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थम नहीं रहा अवैध बजरी खनन, क्योंकि वोट बैंक के चलते राजनेता भी दे रहे माफियाओं को संरक्षण

2 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | नागौर/रियांबड़ी

नागौर जिले के रियां बड़ी उपखंड क्षेत्र में लुणी नदी इलाके के दर्जनों गांवों में मानों खुलेआम अवैध बजरी का बाजार लग रहा है। और ये सब तब हो रहा है जबकि पूरे प्रदेश में नदी नालों से बजरी खनन पर सर्वोच्च न्यायालय की रोक है। हालात ये हैं कि अवैध खनन माफिया व अवैध बजरी परिवहन करने वालों को न तो सुप्रीम कोर्ट डर है और न ही प्रशासन का भय है। एक जानकारी अनुसार इस गोरखधंधे में होने वाली अकूत कमाई व बजरी माफिया के पास हिस्सेदार बने क्षेत्र के अधिकतर बेरोजगार नवयुवकों व मजदूर वर्ग के बड़े वोट बैंक के चलते राजनेताओं ने भी इन्हें अपना संरक्षण दे रखा है। नतीजतन यहां हालात अब इतने बिगड़ चुके है की इस गोरखधंधे को बंद करवाने के लिए यहां नियुक्त खान विभाग, राजस्व विभाग, वन विभाग व पुलिस प्रशासन के कर्मचारी व अधिकारी इस कारोबार के पनाहगार बन गए हैं। क्षेत्र के कई बेरोजगार नवयुवकों, मजदूरों व अन्य लोगों को अपने इस व्यापार में छोटी-बड़ी हिस्सेदारियां बांट अपने साथ मिला रखा है। लूणी नदी इलाके से लगते कई गांवों में हर तीसरा आदमी परोक्ष ओर अपरोक्ष रूप से अवैध बजरी कारोबार से जुड़ा है। इस व्यापार को अब यहां स्थानीय राजनेता भी अपना पूरा संरक्षण दे रहे है। बदले में अवैध बजरी व्यापार से जुड़ा ये वर्ग ही अब स्थानीय पंचायत व निकाय चुनाव में किसी नेता के प्रचार प्रसार से लेकर उसकी जीत सुनिश्चित करने का कार्य करता है। उधर इस नाकामी पर जिम्मेदार बात करने से भी बचते रहे।

अवैध खनन पर दबंगों को मिलती है 20 से 25 फीसदी हिस्सेदारी
शुरूआत में अवैध बजरी माफिया यहां नदी क्षेत्र में रेफरेंस या खातेदारी जमीन को खरीदकर अवैध खनन करता था, लेकिन विगत एक साल से बजरी की यहां खेतों में किल्लत आने के बाद क्षेत्र की हजारों बीघा गौचर, वन भूमि व सरकारी जमीनों पर इसके लिए बाकायदा उसने स्थानीय दबंगों को 20 से 25 फीसदी की हिस्सेदारी देकर अपने साथ मिला लिया और इसके बाद अब खुलेआम क्षेत्र की हजारों बीघा गौचर, वन भूमि व सरकारी जमीनों पर धडल्ले से अवैध बजरी खनन कर प्रदेश भर में परिवहन किया जा रहा है। 20 से 25 फीसदी तक मिलने वाली हिस्सेदारी के चलते गांवों में तो कोई विरोध होता नहीं है और जो कभी होता भी है तो ये स्थानीय दबंग उसे दबा देते हैं। हाइवे की होटलों से लेकर नदी क्षेत्र तक पहुंचने वाले रास्ते पर आने वाले कई ढाबा संचालकों, नदी क्षेत्र में ही झोंपड़ियां बना कर रहने वाले खानाबदोशों व हर चौराहे व रास्तों पर प्रशासन की मुखबिरी व रैकी रखने वाले तक को इस अकूत काली कमाई का काबिलियत अनुसार हिस्सा मिलता है। जिसके चलते प्रशासन कभी कभार इस अवैध बजरी माफिया पर कार्रवाई की सोचता भी है तो बड़े लेवल पर कामयाब नहीं हो पाता है क्योंकि इस अवैध गोरखधंधे का सूचना तंत्र यहां इतना मजबूत है कि कार्रवाई से पहले ही सारी सूचना लीक हो जाती है और अवैध बजरी माफिया मौके से सारा संसाधन साफ कर भाग निकलते हैं।

दासावास चौराहा। सप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भी खुलेआम हो रहा अवैध बजरी परिवहन।

दासावास चौराहा। सप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भी खुलेआम हो रहा अवैध बजरी परिवहन।

गौरतलब है की नदी नालों में हो रहे बजरी खनन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान के चलते करीब 15 महीने पूर्व 16 नवम्बर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी कर बजरी खनन पर रोक लगा दी थी। इसके बाद तत्कालीन बीजेपी सरकार ने प्रदेश में बजरी उपलब्धता के नाम पर प्रदेश में नदी किनारों की कृषि व काश्तकारी भूमि पर लीज व शार्ट टर्म परमिट के जरिए बजरी लीजे आवंटित कर दी। इसके बाद एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 3 मई 2018 के आदेश से कृषि भूमि पर भी बजरी खनन करने पर रोक लगा दी थी। जनहित के प्रोजेक्टों के लंबित होने व बजरी उपलब्धता के नाम पर 27 नवम्बर 2018 को हाईकोर्ट ने प्रदेश में नदी किनारों की कृषि व काश्तकारी भूमि पर लीज व शार्ट टर्म परमिट के जरिए बजरी खनन पर लगी रोक हटा दी। इस आदेश के बाद वर्तमान में उपखण्ड क्षेत्र में 5 लीजे व एक एसटीपी संचालित है वहीं इसके उलट क्षेत्र में करीब 80 अवैध बजरी खाने संचालित की जा रही हैं।

इन रास्तों से होता है परिवहन

दासावास चौराहा : इस चौराहे पर रात 8 से लेकर सुबह 7 बजे तक अवैध बजरी के डंपर बेरोकटोक गुजरते है। एक अनुमान के मुताबिक दिन भर में यहां से 400- 500 अवैध बजरी से भरे वाहन निकलते हैं। फिर भी कार्रवाई नहीं।

कोडिया मोड़ चौराहा

इस चौराहे पर दिन भर अवैध बजरी से भरे सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। यहां पास में हीं खातेदारी जमीन पर चलने वाली एक लीज व धर्मकांटा भी है। अगर अवैध बजरी माफिया को कभी कार्रवाई का भय भी हो तो अपने खाली वाहनों को वो लीज व धर्मकांटा के बाहर खड़ा करवा देता है।

लूंगिया चौराहा : बिल्कुल नदी क्षेत्र के मुहाने पर आया हुआ ये चौराहा उपखंड मुख्यालय की तरफ आने के साथ साथ पाली व अजमेर की तरफ जाता है। जिसके चलते इन रास्तों पर जाने वाले अवैध बजरी से भरे डंपर सीधे कुछ किलोमीटर चल जल्दी ही जिले से बाहर निकल जाते हैं।

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