• Home
  • Rajasthan News
  • Nathdwara News
  • डोलोत्सव पर फूल-पत्तों के झूले में विराजे प्रभु द्वारकाधीश, अबीर-गुलाल उड़ाया
--Advertisement--

डोलोत्सव पर फूल-पत्तों के झूले में विराजे प्रभु द्वारकाधीश, अबीर-गुलाल उड़ाया

राजसमंद . द्वारिकाधीश मंदिर में डोलोत्सव के दर्शन के बाद बाहर आते श्रद्धालु। दोपहर में खुले पहले भाेग के दर्शन,...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 03:55 AM IST
राजसमंद . द्वारिकाधीश मंदिर में डोलोत्सव के दर्शन के बाद बाहर आते श्रद्धालु।

दोपहर में खुले पहले भाेग के दर्शन, डोलोत्सव के साथ मंदिरों में थमें रसिया गान, बादशाह की सवारी देखने उमड़े श्रद्धालु

भास्कर न्यूज | राजसमंद

प्रभु द्वारिकाधीश मंदिर में शनिवार को डोलोत्सव मनाया। प्रभु के श्रीविग्रह को डोल तिबारी में चंदन, फूल, पत्तों के झूले में विराजित किया। दर्शनों में श्रद्धालुओं की कतार रही। ग्वाल-बालों ने रसिया गान किया। सुबह शृंगार के दर्शन में प्रभु के श्रीमस्तक पर श्वेत छोटी कूल्हे, उस पर पांच चंद्रिका का सादा जोड़, श्वेत उड़त का लाल मगजी का चाकदार वाघा, वैसी ही सूथन, कटि का पटका, सोने के आभरण, हमेल ढोलना धराने के साथ लाल रेशमी ठाड़े वस्त्र धारण करवाए। राजभोग के दर्शन अंदर ही हुए। पुष्टिमत में चार भोग के दर्शन का प्रावधान है, लेकिन पहले और चौथे भोग के दर्शन नहीं खुले। पहले भोग के दर्शन दोपहर साढ़े बारह बजे व चौथे भोग के दर्शन दोपहर सवा तीन बजे खुले। मंदिर के गोस्वामी महाराज परागकुमार, गोस्वामी कपिल कुमार ने ठाकुरजी को अबीर व गुलाल से खेलाया और इसके साथ ही सेवाएं अर्पित की। इस दौरान दर्शनार्थियों ने भी मंदिर परिसर में अबीर-गुलाल, केसर रंग, विभिन्न पिचकारियों से होली खेली। डोल तिबारी के दर्शन शाम को 6 बजे तक होते रहे।

अबील गुलाल का लिया लुत्फ : नाथद्वारा | डोलोत्सव पर श्रीनाथजी वैष्णवों ने ठाकुरजी संग अबीर-गुलाल खेलने का लुत्फ लिया। डोल माई झूलत है ब्रजनाथ, संग शिभित वृषभान, नंदिनी ललिता विशाखा साथ... के भाव से मंदिर महे डोलोत्सव की धूम रही। देशभर के सैकड़ों वैष्णवों ने दर्शन किए। श्रीलालन प्यारे को श्रीनाथजी प्रभु के सम्मुख विराजित किया। श्रीनाथजी प्रभु के श्रीचरणों में नूपुर धराए। श्रीअंग पर धवल सूथन, घेरदार वागा व चोली अंगीकृत करवाई। प्रभु को श्रीमस्तक पर गोल पाग, मोरपंख चन्द्रिका व शीशफूल सुशोभित किया। प्रभु को श्रीकर्ण में कर्णफूल, वनमाला विभूषित कर मीना के आभरण, हमेल, लाल ठाढ़े वस्त्र धराए। तिलकायत राकेश महाराज व विशाल बावा ने बाल स्वरूपों को गुलाल व अबीर से फाग खेलाया। राजभोग झांकी में ध्रुव बारी के नीचे डोल बांधा। डोल को अधिवासित करने के बाद इसमें श्रीलालन प्यारे को विराजित किया। डोलोत्सव पर राजभोग की चार झांकियों के दर्शन खुले। चारों झांकियों में तिलकायत ने बाल स्वरूपों को गुलाल-अबीर से फाग खेलाया। ग्वाल-बाल व श्रद्धालुओं ने गिरिराज धरण की जय..., आज के आनंद की जय... तथा पूंछड़ी के लटकी हूप-हूप प्यारे... के जयकारे लगाए। कीर्तनकारों ने विविध राग में पदों का गान किया। बाजत ताल मृदंग-झांझ, डफ रूंज मूरज बहु भांत... जैसे पदों का गान किया।

