भारत में विख्यात नागौर की नौ छतरियां दादाबाड़ी का पूरे देश में है तीसरा स्थान

Nagour News - शहर में स्थित नौ छतरियां पूरे भारत में प्रसिद्ध है, प्राचीनता की दृष्टि से दादाबाड़ी का अवलोकन करने से इतिहासकारों...

Bhaskar News Network

Sep 22, 2019, 11:05 AM IST
Nagaur News - rajasthan news the nine chhatris of nagaur famous in india are the third place of dadabari in the whole country
शहर में स्थित नौ छतरियां पूरे भारत में प्रसिद्ध है, प्राचीनता की दृष्टि से दादाबाड़ी का अवलोकन करने से इतिहासकारों के अनुसार इस दादाबाड़ी का भारत में तीसरा या पांचवां स्थान है। क्योंकि प्राचीन काल में जैन आचार्यों के प्रभाव से यह जैन धर्म का प्रमुख केंद्र माना जाता था। आचार्य राज सूरी ने नागौर दादाबाड़ी का परचा सुविशेष माना जाता है।

जिससे यह दादाबाड़ी तीसरे स्थान पर आती है। भंवरलाल नाहटा के अनुसार नागौर में यह दादाबाड़ी जिनकुशल सूरि के पट्टधर जिनलब्धि सूरि के समय की होने का मत व्यक्त किया है। जिनका स्वर्गवास नागौर में 1406 में हुआ था। यह दादाबाड़ी 670 वर्ष से ज्यादा पुरानी है। तीसरे दादा गुरूदेव जिन कुशल सूरि का नागौर में कई बार प्रवास हुआ था। 1375 में फलौदी पार्श्व नाथ की द्वितीय बार यात्रा कर नागौर पधारने पर उनको यहां वाचनाचार्य पद से सुशोभित किया गया था। इतने अधिक स्तवन और स्मारक किसी भी अन्य आचार्य के नहीं है। इनको स्वगच्छ, परगच्छ, स्थानकवासी, तेरापंथी आदि के सभी लोग भक्ति पूर्वक मानते हैं। (कंटेंट- भास्कर खजांची)

जानकारी अनुसार नागौर जैन दादाबाड़ी में तीसरे दादा गुरूदेव जिनकुशल सूरि की चरण पादुका 1623 माह बदी 5 सोमवार को चौथे दादा गुरूदेव जिनचंद्र सूरि द्वारा प्रतिष्ठापित है। दादा गुरूदेव की मूर्ति 2033 फाल्गुन बदी 7 को मुनिराज साम्यानंद, जयानंद, कुशल मुनि व जैन कोकिला विचक्षण श्रीजी द्वारा प्रतिष्ठापित है। प्रथम दादा गुरूदेव युग प्रधान जिनदत्त सूरि को चरण पादुका 1658 में चौथे दादा गुरूदेव जिनचंद्र सूरि के द्वारा प्रतिष्ठापित है। दादा गुरूदेव की मूर्ति 2033 फाल्गुन बदी 7 को मुनिराज साम्यानंद, जयानंद, कुशल मुनि व जैन कोकिला विचक्षणश्रीजी द्वारा प्रतिष्ठापित है। 24वें तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी के 2500वें निर्वाण महोत्सव पर नागौर में अति प्राचीन दादाबाड़ी में खरतरगच्छ श्रीसंघ नागौर द्वारा भगवान महावीर का नूतन शिखर बंध जिन मंदिर बनवाने का निर्णय लिया गया। जिसकी प्राण प्रतिष्ठा फाल्गुन बदी 7 वार गुरूवार 2033 को मुनिराज व जैन कोकिला, विचक्षणश्रीजी, साम्यानंद, जयानंद, कुशल मुनि के द्वारा विधिवत संपन्न हुई। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सकल जैन श्वेतांबर समाज के साथ सकल दिगंबर जैन समाज का विशेष सहयोग रहा।

नागौर. नौ छतरियां दादावाड़ी स्थित मंदिर।

भास्कर संवाददाता | नागौर

शहर में स्थित नौ छतरियां पूरे भारत में प्रसिद्ध है, प्राचीनता की दृष्टि से दादाबाड़ी का अवलोकन करने से इतिहासकारों के अनुसार इस दादाबाड़ी का भारत में तीसरा या पांचवां स्थान है। क्योंकि प्राचीन काल में जैन आचार्यों के प्रभाव से यह जैन धर्म का प्रमुख केंद्र माना जाता था। आचार्य राज सूरी ने नागौर दादाबाड़ी का परचा सुविशेष माना जाता है।

जिससे यह दादाबाड़ी तीसरे स्थान पर आती है। भंवरलाल नाहटा के अनुसार नागौर में यह दादाबाड़ी जिनकुशल सूरि के पट्टधर जिनलब्धि सूरि के समय की होने का मत व्यक्त किया है। जिनका स्वर्गवास नागौर में 1406 में हुआ था। यह दादाबाड़ी 670 वर्ष से ज्यादा पुरानी है। तीसरे दादा गुरूदेव जिन कुशल सूरि का नागौर में कई बार प्रवास हुआ था। 1375 में फलौदी पार्श्व नाथ की द्वितीय बार यात्रा कर नागौर पधारने पर उनको यहां वाचनाचार्य पद से सुशोभित किया गया था। इतने अधिक स्तवन और स्मारक किसी भी अन्य आचार्य के नहीं है। इनको स्वगच्छ, परगच्छ, स्थानकवासी, तेरापंथी आदि के सभी लोग भक्ति पूर्वक मानते हैं। (कंटेंट- भास्कर खजांची)

जानकारी अनुसार नागौर जैन दादाबाड़ी में तीसरे दादा गुरूदेव जिनकुशल सूरि की चरण पादुका 1623 माह बदी 5 सोमवार को चौथे दादा गुरूदेव जिनचंद्र सूरि द्वारा प्रतिष्ठापित है। दादा गुरूदेव की मूर्ति 2033 फाल्गुन बदी 7 को मुनिराज साम्यानंद, जयानंद, कुशल मुनि व जैन कोकिला विचक्षण श्रीजी द्वारा प्रतिष्ठापित है। प्रथम दादा गुरूदेव युग प्रधान जिनदत्त सूरि को चरण पादुका 1658 में चौथे दादा गुरूदेव जिनचंद्र सूरि के द्वारा प्रतिष्ठापित है। दादा गुरूदेव की मूर्ति 2033 फाल्गुन बदी 7 को मुनिराज साम्यानंद, जयानंद, कुशल मुनि व जैन कोकिला विचक्षणश्रीजी द्वारा प्रतिष्ठापित है। 24वें तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी के 2500वें निर्वाण महोत्सव पर नागौर में अति प्राचीन दादाबाड़ी में खरतरगच्छ श्रीसंघ नागौर द्वारा भगवान महावीर का नूतन शिखर बंध जिन मंदिर बनवाने का निर्णय लिया गया। जिसकी प्राण प्रतिष्ठा फाल्गुन बदी 7 वार गुरूवार 2033 को मुनिराज व जैन कोकिला, विचक्षणश्रीजी, साम्यानंद, जयानंद, कुशल मुनि के द्वारा विधिवत संपन्न हुई। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सकल जैन श्वेतांबर समाज के साथ सकल दिगंबर जैन समाज का विशेष सहयोग रहा।

नागौर. मंदिर में स्थापित मूर्ति।

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