फायर रिंग वलियाकार के नाम से होगा साल का अंतिम सूर्य ग्रहण

Nagour News - इस बार 26 दिसंबर को अमावस्या पर साल का तीसरा और आखिरी सूर्यग्रहण होगा। यह भारत सहित पूर्वी यूरोप, एशिया,...

Nov 22, 2019, 10:01 AM IST
Nagaur News - rajasthan news the last solar eclipse of the year will be in the name of fire ring ring
इस बार 26 दिसंबर को अमावस्या पर साल का तीसरा और आखिरी सूर्यग्रहण होगा। यह भारत सहित पूर्वी यूरोप, एशिया, उत्तरी-पश्चिमी आस्ट्रेलिया और पूर्वी अफ्रीका में दिखाई देगा। यह वलयाकार सूर्यग्रहण होगा। इसमें सूरज अंगूठी की तरह नजर आएगा।

इसको लेकर धार्मिक मान्यता भी है। जब अमृत मंथन में देवताओं और दानवों के बीच विवाद हो गया था तो भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण कर देवताओं और दानवों को अलग बिठा दिया, लेकिन कुछ दानव देवताओं की लाइन में आकर बैठ गए। इस दौरान अमृत बांटते समय दानवों को अमृत लेते सूरज और चांद ने देख लिया और उन्होंने भगवान विष्णु को बताया तो उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से दानवों के सिर और धड़ अलग कर दिए, लेकिन वे मरे नहीं। सिर वाला भाग राहु और धड़ वाला भाग केतु कहलाता है। इसी वजह से राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा को अपना शत्रु मानते है। पूर्णिमा और अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा का ग्रास कर लेते हैं। इसे ही सूर्य और चंद्र ग्रहण कहा जाता है।

ज्योतिषाचार्य पं. विमल पारीक ने बताया किवलयाकार सूर्य ग्रहण में जब चंद्रमा पृथ्वी के काफ़ी दूर रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है। सूर्य के बाहर का क्षेत्र आग के समान प्रकाशित होने के कारण कंगन या अंगूठी वलय के रूप में चमकता दिखाई देता है। अंगूठी और कंगन के मध्य का आकार में बने सूर्य ग्रहण को ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं। जिसे वैज्ञानिकों ने फायर रिंग नाम दिया है।

ऐसे होता है सूर्यग्रहण

पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती है और चांद पृथ्वी की। कभी-कभी इस प्रक्रिया में चांद सूरज और धरती के बीच में आता है। इससे सूरज की कुछ या फिर सारी रोशनी धरती पर आने से रुक जाती है और धरती पर अंधेरा फैल जाता है। इस घटना को सूर्यग्रहण कहा जाता है। यह घटना अमावस्या के दिन होती है। ज्यादातर तो चांद सूरज के कुछ भाग को ढंकता है। जिसे खंड ग्रहण कहा जाता है, लेकिन कभी-कभार ऐसा भी होता है कि जब चांद सूरज को पूरी तरह से ढंक लेता है तो इसे पूर्ण ग्रहण कहते हैं।

सूर्य ग्रहण काल समय

ग्रहण प्रारंभ काल-08:15

मध्यावधि ग्रास-09:31 तक

ग्रहण समाप्ति काल-10:57 तक

खण्डग्रास की अवधि-02 घंटे 40 मिनट 22 सेकंड्स तक

अधिकतम परिमाण-0.56

सूतक प्रारम्भ-08:10 सायं, दिसम्बर 25 से ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले से प्रारंभ ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मान्य

सूतक समाप्त-10:57 प्रात कालीन (26 दिसंबर) को 2019

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