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धर्म कथा सेे सैद्धांतिक बातें जीवन में उतारी जा सकती हैं : डॉ. समणी

नागौर। जयमल जैन पौषधशाला में अखिल भारतीय श्वेतांबर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में चल रहे...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 08:16 AM IST
Nagaur - theoretical things can be brought out in the life of religion dr samni
नागौर। जयमल जैन पौषधशाला में अखिल भारतीय श्वेतांबर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में चल रहे चातुर्मास के अंतर्गत समणी निर्देशिका डॉ. सुयशनिधि के सान्निध्य में तीर्थंकर का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान धर्म सभा में डॉ. समणी सुयशनिधि ने कहा कि कहा कि धर्म कथा एक आसान तरीका है जिससे बच्चे बड़े सभी को सैद्धांतिक बातें जीवन में उतारी जा सकती हैं। डॉ. समणी ने कहा कि ब्रह्मचर्य, साधना का मेरुदंड है। साधु जीवन की समस्त साधनाएं- तप, जप, समत्व, ध्यान, कायोत्सर्ग, परिसहाय, कषाय विजय, विषय आसक्ति त्याग, उपसर्ग सहन आदि ब्रह्मचर्य रूपी सूर्य के इर्दगिर्द घूमने वाले ग्रह नक्षत्रों के समान हैं। धर्म परंपरा में ब्रह्मचर्य का गहन अर्थ है ब्रह्म में विचरण करना। ब्रह्म का अर्थ परमात्मा, आत्मा, आत्म विद्या अथवा बृहद ध्येय है। डॉ. समणी ने ब्रह्मचर्य की सुरक्षा के लिए 10 नियम बताएं जिससे मन, बुद्धि, चित्त एवं हृदय में सम्यक रूप से समाहित प्रतिष्ठित किया जा सकता है। प्रदीप बोहरा ने बताया कि प्रवचन में पूछे गए तीन प्रश्नों के उत्तर मुदित पींचा, जागृति चौरड़िया, चंचल देवी बेताला ने दिए। जिनको चेतनप्रकाश डूंगरवाल की ओर से पांच ग्राम के चांदी के सिक्के देकर सम्मानित किया गया। मंच का संचालन पूनमचंद बैद ने किया। इस मौके पर पदमचंद, अमित कुमार, सुमित कुमार ललवानी, ताराचंद, निर्मलचंद, नरपतचंद, सुशील कुमार चौरड़िया, मदन देवी, सज्जनराज, विजयराज ललवानी, सुपारसचंद लोढ़ा, अमीचंद सुराणा, मोहनलाल बैद, बाबूलाल भाटी आदि मौजूद थे।

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