उम्मीदवारों से नौकरी की सच्चाई को छिपाते क्यों हैं मैनेजर्स?

Nagour News - इंटरव्यू के दौरान ही उम्मीदवारों को नौकरी की पूरी सच्चाई क्यों बताना चाहिए जानिए हार्वर्ड बिज़नेस रिव्यू से। यह...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 10:20 AM IST
PHEE News - rajasthan news why are the managers hiding the truth of the job from the candidates
इंटरव्यू के दौरान ही उम्मीदवारों को नौकरी की पूरी सच्चाई क्यों बताना चाहिए जानिए हार्वर्ड बिज़नेस रिव्यू से। यह भी जानिए कि सकारात्मक फीडबैक किस तरह फायदेमंद होता है?

प्रत्याशियों से नौकरी की जटिलता के बारे में चर्चा की जा सकती है

जब आप नौकरी के लिए उम्मीदवारों का इंटरव्यू लेते हैं तो क्या वाकई पूरी ईमानदारी बरतते हैं? या उन्हें आधा सच बताते है? अधिकतर मैनेजर्स उम्मीदवारों के लौट जाने के डर से नौकरी की सच्चाई को छिपा लेते हैं। लेकिन सही व्यक्ति को अंदर लाने के लिए बातचीत में पूरी ईमानदारी और स्पष्टता जरूरी है। वरना आप गलत व्यक्ति को अंदर लाकर अपना समय और पैसा बर्बाद करते हैं। जब आप लोगों का इंटरव्यू लेते हैं तो उनसे काम की जटिलता के बारे में खुलकर चर्चा की जा सकती है। संस्थान में तरक्की करने के लिए क्या किया जा सकता है और कॉर्पोरेट हर व्यक्ति के लिए क्यों सही नहीं है, इस पर भी बात की जा सकती है। ( स्टॉप लाइंग टू जॉब कैंडिडेट्स अबाउट द रोल, एटा टार्की)

नकारात्मक नहीं, केवल सकारात्मक फीडबैक ही याद रखने योग्य होता है

हममें से ज्यादातर लोग खराब फीडबैक को ही याद रखते हैं, क्योंकि वो डराता है और हमारे दिमाग में धीरे-धीरे घर कर लेता है। लेकिन सकारात्मक फीडबैक एक अनमोल तरीका है अपनी शक्तियों और काबिलियत को समझने का। आपको मिली तारीफ के लिए अपने फोल्डर में थोड़ी जगह निकाली जा सकती है। यह काम डिजिटली या फिजिकली भी किया जा सकता है। यदि मिलेजुले फीडबैक मिले हैं, तो उनके सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं को समझकर, सकारात्मक फीडबैक को भी अपने फोल्डर में सुरक्षित रखा जा सकता है। जो बचाकर रखा हुआ है उसकी समय-समय पर समीक्षा भी की जा सकती है। (टू बिकम यॉर बेस्ट सेल्फ, स्टडी यॉर सक्सेस, लॉरा मॉर्गन रॉबर्ट्स)

मीटिंग जब उम्मीद से ज्यादा बड़ी हो जाए तो मुद्दा बदला जा सकता है

हो सकता है मीटिंग के लिए आपने जरूरत से ज्यादा लोगों को बुला लिया है। हो सकता है मीटिंग में आने वालों की संख्या आपकी उम्मीद से कहीं ज्यादा हो गई है। जो भी हुआ हो लेकिन तब आप क्या करेंगे जब मीटिंग आपकी उम्मीद से बहुत ज्यादा बड़ी हो गई हो? ऐसे में मीटिंग का मुद्दा बदला जा सकता है। यदि आठ से ज्यादा सदस्य हैं तो समस्या सुलझाने का निर्णय लेने की कोशिश न करें, ऐसे काम छोटी मीटिंग्स में आसानी से किए जा सकते हैं। यदि 18 या इससे कुछ ही कम लोग हैं तो किसी ऐसे जटिल मुद्दे को उठाएं जिसपर बात करना बहुत जरूरी है। (वॉट टू डू व्हेन यॉर मीटिंग्स हैव गॉटन टू बिग, एन शुगर)

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