खर्च बचाने के लिए रोबोट खींच रहे विमान, स्लिम एयरहोस्टेस, कालीन भी किए हल्के

Nagour News - पहले विभिन्न एयरलाइंस पर गहराता आर्थिक संकट और फिर जेट एयरवेज की दुर्गति। पिछले कुछ वर्षों से भारतीय एयरलाइंस पर...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 10:40 AM IST
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पहले विभिन्न एयरलाइंस पर गहराता आर्थिक संकट और फिर जेट एयरवेज की दुर्गति। पिछले कुछ वर्षों से भारतीय एयरलाइंस पर आर्थिक बोझ बढ़ता ही जा रहा है। इससे बचने के लिए एविएशन कंपनियां अपने खर्चे को कम कर रही हैं। एयरक्राफ्ट उड़ाने में आने वाले कुल खर्च में से 40 फीसदी केवल फ्यूल में खर्च होता है। यही वजह है कि ज्यादातर एविएशन कंपनियां मुनाफा कमाने या घाटा कम करने के लिए फ्यूल की खपत को कम करने की कोशिश कर रही हैं। कोई कम बजन की एयरहोस्टेस रख रहा है तो कोई विमान में हल्के कालीन का इस्तेमाल कर रहा है।

1. टैक्सीबोट से प्रति फ्लाइट 213 लीटर फ्यूल बच रहा है

टैक्सीबोट एक सेमी रोबोटिक मशीन है। यह रोबोट 9.5 मीटर लंबा और 4.5 मीटर चौड़ा है। टैक्सीबोट चलाने वाली कंपनी केएसयू एविएशन के कम्युनिकेशन हेड (भारत) संजय बहादुर बताते हैं कि यह प्रति एयरक्राफ्ट 213 लीटर तक फ्यूल बचा रहे हैं। इसमें 400-400 हॉर्स पावर के दो इंजन लगे होते हैं। इंजन से इलेक्ट्रिक जनरेटर चलते हैं, जो एयरक्राफ्ट के सभी उपकरणों को बिजली सप्लाई देते हैं। इंजन बंद होने के बावजूद पायलट जैसे-जैसे कमांड देता है, उसी तरह विमान रनवे तक पहुंच जाता है। दिल्ली में मौजूदा समय दो टैक्सी बोट इस्तेमाल हो रहे हैं। बंेगलुरु में भी टैक्सीबोट का इस्तेमाल शुरू होने वाला है। स्पाइसजेट इसका प्रयोग कर रहा है।

2. छोटे विमानों में कम वजन की एयर होस्टेस रख रहें

एटीआर श्रेणी के यानी छोटे एयरक्राॅफ्ट में कम वजन की एयर होस्टेस तैनात की जा रही हैं। ताकि फ्यूल बचाया जा रहा है। एयरक्राॅफ्ट में जिनता कम वजन होगा, लैंडिंग और टेकआॅफ में फ्यूल की खपत उतनी ही कम होती है। यही वजह है कि 40 से 70 सीटों वाले एयरक्राॅफ्ट में तैनात होने वाली एयर होस्टेज की लंबाई में भी छूट दी गई है। सामान्य रूप से एयरहोस्टेज की न्यूनतम लंबाई 155 सेमी. होनी चाहिए, लेकिन इन विमानों के लिए न्यूनतम लंबाई 155 सेमी. रखी गई है। यही वजह है कि इसके लिए नार्थ ईस्ट की युवतियों को प्राथमिता दी जाती है। गो एयर ने तो वर्ष 2013 में ही क्रू मेंबर्स की नियुक्ति में सिर्फ महिलाओं को लेने की बात कही थी।

3. ग्रीन इनीशिएट में फ्यूल अतिरिक्त भरना कम किया

आपात स्थिति को देखते हुए सामान्य तौर पर एयरक्राॅफ्ट जरूरत से 20% तक अधिक फ्यूल भर कर उड़ान भरते हैं। लेकिन अब एयरक्राफ्ट उनता ही फ्यूल लेकर उड़ते हैं, जितने कि जरूरत हो। ग्रीन इनीशिएट के बारे में बताते हुए एयर इंडिया के प्रवक्ता धनंजय कुमार उदाहरण देते हैं कि एयर इंडिया की फ्लाइट दिल्ली से हैदराबाद पहुंचने पर टीम एटीसी से रिपोर्ट लेती है कि अगले डेढ़ घंटे तक (दिल्ली पहुंचने का समय) दिल्ली के रूट का मौसम कैसे रहेगा, हवा की कितनी स्पीड कितनी रहेगी, लैंडिग के समय मौसम कैसा रहेगा, मौसम कहां कहां खराब मिल सकता है। अगर सभी रिपोर्ट सामान्य मिलती है तो ही एयरक्राॅफ्ट दिल्ली वापस आएगा, अन्यथा थोड़ा इंतजार कर लेता है।

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