समस्या

Nagour News - भास्कर संवाददाता | कुचामन सिटी इंडियन फिजियोथैरेपी एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजीव झा शनिवार को एक...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 04:50 AM IST
Kuchaman News - rajasthan news children may have problems with backbone burden in the spinal cord
भास्कर संवाददाता | कुचामन सिटी

इंडियन फिजियोथैरेपी एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजीव झा शनिवार को एक कांफ्रेंस में शामिल होने के लिए कुचामन पहुंचे। यहां उन्होंने दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत में बताया कि एक रिसर्च के मुताबिक एक सामान्य व्यक्ति अधिकतम 23 किग्रा से ज्यादा अगर वजन उठाता है तो उसकी रीढ़ की हड्डी और डिस्क में दिक्कत होना स्वाभाविक है। वे यहां रीढ़ की हड्डी की बीमारी के निदान के लिए फिजियोथैरेपी की नई तकनीक को लेकर आयोजित राष्ट्रीय फिजियो कांफ्रेंस में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होने आए थे। उन्होंने बताया कि आज रीढ़ की हड्डी की समस्याओं के लिए लोग गंभीर नहीं है। इसके प्रति लापरवाही की शुरुआत बच्चे के स्कूल जाने के साथ ही शुरू होती है। बच्चे की पीठ पर बड़े और भारीभरकम बस्ते लाद दिए जाते हैं। इससे वे स्पाइन गलत पोजीशन रखने के आदी बन जाते हैं। हालांकि अब हमारे देश में बैगलेस स्कूल का कांसेप्ट भी शुरू हुआ है। यह बहुत जरूरी है जब बच्चे पढ़ना-लिखना शुरू करते हैं तभी से उसका पॉश्चर ठीक रखा जाए। उन्होंने बताया कि रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियों का 95 फीसदी तक उपचार बिना दवा और बिना ऑपरेशन फिजियोथैरेपी से संभव है, जिससे कोई भी साइड इफेक्ट भी नहीं होता है। डॉ. झा ने बताया कि देश में अब बैगलेस स्कूल का कांसेप्ट शुरू हुआ है। कुचामन पहुंचने पर डॉ. झा का डॉ हरीश कुमावत, डॉ. राजकुमार बड़ोदिया आदि ने स्वागत किया।

फिजियोथैरेपी के प्रति बढ़ी है लोगों में जागरूकता

फिजियोथैरेपी की आवश्यकता नहीं बढ़ी बल्कि इसके प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ी है। आवश्यकता तो पहले भी थी लेकिन हमारे समाज में जागरूकता नहीं थी। फिजियोथैरेपी में बिना दवाइयों के और बिना साइड इफेक्ट के इलाज होता है। फिटनेस के लिए हो अथवा उपचार के लिए हो, फिजियोथैरेपी की जरूरत होती है। खिलाड़ी को भी ग्राउंड पर उतरने के लिए फिटनेस की जरूरत है।

डॉ. संजीव झा

पाश्चात्य जीवनशैली, कंप्यूटर-मोबाइल घातक

डॉ. संजीव झा ने बताया कि नई पीढ़ी में पाश्चात्य जीवन शैली अपनाने का क्रेज है। लेकिन उसके लिए न तो शरीर तैयार है और न ही मांसपेशियां उस तरह से काम करती है। इस वजह से जोड़ों का दर्द, पीठ का दर्द, रीढ़ की हड्डी की समस्या काफी बढ़ गई है। अभी लोग कंप्यूटर-लेपटॉप पर ज्यादा काम करते हैं। मोबाइल का इस्तेमाल तो एक प्रकार से सिंड्रॉम हो गया है। गर्दन और हाथ देर तक गलत पॉजीशन में रहते हैं। इससे हाथ और गर्दन की समस्याएं और रीढ़ की हड्डी के ऊपरी हिस्से में दिक्कत होती है। इसको ठीक रखने के लिए आप 10 मिनट की प्रिवेंटिव एक्सरसाइज जरूरी है।

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