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कीर्तन में रागी जत्थों ने बांधा समां

कीर्तन में रागी जत्थों ने बांधा समां प्रचारक भाई बलविंदरसिंह ने होला महल्ला की गाथा को कथा के जरिए प्रस्तुत...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 04, 2018, 03:50 AM IST

कीर्तन में रागी जत्थों ने बांधा समां
कीर्तन में रागी जत्थों ने बांधा समां

प्रचारक भाई बलविंदरसिंह ने होला महल्ला की गाथा को कथा के जरिए प्रस्तुत किया। बीबी परमजीत कौर ने वाहेगुरु सिमरन के माध्यम से संगत को निहाल किया। रागी जत्था भाई बक्शीशसिंह बंदा ने कथा व कीर्तन सुनाया। गुरुद्वारा संस्थापक राजकुमार बिलोची, चंदनसिंह, बलदेवसिंह, निर्मलसिंह ने कथा वाचक, रागी जत्थाें को सिरोपा भेंट किया। दीवान की समाप्ति गुरुद्वारा ग्रंथी ने अरदास करके की। इस मौके पर गुरु का अटूट लंगर वरताया गया। गुरुद्वारा परिसर में रेन सबाई कीर्तन हुआ। अमृत वेले अरदास करके महान होला महल्ला गुरमत समागम का समापन हुआ। धुआं कला (टोंक) स्थित गुरुद्वारा बाबा धन्नाजी के सालाना समागम के तहत अगमगढ़ गुरुद्वारा से बाबा लक्खा सिंह, बाबा बलविंदरसिंह की अगुवाई में निकाले गए नगर कीर्तन का गुरुद्वारा दुख निवारण श्री हेमकुंटवासी दरबार में स्वागत किया गया।

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Web Title: कीर्तन में रागी जत्थों ने बांधा समां
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