- Hindi News
- National
- Nagaur News Rajasthan News Nagauri Paan Methi Farmers Are Selling 60 150 Per Kg Companies Are Making Profits By Selling Up To 1500
नागौरी पान मैथी काे किसान ~60-150 प्रति किलो बेच रहे, कंपनियां 1500 तक बेच कमा रही मुनाफा
नागौरी पान मैथी को वैश्विक पहचान व किसानों काे सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों के भाव दिलाने आर्थिक उपादेयता, व्यावसायिक पहलू और और भौगोलिक संकेत आधारित राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन बुधवार को बीआर मिर्धा कॉलेज में किया गया। स्थानीय महाविद्यालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला के आयोजन सचिव कैप्टन प्रेमसिंह बुगासरा रहे। तकनीकी सत्र में कृषि महाविद्यालय से जुड़े कई विशेषज्ञों ने शोध पत्र का वाचन किया।
शोधार्थी डाॅ. विकास पावड़िया ने कहा कि किसान वर्षों से नागौरी पान मैथी का उत्पादन कर 60 से 150 प्रति किलो के हिसाब से बेच रहे हैं। जबकि देश-दुनिया के मार्केट में यही नागौरी पान मैथी कंपनियों के लोग 700 से 1500 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचकर 90 फीसदी मुनाफा कमा रहे हैं। शोध पत्र में सामने आया कि जिले में 3 हजार से ज्यादा किसान 4100 हैक्टेयर में इसकी वर्तमान में बुवाई कर रहे हैं। 150 में से 85 फीसदी किसानों ने मंडी की कमी बताई तो 90 फीसदी किसानों का कहना था सही मूल्य नहीं मिलते। वहीं पंकज त्यागी ने मैथी का जीआई टैग प्रक्रिया पर बोलते हुए कहा- मैथी को दुनियाभर में पहचान मिलेगी ही, किसानों को उचित भाव भी मिलेंगे।
भास्कर नॉलेज : जीआई टैग से मिलेगा बड़ा मार्केट
भौगोलिक संकेत (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) वास्तव में वह स्थान या नाम है, जो उत्पाद की भौगोलिक पहचान बताता है। इस पहचान में शामिल हैं- उत्पाद का उद्भव, उसकी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा तथा अन्य विशेषताएं। भौगोलिक संकेत दो प्रकार के होते हैं। पहला, वह भौगोलिक नाम, जो उत्पाद के उद्भव के स्थान का नाम बताता है। जैसे- शैंपेन, दार्जिलिंग की चाय आदि। दूसरा, गैर भौगोलिक पारंपरिक नाम, जो यह बताता है कि उत्पाद किसी एक क्षेत्र विशेष से संबद्ध है। जैसे- अल्फांसो, बासमती और मिथिला पेटिंग आदि। जीआई के तहत पंजीकरण इसके स्वामी या अधिकृत प्रयोगकर्ता को जीआई के प्रयोग का कानूनी अधिकार देता है। इससे गैर अधिकृत व्यक्ति इसका उपयोग नहीं कर सकता है।
कलेक्टर बोले- उचित दाम के लिए मंडी जरूरी, कुलपति- पान मैथी की पहचान रखने को मार्केट मिले
पीडी बोले- राजस्थान से 11 जीआई है रजिस्टर्ड
डीएसटी. जयपुर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डाॅ. मनु सिकरवार ने राजस्थान से रजिस्टर्ड 11 जीआई. उत्पाद की जानकारी देते हुए कहा- कि नागौर पान मैथी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने के लिए जल्द ही भौगोलिक संकेत (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) करवाने के संकेत दिए हैं। ज्योग्राफिकल इंडिकेशन वास्तव में वह स्थान या नाम है, जो उत्पाद की भौगोलिक पहचान बताता है। जीआई पंजीयन होने के बाद वस्तुओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार में न सिर्फ पहचान मिलती है, बल्कि किसानों को उचित मूल्य और बाजार भी मिलता है।
