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मेड़ता: मानसून में 800 एमएम हुई थी बारिश, अतिवृष्टि से खराबे का मिलेगा मुआवजा, मांगी रिपोर्ट

Nagour News - भास्कर संवाददाता | मेड़ता सिटी बीते साल मानसून की सक्रियता के कारण मेड़ता क्षेत्र में कई बार हुई झमाझम बारिश के...

Jan 16, 2020, 09:50 AM IST
Nagaur News - rajasthan news merta 800 mm of rain was received in monsoon compensation will be received from the excess rainfall sought report
भास्कर संवाददाता | मेड़ता सिटी

बीते साल मानसून की सक्रियता के कारण मेड़ता क्षेत्र में कई बार हुई झमाझम बारिश के कारण अतिवृष्टि से नष्ट हुई खरीफ की फसलों का क्षेत्र के पीड़ित किसानों को मुआवजा मिलेगा।

राज्य सरकार ने बाकायदा जिला कलेक्टर को इस आशय के आदेश दिए। इसके बाद कलेक्टर ने तमाम उपखंड अधिकारियों को इससे अवगत कराया है। अब पटवारी अपने अपने क्षेत्र में पीड़ित किसानों को संपर्क करने लगे हैं। हालांकि सरकार ने पूर्व में बीमित फसलों को लेकर सर्वे कराया था। संबंधित बीमा कंपनी के प्रतिनिधि क्षेत्र का दौरा कर अपनी सर्वे रिपोर्ट तैयार कर चुके हैं। ऐसे में बीमा फसल योजना के अलावा अब राज्य सरकार किसानों को अतिवृष्टि से नष्ट हुई फसलों का मुआवजा देने जा रही है।

गौरतलब है कि मेड़ता सहित नागौर जिले में इस बार मानसून पूर्णतया मेहरबान रहा। अकेले मेड़ता क्षेत्र में 800 एमएम से अधिक बारिश हुई। इससे मेड़ता-रियां इलाके में खरीफ की अधिकांश फसलें चौपट हो गई। लोगों ने बड़ी उम्मीद से मूंग, ज्वार, ग्वार, कपास आदि बोए मगर बार-बार बारिश व अतिवृष्टि के चलते फसलें चौपट हो गई। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ। राज्य सरकार ने पटवारियों के मार्फत अनेक गांवों में नुकसान का आंकलन कराया है। मुआवजे की प्रक्रिया शुरू हो गई।

5 हैक्टेयर क्षेत्र में फसल खराब हुई तो अधिकतम 2 हैक्टेयर का मिलेगा मुआवजा

जानकारों के अनुसार राज्य सरकार ने अधिकतम 2 हैक्टेयर तक खराबे का मुआवजा देना तय किया है। मेड़ता पटवारी सियाराम जाजड़ा ने बताया कि यदि किसी किसान की 5 हैक्टेयर में फसल खराब हुई है तो उसे अधिकतम 2 हैक्टेयर का ही मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रति हैक्टेयर 6500 रुपए का मुआवजा मिलेगा जो असिंचित एरिया का होगा। जबकि सिंचित क्षेत्र में यह मुआवजा 13 हजार रुपए प्रति हैक्टेयर होगा। उन्होंने बताया कि किसानों को अपना आधार कार्ड, भामाशाह कार्ड, बैंक डायरी आदि की एक एक प्रति संबंधित पटवारियों को सुपुर्द करनी होगी। उसके बाद उनकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी और फिर मुआवजा सीधे किसानों के खाते में जमा होगा।

इन गांवों में सर्वाधिक नुकसान आंका

जानकारों की मानें तो मेड़ता शहर सहित सोगावास, कामा बासनी, बासनी कच्छावा, बेदावड़ी कलां, बेदावड़ी खुर्द, कात्यासनी, आकेली-ए, बासनी व्यासा, चौकासनी, खाखड़की, बड़गांव सहित मेड़ता तहसील क्षेत्र के अनेक गांवों में भारी बारिश के कारण फसलें बर्बाद हो गई थी। किसान खरीफ की फसल नहीं ले पाए।

भास्कर ने उठाया था मुद्दा, अब भी भरा है खेतों में पानी

गौरतलब है कि विगत 10 जनवरी 2020 को ही दैनिक भास्कर ने एक समाचार प्रकाशित कर अवगत कराया था कि मेड़ता के 250 हैक्टेयर खेतों में अभी भी बारिश का पानी भरा पड़ा है तथा किसान न तो खरीफ की फसल ले पाए और न ही इस बार रबी की बुवाई कर पाए। ऐसे में किसानों को दोहरा नुकसान हुआ है। ड्रोन कैमरे की मदद से भास्कर ने 250 हैक्टेयर क्षेत्र में खेतों में भरे बारिश के पानी का एक फोटो भी प्रकाशित किया था। इसके बाद यह मामला राज्य सरकार तक पहुंचा तो सरकार ने फसल बीमा के अलावा किसानों को अतिवृष्टि से हुए नुकसान का मुआवजा देने की घोषणा की है।

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