बीमार हुई तो याेग सीखा, अब खुद दे रही जानकारी
महिलाअाें सशक्तिकरण काे लेकर अनेक स्थानाें पर प्रयास हाे रहे है। लेकिन खींवसर तहसील का पांचला सिद्धा में बना जसनाथ अासन महिलाअाें के लिए विशेष काम कर रहा है। यहां महिलाअाें काे याेग सिखाया जाता है। श्रीजसनाथ आसन में कई सालों से महिलाओं के उत्थान के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे है। जिसके माध्यम से महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन निर्वाह के साधन, आध्यात्मिक विकास, मानसिक विकास की ओर बढ़ रही है। हाल ही में हुए उत्सव मां में सारी व्यवस्थाएं महिलाअाें ने ही संभाली थी।
गांव में बने अासन में योग शिविर, महिला स्वास्थ्य स्वच्छता शिविर जिनकी वजह से भारतीय व विदेशी महिलाएं इस सब के बारे में जागरुक हो रही है। कई महिलाएं आज अपने जीवन में निर्णय ले पा रही है। यहां याेग सिखने के बाद महिलाएं याेग काे गांव के दूसरे लाेगाें काे भी सिखा रही है अाैर विदेशी भी इसका प्रचार प्रसार विश्व में कर रहे है। गांव के साथ विदेशी महिलाएं भी लगातार यहां अपने अाप काे सशक्त कर रही है। इटली की डेबरा बताती है कि वे उत्सव मां के दौरान आश्रम से जुड़ी थी। आश्रम से एक आध्यात्मिक जुड़ाव महसूस किया। सेवाएं देने के लिए घर छोड़कर वापस आई है। तभी से सेवाएं दे रही है। आसन से जुड़ी सुनिधि बेनीवाल ने बताया कि यहां आस पास से अनेक महिलाएं योग आदि जीवन में सुधार की तकनीकें सीख रही है। ताकि जीवन में सकारात्मकता लाई जा सके।
इधर इस संबंध में अनेक विदेशी महिलाएं भी योग के साथ साथ तकनीकी जानकारी ले रही है। इससे उनको लाभ मिल रहा है। वे जीवन में भी कुछ अलग कर पा रही है।
बीमार हुई तो योग किया, स्वास्थ केंद्र में सेवा दे रही
चंपादेवी बताती है कि अत्यधिक महिलाएं अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पाती है। क्योंकि वे अपने स्वास्थ्य के लिए सजग नहीं होती है। जिसकी वजह से कई बार बड़ी बीमारियों से ग्रसित हो जाती है। जब वे बीमार हुई तो आश्रम से जुड़ी और महिला स्वास्थ्य, स्वच्छता व योग से काफी जानकारी ली। अब वे आश्रम के स्वास्थ्य केंद्र में सेवाएं दे रही है।
शिविर में याेग सीखा, अब पीजी का निर्णय लिया
पास ही गांव की रहने वाली दुर्गा ने बताया कि उन्हाेंने सक्रिय रूप से अाश्रम में चलने वाले कार्यक्रम बालिका सशक्तिकरण शिविर में 2014 में भाग लिया था। बाल योग शिविर में शिक्षक के रूप में भाग लिया। इन सबसे प्रेरित हाेकर याेग काे अपनी जीवन शैली में शामिल किया। अब योग में ही पीजी जारी है। छुट्टियों में आश्रम में योग भी दुर्गा सीखा रही है।