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परीक्षा सेंटर आवंटन नियमाें की अवहेलना पर मंत्री नाराज, लिखा कुलपति को पत्र

एक वर्ष पहले
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वनमंत्री विश्नोई ने कहा- मनमर्जी से सेंटर आवंटन की वजह से राज्य सरकार की छवि हो रही खराब

जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में परीक्षा केंद्र आवंटन को लेकर कुलपति के बड़े-बड़े दावे खोखले साबित होते नजर आ रहे हैं। परीक्षा केंद्रों के आवंटन में चली मनमर्जी से प्रदेश के वन राज्य मंत्री को कुलपति को पत्र लिखना पड़ा है। खास बात यह है कि राज्य मंत्री के पत्र में साफ तौर पर राज्य सरकार की छवि खराब होने का हवाला दिया गया है, बावजूद इसके विश्वविद्यालय प्रशासन पत्र को दबा कर बैठ गया और कोई कार्रवाई तक नहीं की गई।

दरअसल, वन एवं पर्यावरण मंत्री सुखराम विश्नोई ने 7 मार्च को कुलपति को एक पत्र लिखकर चेताया कि जालोर में परीक्षा केंद्र आवंटन में नियमों को साफ तौर पर ताक पर रखा गया है। जालोर में महाविद्यालयों के परीक्षार्थियों के लिए जो परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं उनमें कुछ महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए उसी महाविद्यालय को परीक्षा केंद्र बना दिया गया जबकि कुछ महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए जो परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं वह उनके मूल महाविद्यालय से काफी दूर हैं।

ऐसी स्थिति में परीक्षार्थियों को परीक्षा देने के लिए अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कुलपति से जालोर जिले के लिए विभिन्न महाविद्यालय के लिए स्थापित परीक्षा केंद्रों की समीक्षा कर पुन: परीक्षा केंद्रों की स्थापना कर एकरूपता बनाए रखने के लिए लिखा है।

सिस्टम की आड़ में गड़बड़ी

इस बार कुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी ने परीक्षा केंद्र आवंटन में मनमानी और सामूहिक नकल के मामलों के चलते केंद्र आवंटन में नए नियम लागू करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए कुलपति ने अपने विशेषाधिकार का उपयोग किया और परीक्षा केंद्र आवंटित करने के लिए सिक्योरिटी मनी के अलावा कई अन्य मापदंडों को पूरा करने का हवाला दिया लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। इसका कारण भाैगोलिक परिस्थिति का हवाला देकर मनमर्जी चलाई गई। कुछ कॉलेज ऐसी थी, जहां पढ़ने वालों सेंटर वहीं दे दिया गया वहीं दूसरी कॉलेजों में सेंटर आसपास की जगह पर दिए गए।

वन राज्यमंत्री मंत्री को नजर आई कमी, विवि प्रशासन ने किया अनदेखा

वन मंत्री विश्नोई ने अपने पत्र में ऐसी कमी की ओर इशारा किया है जिसे विवि प्रशासन ने अनदेखा ही कर दिया। गत वर्ष सामूहिक नकल, मिलीभगत के कई मामले सामने आए थे, इसके बावजूद मनमर्जी से सेंटर दिए गए। मंत्री ने साफ लिखा कि महाविद्यालयों की आपसी प्रतिस्पर्धा होने से राज्य सरकार पर पक्षपात करने का आरोप लग जाता है अाैर सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार हाेता है। इससे सरकार की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
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