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देश में 109% तक बढ़ेगी गोल्ड की रिसाइक्लिंग
देश में गोल्ड की रिसाइक्लिंग करा कर शादी-विवाह जैसे महत्वपूर्ण मौकों के लिए ज्वैलरी बनवाने का ट्रेंड जोर पकड़ रहा है। इस वर्ष सालभर में 700-800 टन गोल्ड की डिमांड की संभावना थी। लेकिन माना जा रहा है कि सोने के दाम यदि नियंत्रित नहीं हुए तो जहां डिमांड घटकर 500-550 टन के करीब आ जाएगी, वहीं गोल्ड रिसाइक्लिंग 109% बढ़ जाएगी। भारत में सोने का आयात भी लगातार घट रहा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की हाल ही में आई रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी में सोने का आयात करीब 8.5 फीसदी कम हुआ है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की एक रिपोर्ट भी बताती है कि सोने के आयात में 2018 की तुलना में 2019 के आखिरी महीनों में गिरावट देखी गई है। यही नहीं अप्रैल 2019 से जनवरी 2020 के बीच सोने के आयात में 9 फीसदी गिरावट हुई है। यह स्थिति तब है, जब भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा इम्पोर्टर है। मुंबई ज्वैलर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष कुमार जैन बताते हैं कि जनवरी-फरवरी के दौरान 40 फीसदी गोल्ड की रिसाइक्लिंग हुई है। गोल्ड में यदि इसी प्रकार की तेजी बनी रही तो देश में 65-70 फीसदी गोल्ड की रिसाइक्लिंग हो सकती है।
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इस साल 300-350 टन पुराने सोने की ज्वैलरी बनाई जाएगी
मुंबई ज्वैलर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष कुमार जैन बताते हैं पिछले कई वर्षों से भारत में 800-850 टन सोने की डिमांड सालभर में रहती है। दाम 44 हजार प्रति 10 ग्राम तक जा चुका है। इससे इस साल 300-350 टन पुराने सोने की रिसाइक्लिंग कर ज्वैलरी बनने की संभावना है। जबकि देश में इंपोर्ट होकर कुल जितना गोल्ड आता है, उसमें से लगभग 500-550 टन सोने की हॉलमार्किंग कर ज्वैलरी बनती है।
नया सोना खरीदने की जगह पुराने से ज्वैलरी बनाने का चलन बढ़ा