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प्रवचन सुनकर बेटे-बहुओं ने लिया माता-पिता के साथ रहने और उनकी सेवा करने का संकल्प

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 09:11 AM IST

Nagour News - बंशीवाला मंदिर में मंगलवार को प्रवचन देते हुए राष्ट्रसंत ललितप्रभ सागर महाराज ने कहा कि रिश्ता वो नहीं होता जो...

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बंशीवाला मंदिर में मंगलवार को प्रवचन देते हुए राष्ट्रसंत ललितप्रभ सागर महाराज ने कहा कि रिश्ता वो नहीं होता जो दुनिया को दिखाया जाता है। रिश्ता वह होता है जिसे दिल से निभाया जाता है। अपना कहने से कोई अपना नहीं होता, अपना वो होता है जिसे दिल से अपनाया जाता है। उन्होंने कहा कि वक्त पडऩे पर परिवार में सॉरी कहने का बड़प्पन दिखाइए। माफी माँगने का मतलब यह कतई नहीं है कि आप गलत हैं और सामने वाला सही है, वरन इसका अर्थ यह है कि आप रिश्तों को निभाना जानते हैं। रिश्तों में कभी खटास घुल जाए तब भी उन्हें मत तोडिये। याद रखिए, गंदा पानी पीने के काम तो नहीं आता, पर आग बुझाने के काम जरूर आता है।

जीवन में चार चीजें कभी मत तोडि़ए - रिश्ता, विश्वास, दिल और वचन ये टूटते हैं तो आवाज नहीं होती, पर दिल बहुत दुखता है। आप खुद भी भगवान को तभी याद करते हैं जब आप मुसीबत में होते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे बिना पानी का तालाब और बिना पैसे का पर्स काम का नहीं होता ठीक वैसे ही बिना प्रेम का परिवार होता है। अगर हम अपने सातों वारों को आनंददायी बनाना चाहते हैं तो पहले आठवें वार परिवार को प्रेम और मिठास से भरें। पहले पाँच भाई छोटे घरों में भी जैसे-तैसे साथ रहना चाहते थे क्योंकि उनके दिल बड़े थे, आज दो भाई भी जैसे-तैसे अलग होना चाहते हैं क्योंकि मकान तो बड़े हो गए, पर लोगों के दिल बहुत छोटे हो गए। पहले एक माँ-बाप पाँच बेटों को पाल-पोषकर बड़ा कर लेते थे और आज पाँच बेटे मिलकर भी एक माँ-बाप का पालन-पोषण कर नहीं पा रहे हैं।

संतप्रवर ने कहा कि वे लोग किस्मत वाले होते हैं जिनके सिर पर माँ-बाप का साया होता है। याद रखें, माँ-बाप उस बूढ़े पेड़ की तरह होते हैं जो फल भले ही न दे, पर छाया जरूर देते हैं। कहते हैं, बच्चा जब पैदा होता है तो माँ को उतना दर्द होता है जितना दर्द एक साथ बीस हड्डियों के टूटने पर हुआ करता है। जिन्होंने दर्द सहकर हमें जन्म दिया हम संकल्प लें कि हम उन्हें कभी दर्द नहीं देंगे। अगर हमारे कारण उनकी आँखों में आँसू आ गए तो इससे बड़ा और कोई पाप नहीं होगा। पति को श्रवणकुमार बनाएँ- संत ने महिलाओं से कहा कि अगर वे श्रवणकुमार की माँ बनना चाहती है तो कुछ न करें बस अपने पति को श्रवणकुमार बना दें। आखिर दुनिया में वही लौटकर आता है जैसा हम दूसरों को दिया करते हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि महीने में कुछ दिन अपनी बूढ़ी मां या दादी के पास सोने की भी आदत डालें