डॉ. राजदीप ने कहा- अपनी गुणवत्ता से पहचाने रखने वाली नागौरी पान मैथी का 90 फीसदी उत्पादन अकेले नागौर में होता है। उन्होंने प्रचलित वैरायटी की जानकारी दी। डॉ नेमाराम व डॉ. मंजू कुमारी ने मैथी पाए जाने वाले रोग व उनका समाधान बताया। डॉ. शक्तिसिंह ने कहा-40 खेताें की मिट्टी जांच में लेमाेटेड की कमी मिली। किसान कृषि महाविद्यालय में उनके पास मिट्टी सैंपल लेकर जांच करवा सकते हैं। पैनल माॅडरेटर के रूप में प्रो. अनिल कुमार छंगाणी, प्रो. भानाराम गाडी, डाॅ. महेश कुमार पूनियां और डाॅ. प्रताप सिंह ने सत्र का संचालन किया। प्राचार्य डाॅ. शंकरलाल जाखड़ ने कहा- पान मैथी को जीआई टैग करवाने के प्रयास सफल होंगे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. सुरेन्द्र कागट और प्रो. भूपेश बाजिया ने किया। डाॅ. प्रकाश नारायण, डाॅ. हेमाराम ने सह संयोजक के रूप में सेवाएं दी। कार्यशाला में प्रो. रिछपाल सिंह राठौड़, डाॅ. एच.आर. छरंग, डाॅ. एम.एस. राठौड़, डाॅ. पूर्णिमा कत्याल, डाॅ. रणजीत पूनियां, सुखराज पुनड़, डाॅ. प्रिया बेनिवाल, डाॅ. चतुर्गुण खलदानियां, नरेन्द्र सकलेचा, प्रो. पूर्णिमा झा, जिला उपभोक्ता मंच सदस्य बलवीर खुड़खुड़िया, रामेश्वर भाटी, रणजीत धौलिया, हनुमान बांगड़ा, परमाराम जाखड़, रामप्रकाश मिर्धा, प्रगतिशील किसान राजेन्द्र चौधरी, रामप्रकाश बिस्सु, ओमप्रकाश डूकिया, मोहम्मद आरीफ मौजूद थे।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कलेक्टर दिनेश कुमार यादव ने पान मैथी के उत्पादन और विपणन व्यवस्था को सुचारू रूप देने के लिए उन्नत किस्म के बीज, उन्नत तकनीक, स्थानीय स्तर पर मैथी मंडी की आवश्यकता बताई। वहीं कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलपति डाॅ. बी.आर. चौधरी ने 1943-44 के बंगाल अकाल का उल्लेख करते हुए आजादी के बाद देश में हुए कृषि सुधार और खाद्यान आत्मनिर्भरता में कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका और रसायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव की जानकारी दी। कोटा खुला विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. आर.एल. गोदारा ने पान मैथी के मसाला और औषधीय महत्व का उल्लेख करते हुए स्थानीय परिवेश और समस्याओं से संबंधित शोध कार्य को वास्तविक मायने में सार्थक बताया। बाेले- आर्थिक पहलू के साथ नैतिकता का उच्च स्तर ही कॉमर्स और ट्रेड के मूलभूत अन्तर को तय करता है। मसाला बोर्ड के सदस्य भोजराज सारस्वत ने कहा- जीआई. टैग के 52 मसालों के बाद 53वां नम्बर नागौरी मैथी का होने की उम्मीद जताई। मयूर लालवानी ने ऑर्गेनिक उत्पाद का महत्व बताया। मांगीलाल ने कहा- रासायनिक को छोड़ किसान जैविक साधनों का उपयोग करें। समापन सत्र में मुख्य वक्ता बीकानेर विश्वविद्यालय के डाॅ. अनिल कुमार दुलार ने पान मैथी के परंपरागत व वर्तमान स्वरूप को बरकरार रखने की बात कही। डाॅ. भंवरूराम जयपाल, वयोवृद्ध समाजसेवी डाॅ. रामकरण डूकिया सहित सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता पवन काला ने विचार व्यक्त किए।
नागाैर. बीआर मिर्धा कॉलेज में राष्ट्रीय कार्यशाला में देशभर से पहुंचे अतिथि व मौजूद कॉलेज स्टाफ।