रसिया गान को विराम : डोलोत्सव के साथ मंदिर में चल रहे रसिया गान पर विराम लगा। ब्रजवासियों ने ढफ धर दे यार गई परकी..., रसिया को सूरत लगी घर की..., बरस दिना के बारह महीना, खबर ना है पल की..., एक-एक महीना लगे बरसन के, चैन ना है पल भर की... सरीखे रसिया का गान कर माहौल ब्रजमय बना दिया।

डोल महोत्सव में खेली गेर : उपली ओडण में शुक्रवार शाम को चारभुजानाथ मंदिर पर डोल महोत्सव गेर नृत्य के साथ मनाया। लोगों ने ढोल की थाप पर गेर नृत्य किया। पुजारी ने चारभुजानाथ को फूल और पत्तों से सुसज्जित डोल में विराजित कर धवल वस्त्र, स्वर्णाभूषण धराकर फाग के लाड लडाए। दाऊ महाराज ने आरती उतारी। महाआरती के बाद प्रसाद बांटा। इस दौरान जमनालाल पालीवाल, पुरुषोत्तम पालीवाल, मदन पालीवाल, पंडित राकेश पालीवाल, चुन्नीलाल पालीवाल सहित कई युवा व महिलाएं मौजूद थीं। पंचमी पर श्रीनाथजी मंदिर में गेर नृत्य होगा।

राजसमंद . धुलंडी पर महिलाओं के साथ गुलाल-अबीर खेलतीं उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी।

बादशाह की सवारी में दाढ़ी से मंदिर की सीढ़ियां सफाई की परंपरा देखने उमड़े वैष्णव

नाथद्वारा | धुलंडी पर शुक्रवार को गुर्जरपुरा मोहल्ले से बादशाह की सवारी निकाली। बादशाह बने कलाकार को मुगली पोषाक पहनाई। बादशाही दाढ़ी-मूछ तथा आंखों में काजल लगाया। बादशाह बना कलाकार श्रीनाथजी की छवि थामकर पालकी पर सवार हुआ। बादशाह के पीछे पारंपरिक वेशभूषा पहने दो हुरमा बादशाह को चंवर ढुलाते चल रहे थे। सवारी में सजे-धजे ऊंट, घुड़सवार सहित शहर के कई लोग शामिल हुए। सवारी के आगे श्रीनाथ बैंड, बांसुरी वादक शामिल थे। सबसे आगे घोड़े पर सेनापति के भेष में व्यक्ति को बैठाया। गुर्जरपुरा से सवारी सीधे बड़ा बाजार पहुंची। जहां पर ब्रजवासियों ने बादशाह पर गालियों की बौछारें शुरू कर दी। सवारी मंदिर की परिक्रमा लगाती हुई श्रीनाथजी मंदिर पहुंची। जहां पर बादशाह ने अपनी दाढ़ी से सूरजपोली की सीढ़ियां साफ करने की परंपरा निभाई। इसके बाद मंदिर के परछना विभाग के मुखिया ने बादशाह को पैरावणी भेंट की। ब्रजवासियों ने मंदिर में भी बादशाह को जमकर गालियां सुनाने की परंपरा निभाई। रसिया गान किया। भांग से बने पकोड़े बांटे। होली पर मंदिर में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश के कई शहरों के वैष्णव दर्शन करने पहुंचे। हर दर्शन में इनकी कतार रही। शहर में श्रीनाथजी प्रभु की होली समेत गली-मोहल्लों में करीब 40-50 जगहों पर होली का दहन हुआ। गुरुवार शाम को मंदिर से खर्च भंडारी, मशालची की अगुवाई में कीर्तनकार-सेवावाले व ब्रजवासी कीर्तन, रसिया गान करते हुए होली मगरा पहुंचे। जहां पर विधि-विधान से पूजा कर होली की परिक्रमा लगाई। मुहूर्त में दहन हुआ। महिलाओं ने होली में गोबर की मालाएं पधराई। होली मगरा पर शहरवासियों की भीड़ से मेले-सा माहौल रहा।