भास्कर संवाददता | नागौर

बंशीवाला मंदिर में मंगलवार को प्रवचन देते हुए राष्ट्रसंत ललितप्रभ सागर महाराज ने कहा कि रिश्ता वो नहीं होता जो दुनिया को दिखाया जाता है। रिश्ता वह होता है जिसे दिल से निभाया जाता है। अपना कहने से कोई अपना नहीं होता, अपना वो होता है जिसे दिल से अपनाया जाता है। उन्होंने कहा कि वक्त पडऩे पर परिवार में सॉरी कहने का बड़प्पन दिखाइए। माफी माँगने का मतलब यह कतई नहीं है कि आप गलत हैं और सामने वाला सही है, वरन इसका अर्थ यह है कि आप रिश्तों को निभाना जानते हैं। रिश्तों में कभी खटास घुल जाए तब भी उन्हें मत तोडिये। याद रखिए, गंदा पानी पीने के काम तो नहीं आता, पर आग बुझाने के काम जरूर आता है।

जीवन में चार चीजें कभी मत तोडि़ए - रिश्ता, विश्वास, दिल और वचन ये टूटते हैं तो आवाज नहीं होती, पर दिल बहुत दुखता है। आप खुद भी भगवान को तभी याद करते हैं जब आप मुसीबत में होते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे बिना पानी का तालाब और बिना पैसे का पर्स काम का नहीं होता ठीक वैसे ही बिना प्रेम का परिवार होता है। अगर हम अपने सातों वारों को आनंददायी बनाना चाहते हैं तो पहले आठवें वार परिवार को प्रेम और मिठास से भरें। पहले पाँच भाई छोटे घरों में भी जैसे-तैसे साथ रहना चाहते थे क्योंकि उनके दिल बड़े थे, आज दो भाई भी जैसे-तैसे अलग होना चाहते हैं क्योंकि मकान तो बड़े हो गए, पर लोगों के दिल बहुत छोटे हो गए। पहले एक माँ-बाप पाँच बेटों को पाल-पोषकर बड़ा कर लेते थे और आज पाँच बेटे मिलकर भी एक माँ-बाप का पालन-पोषण कर नहीं पा रहे हैं।

संतप्रवर ने कहा कि वे लोग किस्मत वाले होते हैं जिनके सिर पर माँ-बाप का साया होता है। याद रखें, माँ-बाप उस बूढ़े पेड़ की तरह होते हैं जो फल भले ही न दे, पर छाया जरूर देते हैं। कहते हैं, बच्चा जब पैदा होता है तो माँ को उतना दर्द होता है जितना दर्द एक साथ बीस हड्डियों के टूटने पर हुआ करता है। जिन्होंने दर्द सहकर हमें जन्म दिया हम संकल्प लें कि हम उन्हें कभी दर्द नहीं देंगे। अगर हमारे कारण उनकी आँखों में आँसू आ गए तो इससे बड़ा और कोई पाप नहीं होगा। पति को श्रवणकुमार बनाएँ- संत ने महिलाओं से कहा कि अगर वे श्रवणकुमार की माँ बनना चाहती है तो कुछ न करें बस अपने पति को श्रवणकुमार बना दें। आखिर दुनिया में वही लौटकर आता है जैसा हम दूसरों को दिया करते हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि महीने में कुछ दिन अपनी बूढ़ी मां या दादी के पास सोने की भी आदत डालें

समणी डॉ. सुयशनिधि बोलीं - दृष्टि मिथ्या होने पर मनुष्य को सच्ची बात भी कटु लगने लगती है

