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प्रशिक्षण शिविर में किसानों को बीजीय मसाला फसलों के बारे में दी जानकारी

एक वर्ष पहले
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कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर की ओर से समीप के बड़गांव में बीजीय मसाला फसलों में समन्वित पोषण एवं पौध संरक्षण प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन हुआ। इस मौके पर वैज्ञानिक डॉ. तख्तसिंह राजपुरोहित ने बीजीय मसाला फसलों में लगने वाले रोगों के बचाव के बारे में उपाय बताए। डॉ. आरएस चावड़ा ने मिट्टी की गुणवत्ता व जांच के बारे में जानकारी दी। डॉ. रमेश ने उन्नत किस्म के बीज एवं उत्पादन एवं तकनीक के बारे में बताया। डॉ. शालिनी पांडे ने जीरे की फसल में लगने वाले रोग व बचाव के बारे में जानकारी से अवगत कराया। शिविर आयोजक एवं प्रभारी डॉ. मोतीलाल मेहरिया ने जीरे की फसल के लिए पश्चिमी राजस्थान की जलवायु सबसे उपयुक्त बताया। जिसके कारण किसान इस फसल को अधिक उगाकर ज्यादा मुनाफा अर्जित कर सकते है। डॉ. मेहरिया ने बताया कि देश का 50 प्रतिशत से भी ज्यादा जीरे का उत्पादन राजस्थान के बाड़मेर, जोधपुर व नागौर जिले में होता है। इस दौरान डॉ. मेहरिया ने शिविर प्रायोजक सुपारी और मसाला विकास निदेशालय कालीकट, कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के प्रति आभार जताया। इस मौके पर अशोक गोलिया, हापूराम जीवणराम कलवानियां, पुखाराम, रामकरण सहित क्षेत्र के अनेक किसान मौजूद रहे।

मेड़ता सिटी. बड़गांव में बीजीय मसाला कार्यशाला में मौजूद अतिथि।
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