डाबड़ा कांड के शहीदों को दी श्रद्धांजलि
देश की आजादी से पूर्व सामंतशाही तमहंदारों एवं किसानों के बीच हुए डाबड़ा कांड के शहीदों को डीडवाना विधायक चेतन डूडी की अगुवाई में पुष्पाजंलि देकर दो मिनट का मौन रखा गया। शहीद स्मारक पर पहुंचे सैकड़ों जनप्रतिनिधियों व किसानों ने डाबड़ा में शहीद हुए चुन्नीलाल शर्मा निम्बी जोधां, रामूराम लाडनूं, रूघाराम लाडनूं, पन्नाराम डाबड़ा एवं नन्दाराम अड़कसर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन पुष्प अर्पित किए। डूडी ने सामंतशाही के खिलाफ आवाज उठाने वाले इन शहीदों की गाथा सुनाते हुए किसानों को इनसे प्रेरणा लेने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर डाबड़ा शहीद विकास समिति एवं बिंदल हॉस्पिटल के तत्वावधान में एक दिवसीय निशुल्क नेत्र एवं हड्डी जोड़ रोग के लिए परामर्श एवं जांच शिविर का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों मरीजों की जांच की गई। कार्यक्रम के दौरान डीडवाना उपखण्ड के धनकोली के शहीद जीवणराम खस्वां, दाऊदसर के लिछमणराम कड़वा, असगर खां खाखोली, चन्द्राराम गोदारा सरदारपुरा, चन्द्राराम निठरवाल मोडियावट, पीथाराम बाजोडिय़ा सूपका, लॉस नायक महबूब खां हवलदार, नानू खां बरागंणा के परिजनों का स्मृति चिन्ह एवं माल्यार्पण कर अभिनंदन किया गया। समारोह के दौरान स्कूली विद्यार्थियों ने देश भक्ति से ओतप्रोत गानों पर नृत्य कर उपस्थित लोगों में जोश भर दिया। कार्यक्रम के दौरान प्रधान जालाराम भाकर, मौलासर सरपंच जोगेन्द्र बलारा, अलखपुरा सरपंच श्रवणराम बिजारणियां, सरपंच इमरान खां दाऊदसर, पूर्व सरपंच हनुमान राम पूनिया, मेवाराम सेवदा, भागूराम रणवां, घासीराम सेवदा, प्रमोद स्वामी, ब्रजेश पारीक, संदीप चौधरी, ताराचंद लोमरोड़, रवि बिजारणियां आदि मौजूद रहे। शहीद विकास समिति के संयोजक मूलाराम खोखर ने आभार जताया।
शहीद दिवस मनाने का उद्धेश्य
गौरतलब है कि कस्बे से पांच किमी दूर ग्राम डाबड़ा में 13 मार्च 1947 के दिन किसानों एवं जमींदारों के बीच घमासान लड़ा गया था, इसमें पांच किसान नेताओं को अपनी जान गंवानी पड़ी। वही कई किसान व नेता घायल हो गए। स्वतंत्रता के बाद डाबड़ा काण्ड में जान गंवाने वाले किसान हितों के लिए शहीद मानकर तथा इनकी शहादत को चिरस्मरणीय बनाये रखने के उद्देश्य से यहां पर शहीद स्मारक का निर्माण कराया गया व इस स्थल पर प्रतिवर्ष शहीद मेला व श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
मौलासर. शहीद स्मारक पर जनप्रतिनिधियों द्वारा शहीदों कोश्रद्धाजंली देते।