- Hindi News
- National
- Makrana News Rajasthan News Sarala Is Tied In Chains Due To No Treatment Money
इलाज के पैसे नहीं, इसलिए जंजीरों में बंधी है सरला
सरकार द्वारा गरीबाें व असहायाें काे बीमारियाें के मुफ्त उपचार की सुविधा प्रदान कर राहत देने के लाख दावे किए जा रहे हाे मगर घरातल पर आज भी कमोबेश हालात यही है कि न गरीब व लाचार लाेगाें काे समय पर सरकारी इलाज मिल पाता है और ना ही काेई अन्य राहत। कुछ ऐसा ही वाकया मकराना पंचायत समिति के गांव सफेड बड़ी के बाहरी छाेर पर स्थित नायकाें के मोहल्ले में देखने काे मिला।
यहां समंदर राम नायक की मानसिक रूप से बीमार 16 वर्षीय पुत्री सरला इलाज के अभाव में जंजीर की कैद में जकड़ी हुई नारकीय जिन्दगी जीने को मजबूर है। इलाज के लिए परिजनों ने अपने स्तर पर जयपुर, अजमेर आदि कई स्थानाें पर उसे दिखाया मगर गरीबी के चलते कुछ दिनाें बाद परिजन भी थक हार गए। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक है। ऐसे में पिता समन्दरराम जैसे-तैसे मजदूरी करके अपने परिवार काे पाल रहे हैं। परिवार में पिता के अलावा दूसरा कमाने वाला नहीं हाेने से आय का काेई अन्य स्राेत भी नहीं है। इस कारण परिजन सरला का इलाज करवाने में पूरी तरह से असमर्थ है। मजबूरन तीन भाई बहनाें में सबसे बड़ी सरला इलाज के अभाव में घर के ठीक सामने लगे पेड़ से जंजीराें के सहारे कैद हाेकर अपना जीवन बीता रही है।
खुद काे व दूसराे काे नुकसान न पहुंचा दे, इसलिये बांध रखा है पेड़ से
परिजनाें ने बताया कि जन्म से ही मानसिक रूप से विमंदित सरला काे इलाज के लिए कई जगह लेकर गए मगर परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हाेने के कारण इलाज नहीं करवा पाए। अब इलाज के अभाव में नारकीय जीवन जी रही सरला मानसिक रूप से विमंदित हाेने के कारण खुद काे या किसी दूसरे काे काेई नुकसान नहीं पहुंचा दे, इसलिए मजबूरन उसे घर के सामने पेड से लाेहे की जंजीर से बांध कर रखने की मजबूरी है। हालांकि सरकारी स्तर पर सरला काे पेंशन देने सहित परिवार काे बीपीएल में जरूर शामिल किया गया है पर उसके इलाज के लिए काेई सरकारी सहायता अब तक परिजनों काे नहीं मिल पाई है।
बूडसू. गांव सफेड बडी में पेड से लाेहे की जंजीर के सहारे बंधी सरला।