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शोभावास नदी में पानी की आवक शुरू होते ही अन्य गांवों से टूट जाता है संपर्क, छात्र नहीं जा पाते स्कूल

आना पंचायत के शोभावास गांव के पास से गुजरने वाली नदी पर पुलिया नहीं होने से वर्षों से इस गांव के ग्रामीणों को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 19, 2018, 06:15 AM IST

शोभावास नदी में पानी की आवक शुरू होते ही अन्य गांवों से टूट जाता है संपर्क, छात्र नहीं जा पाते स्कूल
आना पंचायत के शोभावास गांव के पास से गुजरने वाली नदी पर पुलिया नहीं होने से वर्षों से इस गांव के ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जबकि नदी में पानी की आवक शुरू होते ही आसपास के गांवों से शोभावास गांव का संपर्क टूट जाता है। जबकि पिछले कई वर्षों से इस नदी पर पुलिया निर्माण को लेकर ग्रामीणों द्वारा मांग करने के बावजूद जनप्रतिनिधियों व प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

ज्ञातव्य है कि शोभावास गांव आना पंचायत के अधीन है। ऐसे में शोभावास गांव के पास से देसूरी से निकलने वाली नदी गुजरती है। ऐसे में आना गांव में आने का एक ही मुख्य रास्ता है। जबकि शोभावास गांव के समीप ही श्री सोनाणा खेतलाजी सारंगवास का धाम मौजूद है। यहां दर्शन करने के लिए श्रद्धालु अधिकतर आशापुरा नाडोल से शोभावास गांव होकर ही खेतलाजी सारंगवास पहुंचते हैं। ऐसे में दोनों रास्तों पर नदी का पानी बहने से भक्तों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं शोभावास गांव में नारलाई होकर भी पहुंचा जा सकता है। मगर वहां पर भी नारलाई तालाब के ओवरफ्लो चलने और मुख्य मार्ग पर पहाडिय़ों का पानी बहने से शोभावास गांव में जाना भी संभव नहीं है।

जिसके कारण शोभावास गांव के ग्रामीणों को नदी में पानी कम होने का इंतजार करना पड़ता है। जबकि गांव के पास गुजरने वाली नदी बरसात के दिनों में पूरे उफान के साथ बहती है। ऐसे में शोभावास गांव का अन्य गांवों से संपर्क टूट जाता है। नदी में पानी कम होने के बावजूद रपट पर इतना पानी दो माह तक बहता रहता है। ऐसे में दुपहिया लेकर चलना भी मुश्किल हो जाता है। जबकि नदी में बहने वाले पानी को देख विभाग को सबसे पहले इस नदी पर पुलिया का निर्माण करना चाहिए था। मगर इस और विभाग ने कभी ध्यान नहीं दिया। जिसके कारण पिछले कई वर्षों से ग्रामीण पुलिया के अभाव परेशान हो रहे हैं। जबकि पिछले कई वर्षों से इस गांव के ग्रामीण पुलिया निर्माण को लेकर जनप्रतिनिधियों से मांग करते आ रहे हैं। मगर किसी जनप्रतिनिधि और अधिकारी ने इस मांग को गंभीरता से नहीं लिया है। ग्रामीणों ने यहां पर पुलिया बनाने की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।

रपट पर सबसे अधिक होते हैं हादसे : शोभावास गांव के पास से गुजरने वाली नदी में करीब दो माह से अधिक तक पानी बहने के कारण रपट पर फिसलन होने से वाहनों चालकों के निकलने के दौरान वह फिसल जाते हैं, जिसके कारण उनको गंभीर चोट लग जाती है। इन दो माह में सबसे अधिक हादसे इसी रपट पर होते हैं।

हर बारिश के मौसम में बंद हो जाता है रास्ता

देसूरी. शोभावास नदी से गुजर रही सड़क।

शोभावास गांव के पास ही खेतलाजी धाम

शोभावास गांव के समीप ही श्री सोनाणा खेतलाजी सारंगवास धाम मौजूद है। ऐसे में जो भक्त आशापुरा नाडोल दर्शन करने के लिए आते हैं। वही खेतलाजी के दरबार में भी हाजरी लगाने के आते हैं। ऐसे में इन भक्तों को खेतलाजी आने के लिए शोभावास गांव के अंदर से गुजरना पड़ता है। मगर गांव के किनारे ही नदी में पानी बहने के कारण भक्तों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

छात्रों का स्कूल जाना हो जाता है बंद

शोभावास गांव में उच्च प्राथमिक विद्यालय मौजूद है। ऐसे में कक्षा 9 से 12वीं में अध्ययन करने के लिए उन्हें आना गांव जाना पड़ता है। मगर बरसात के मौसम में गांव के पास से गुजरने वाली नदी में पानी की आवक अधिक होने से विद्यार्थी कई दिनों तक गांव से बाहर नहीं जा पाते है। जिसके कारण उनकी शिक्षा भी प्रभावित होती है।

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