नागौर | श्री जयमल जैन पौषधशाला के प्रांगण में श्री अखिल भारतीय श्वेतांबर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ शाखा नागौर के तत्वाधान में आचार्य प्रवर पार्श्वचंद्र महाराज साहेब, डॉ.मुनि पदमचंद्र महाराज साहेब की सुशिष्याएं समणी निर्देशिका डॉ. सुयशनिधि, समणी सुधननिधि, समणी सुयोगनिधि के सान्निध्य में बुधवार को भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में दोपहर 2 बजे से भगवान महावीर की उपदेशना, प्रवचन एवं धार्मिक प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। ओली तप आयोजन के दौरान चल रहे प्रवचन सभा को सम्बोधित करते हुए डॉ. समणी सुयशनिधि ने कहा कि चारित्र एक ऐसा चमकता हुआ हीरा है, जिसकी चमक तीनों में पहुंच जाती है। जो जीवन में चारित्र की रक्षा कर लेता है, उसे जीवन में और किसी को संभालने की जरूरत नहीं, वह अपने आप सुरक्षित हो जाता है। डॉ. समणी ने कहा कि लाख उपकार करने पर भी दुर्जन व्यक्ति दुर्जनता नहीं छोड़ता है। दृष्टि मिथ्या होने पर सच्ची बात भी कटु लगती है। श्रीपाल चरित्र में धवल सेठ की दुर्जनता को बताते हुए कहा कि वह श्रीपाल को हमेशा मारने की योजना बनाने में जुटा हुआ रहता। परन्तु अपकारी पर उपकार करने वाले कोई कोई विरलय व्यक्ति होते हैं। श्रीपाल ने हमेशा परोपकार भाव रखा और नव पद स्मरण एवं ध्यान से हर परिस्थिति में सफलता प्राप्त की। ओली तप के छट्ठे दिवस पर ज्ञान की आराधना के लिए प्रेरणा दी गई। डॉ. समणी ने कहा कि पूर्वोपार्जित पुण्य योग से पुरुष को हर पल संबल मिलना शुरू हो जाता है। पर उसके लिए साधक को उतना निर्मल, पवित्र और अपने साध्य के लिए समर्पित होना जरूरी है।मंच का संचालन संजय पींचा ने किया।प्रवचन की प्रभावना के लाभार्थी साधर्मिक महानुभव,नागौर रहे।आयंबिल तप की प्रभावना के लाभार्थी अमरावदेवी,हुकमीचंद मोदी परिवार रहे।नवीन गुरा ने बताया कि आयंबिल तप का आयोजन श्री रावत स्मृति भवन में निरंतर किया जा रहा है।इस मौके पर कंचनदेवी ललवानी,सरोजदेवी चौरड़िया,तीजादेवी पींचा, पांचीदेवी ललवानी सहित अनेक श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे।

नागौर. शहर के बंशीवाला मंदिर में प्रवचन सुनने के लिए पहुंचे शहरवासी।

भागवत कथा में सभी ग्रंथों का सार: रामप्रसाद महाराज

श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कथा सुनने के लिए पहुंचे श्रद्धालु।

गोगेलाव | गांव गठीलासर के सुथारों की ढाणी में चल रही श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ कथा के चौथे दिन संत रामप्रसाद महाराज ने भगवान के विभिन्न अवतारों की कथाओं का वर्णन करते हुए अजामिल की कथा सुनाई। अजामिल की कथा का प्रसंग सुनाते हुए संत ने बताया कि भगवान के नाम का स्मरण करने मात्र से मनुष्य के पाप कर्म दूर होते हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर की भक्ति करके ही इस मनुष्य जीवन को सफल बनाया जा सकता है। मनुष्य को हमेशा सद्कार्य करते हुए ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा में समस्त ग्रंथों का सार निहित है। इस अवसर पर कालूराम, रामकरण, भंवर लाल, कमल किशोर जोशी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

आज मनाएंगे कृष्ण जन्मोत्सव, होंगे कई कार्यक्रम

मेड़ता रोड | बाइपुरा क्षेत्र में स्थित हंस निर्वाण आश्रम में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण के दौरान कथावाचक अशोक दाधीच ने कहा कि ईश्वर की इच्छा शक्ति के आगे मनुष्य की इच्छा कुछ काम नहीं आती है। क्योंकि सब कुछ प्रभु के हाथ में ही है। प्रभू का स्मरण करने वालों का ही प्रभू सदैव रक्षा करते हैं। मनुष्य को हमेशा अच्छे कर्म करते हुए ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए, ताकि जीवन का कल्याण हो सके।

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