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उड़ के भमर मेरी छतिया पे बैठ्यो, कैसे बोझ संभालूंगी...

नाथद्वारा | ‘‘उड़ जा रे भमर, तो कुं मारूंगी, उड़ के भमर मेरी छतिया पे बैठ्यो, कैसे बोझ संभालूंगी..., एक भमर से प्री हमारी,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 05:05 AM IST

नाथद्वारा | ‘‘उड़ जा रे भमर, तो कुं मारूंगी, उड़ के भमर मेरी छतिया पे बैठ्यो, कैसे बोझ संभालूंगी..., एक भमर से प्री हमारी, दूजो न नैन नेक निहारुंगी...। होरी ना है, मेरे यार हुरंगा, गोवर्धन के बीच तलहटी भरी है, मानसी गंगा...। बरस दिना में फागुन आवै, बाजे ढोल ढफंगा...। यूं ही जाएगो जौबन अलबेली को, गौरी तो बनी है मथुराजी का पेड़ा, रसिया ऐ टूक जलेबी कौ... ले चल यार बगीचे में... राजभोग की झांकी में ग्वालबालों ने चल रहे होलाष्टक में गार, धमार के साथ रसिया पदों का गान किया। सेवक गोपाल गुर्जर, मल्लू दा, नारायण जब्बर सहित अन्य ग्वालबालों ने रसिया पदों का गान कर श्रद्धालुओं को मदमस्त कर दिया। श्रीनाथजी प्रभु की हवेली में इन दिनों होली हुड़दंग के भाव से समूचा हवेली परिसर ब्रज सा प्रतीत हो रहा है। गुलाल, अबीर की महक, ढप, चंग और झांझ की थाप पर गुंज रहे रसिया के पद मानो साक्षात कृष्ण के साथ होली खेलने सा अहसास करा रहे है।

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Web Title: उड़ के भमर मेरी छतिया पे बैठ्यो, कैसे बोझ संभालूंगी...
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