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लावारिस जानवरों से राहत दिलाने की मांग

Nasirabad News - युवक कांग्रेस ने छावनी परिषद व जिला प्रशासन से नगर में बढ़ रही आवारा जानवरों की संख्या एवं उससे हो रही नागरिकों को...

Dainik Bhaskar

Apr 11, 2018, 04:45 AM IST
लावारिस जानवरों से राहत दिलाने की मांग
युवक कांग्रेस ने छावनी परिषद व जिला प्रशासन से नगर में बढ़ रही आवारा जानवरों की संख्या एवं उससे हो रही नागरिकों को समस्या को दूर कर राहत प्रदान करने की मांग की है।

युवक कांग्रेस के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दीपक प्रजापति ने बताया कि नगर के बाजारों और गली मोहल्लों में बेखौफ घूमते आवारा जानवरों से नागरिक परेशान हो गए है। नगर के मुख्य बाजार, सब्जी मंडी, फ्रामजी चौक, हनुमान चौक, नसियां, बसस्टैंड आदि क्षेत्रों में आवारा जानवरों को घूमते और मुख्य मार्गो पर आराम करते कभी भी देखा जा सकता है। नागरिकों ने बताया कि इन आवारा गायों के कारण आए दिन मुख्य बाजार और मोहल्लों में हो रही दुर्घटनाओं में कई नागरिक, वाहन चालक, महिलाएं बुजुर्ग और बच्चे चोट ग्रस्त हो जाते है। नगर के मुख्य बाजार में उक्त आवारा जानवरों के बीच सड़क पर पहाड़ की तरह जमकर खड़े हो जाने के कारण कई बार यातायात व्यवस्था जाम हो जाती है लेकिन ये जानवर आसानी से टस से मस नहीं होते। बाजार में सामान खरीदने आए नागरिकों की बाइक, साइकिल या अन्य वाहनों पर लटकी थैलियों को जरा सा ध्यान हटते ही ये आवारा जानवर खींचकर अपना शिकार बनाकर लोगों का नुकसान करते आए दिन मुख्य बाजार में देखे जा सकते है। मुख्य बाजार के अलावा गली मोहल्लों में भी ये आवारा जानवर अड़कर खड़े हो जाते है जिससे नागरिकों विशेषकर महिलाओं को भय के कारण आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। पिछले दिनों इन्हीं आवारा जानवरों ने नगर के छावनी पार्षद के नन्हें भतीजे को निशाना बना लिया जिसके कारण उसकी मृत्यु हो गई और उसके कुछ दिन बाद एक सांड ने हमला कर एक वृद्ध को घायल कर दिया। मिली जानकारी के अनुसार इन गायों बकरियों के मालिक जानवरों को खुला छोड़ देते हैं और शाम को ये जानवर अपने आप वापिस मालिक के पास दूध देने पंहुच जाते हैं। पूर्व में छावनी प्रशासन द्वारा ऐसे आवारा पशुओं गायों-बकरियों को कांजी हाऊस में बंद करने की समुचित कार्रवाई की जाती थी। जिसमें जानवरों को पकड़ने के बाद उसको वापिस छुड़ाने पर मालिक को प्रतिदिन की निर्धारित दर के हिसाब से छावनी प्रशासन को भुगतान करना पड़ता था। लेकिन अब कांजी हाऊस वाली परंपरा को बंद जैसा कर दिए जाने से ऐसे पशुपालकों के हौंसले बुलंद हो गए। गत वर्ष जब छावनी प्रशासन ने आवारा गायों को पुन: कांजी हाऊस में बंद करना शुरू किया तो नगर के ऐसे पशुपालक परेशान हो गए जो अपने जानवरों को दिनभर बाजार में फिरने-चरने के लिए खुला छोड़ देते हैं। लेकिन वर्तमान में काफी समय से कांजी हाऊस की व्यवस्था बंद होने से आवारा जानवरों का आतंक दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।

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