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एमडीएच पार्क के पास खतरनाक मोड़ पर 9 माह में तीसरी बार ट्रक पलटा, अब तक हो चुके हैं सात हादसे

एक वर्ष पहले
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शहर के जोधपुर रोड बाईपास एमडीएच पार्क और नंदी शाला के बीच हाईवे की गोलाई भारी वाहनों के लिए खतरनाक होती जा रही है। गत साढे 4 वर्ष में सात ट्रक पलट चुके हैं। गत 9 माह में तीसरा हादसा घटित हो गया है। मंगलवार को तड़के एक बार फिर सातवें हादसे के रूप में खल से भरा ट्रक पलटी खा गया। हादसे में ट्रक ड्राइवर व खलासी घायल हुए हैं। जिसका जेएलएन हॉस्पिटल में इलाज जारी है। जानकारी अनुसार महाराष्ट्र से खल से भरा ट्रक बीकानेर जा रहा था। इसी दौरान जोधपुर रोड पर इस बाईपास मोड़ पर हादसा घटित हुआ। यही हादसा दिन में होता तो भीड़ में जन हानि हो सकती थी। क्योंकि पास में ही नंदी शाला के पास भीड़ रहती है वही एमडीएच पार्क में भी लोगों की आवाजाही रहती है। लगातार हादसों के बाद भी पीडब्लयूडी आज तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठा पाया है। गोलाई की तकनीकी खामियों के बारे में विशेषज्ञ बताते हैं कि गोलाई को स्पीड के अनुसार सुपर एलिवेशन में बनाया है इसके हिसाब से स्पीड को जीरो पर करके ही वाहन को निकाला जा सकता है। रात के समय जरा सी लापरवाही होते ही वाहन पलट रहे हैं। वाहनों की स्पीड को कम करने के लिए मोड़ से पहले उचित सूचना संकेतक बोर्ड और एक और स्पीड ब्रेकर लगाने की बात विभाग की तरफ से कही जा रही है।

एक ही मोड़ पर साढे 4 साल में सातवां हादसा

हाईवे पर बने इस विकट मोड़ पर साढे 4 साल में यह सातवां ट्रक हादसा है। पहला हादसा वर्ष 2016 में सितंबर माह के दौरान हुआ था। शराब से भरा ट्रक अचानक पलटी खाकर गिर गया। वर्ष 2017 में टमाटर और फ्रूट से भरा ट्रक पलटी खाया था। इसी प्रकार वर्ष 2018 में भी बीयर की बोतलों से भरा ट्रक दिन में पलटी खा गया था। गत मई 2019 में कोयले से भरा ट्रक पलटा और इस वर्ष 18 फरवरी को भी एक ट्रक पलट गया था।

सूचना संकेतक बोर्ड ऐसा जो रात को नहीं दिखता है

इस रोड पर 24 घंटे जोधपुर, बीकानेर के अलावा डीडवाना बाईपास से दिल्ली, अजमेर आदि मार्ग के भी भारी वाहन इसी मोड़ से होकर निकलते हैं। लगातार हादसों के बाद भी इस विकट मोड़ पर सुरक्षा के लिए संकेत बोर्ड पीडब्ल्यूडी की तरफ से लगाया तो गया है, लेकिन रात के अंधेरे में नजर नहीं आता है। नंदी शाला के पास स्पीड ब्रेकर जरूर लगाया है। तेज गति से आता हुआ वाहन स्पीड ब्रेकर पर अचानक रोकने से मिस बैलेंस भी हो सकता है। जानकार बताते हैं कि हाईवे पर गोलाई स्पीड के अनुसार बनाई जाती है। गोलाई को सुपर एलिवेशन में बनाया जाता है। वाहनों की स्पीड के आधार पर बनाया जाता है। गोलाई का सुपर एलिवेशन तय करता है कि इस गोलाई पर कितनी स्पीड से वाहन निकले तो हादसा नहीं होगा। स्पीड से ज्यादा वाहन की स्पीड होने पर हादसा संभव है। सुपर एलिवेशन के आधार पर ही मोड से पहले संकेतक बोर्ड होना जरूरी है।

गोलाई ज्यादा है, इसको सुपर सुपर एलिवेशन के आधार पर ही बनाया गया है। इसके अलावा इसमें कोई परिवर्तन नहीं कर सकते हैं। हादसे वाहन चालक की गलती के कारण ही हो रहे हैं। स्पीड ब्रेकर से पहले बोर्ड भी लगाया हुआ है, लेकिन चालक अनदेखा कर तेज स्पीड में निकलने का प्रयास करते हैं। हादसे रोकने के लिए मोड़ से पहले एक और स्पीड ब्रेकर लगवा देंगे।
देवकिशन राड़ एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी नागौर।

नागौर. हाइवे पर मोड़ में पलटा ट्रक।
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