इस बार सिंह पर सवार होकर आएगी संक्रांति, बढ़ेगा व्यापार

Nagour News - इस बार संक्रांति सिंह पर सवार होकर आएगी। संक्रांति का उप वाहन हाथी रहेगा। सिंह पर सवार यह संक्रांति सोने के बर्तन...

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 05:41 AM IST
Nagaur News - rajasthan news this time sankranti will come riding on the lion business will grow
इस बार संक्रांति सिंह पर सवार होकर आएगी। संक्रांति का उप वाहन हाथी रहेगा। सिंह पर सवार यह संक्रांति सोने के बर्तन में चावल खाती हुईं वैश्य के घर प्रवेश करेगी। ज्योतिषि गणना के अनुसार वैश्य के घर संक्रांति के आने से राज्य में व्यापार और व्यवसाय में उत्तम लाभ होगा। इससे महंगाई पर रोक लगेगी। मकर संक्रांति का योग दो दिन तक रहेगा। वहीं, धातुओं में तेजी आएगी।

वस्त्र व्यापार में उन्नति रहेगी। संक्रांति के पुण्य काल के दौरान 15 जनवरी को अमृत सिद्धि व रवि योग का संयोग भी रहेगा। नौ ग्रहों में प्रबलशाली सूर्य 14 जनवरी रात 7:52 बजे धनु राशि में से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इससे मकर संक्रांति का पुण्यकाल 14 जनवरी को दोपहर 1:28 बजे से दूसरे दिन 15 जनवरी को सुबह 11:52 बजे तक रहेगा। इससे दोनों दिन दान-पुण्य और स्नान किया जा सकेगा। ज्योतिषाचार्य के अनुसार मकर राशि में प्रवेश करते ही सूर्यदेव उत्तरायण हो जाएंगे। सूर्य के दक्षिणायान से उत्तरायण होते ही दिन भी बड़े होने लगेंगे। इसके साथ ही धनु मलमास भी समाप्त हो जाएगा और मांगलिक कार्य शुरू होंगे।

तिल दान का विशेष महत्व:मकर-संक्रांति के दिन तिल से बनी हुई वस्तुओं एवं ताम्र पात्रों का दान देना फलदायी होगा। नदी में स्नान कर जरूरतमंद व दान से विशेष फल प्राप्त होगा।

राशियों पर इस बार मकर संक्रांति का फल

मेष-धनलाभ, वृष-हानि, मिथुन-लाभ, कर्क-कार्यसिद्धि, सिंह- पुण्य लाभ, कन्या- कष्ट व पीड़ा, तुला- मान-सम्मान, वृश्चिक- भय व व्याधि, धनु- सफलता, मकर- विवाद, कुंभ- धन लाभ, मीन- कार्यसिद्धि

सूर्य कब होते हैं उत्तरायण और दक्षिणायन में

मकर, कुंभ, मीन, मेष, वृष, मिथुन राशि में जब सूर्य रहते है तब उत्तरायण कहा जाता है। सूर्य जब कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक और धनु राशि पर स्थित रहते है तब दक्षिणायान कहलाता है।

उद्योगपति और व्यापारियों को होगा खासा लाभ

पंडितों के अनुसार इस बार संक्रांति का वाहन शेर एवं उप वाहन गज होगा। श्वेत वस्त्र धारण किए स्वर्ण पात्र में अन्न ग्रहण करते हुए कुमकुम का लेप किए हुए। ईशान में दृष्टि व उत्तर दिशा में गमन होने से उत्तराखंड व उत्तरीय प्रदेशों में पर्वत पतन, हिमपात जैसी प्राकृतिक आपदाओं की संभावना रहेगी। वार नाम ध्वांक्षी होने से स्वतंत्र कार्य कारक, आयात निर्यात, उद्योग संचालक व व्यापारियों के लिए यह संक्रांति लाभ दायक है। वहीं, नक्षत्र नाम ध्वांक्षी होने से आयात-निर्यात कर्ता शेयर बाजार, उद्योगपति, व्यापारियों को भी सुख देने वाली रहेगी।

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