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श्रीराम कथा सिखाती है मर्यादा पूर्ण जीवन जीने की कला

बागोट के कस्बे के गोपाल कृष्ण गौशाला में पुरूषोतम मास के दौरान चल रही श्रीराम कथा में कथावाचक पंडित अखिलेश...

Danik Bhaskar | May 30, 2018, 05:25 AM IST
बागोट के कस्बे के गोपाल कृष्ण गौशाला में पुरूषोतम मास के दौरान चल रही श्रीराम कथा में कथावाचक पंडित अखिलेश रामायणी ने मंगलवार को भगवान राम के वनवास का वर्णन करते हुए कहा कि पिता के वचनों को पूरा करने के लिए भगवान राम जानकी के साथ वन गमन करने पर अवध की प्रजा दुखी हुई और कैकई को भला बुरा कहने लगी। वहीं लक्ष्मण द्वारा भगवान राम के साथ वनवास जाने की बात पर लक्ष्मण आज्ञा लेने मां सुमित्रा के पास पहुंचे। तो मां ने लक्ष्मण को जानकी के प्रति कभी कु भाव मन में नहीं लाने की बात कही। लक्ष्मण ने कहा कि जागते हुए तो कु भाव नहीं आएंगे मगर सपने में भी नहीं। कथावाचक पंडित अखिलेश रामायणी ने कहा राम कथा का हर प्रसंग जीवन के हर मोड़ पर मर्यादा पूर्वक जीवन जीने की कला सिखाती है।

कोलिया में भागवत कथा जारी

कोलिया| कोलिया के ब्रह्मपुरी मोहल्ले में काकड़ा परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में मंगलवार को कथावाचक ने राम-सीता विवाह व कृष्ण-जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया। भाव-विभोर होकर पांडाल में मौजूद श्रद्धालु नृत्य करने लगे। कथावाचक त्यागी संत हेतमराज महाराज ने कहा कि आज लोगों का ध्यान सत्संग की अपेक्षा आर्केस्ट्रा पार्टी में ज्यादा है। कथा में उन्होंने राम-विवाह, केवट-संवाद, हनुमान का सेवा-भाव, सुग्रीव का सखा-भाव, अंहकार रूपी रावण के वध का प्रसंग प्रस्तुत किया। राम-जानकी विवाह प्रसंग के दौरान पांडाल में गाजे-बाजे बज रहे थे। कथावाचक ने कहा कि राम जहां मर्यादा पुरुषोत्तम थे, वहीं कृष्ण कर्म योगी थे। दोनों अवतारों ने धर्म कर रक्षा कर दुष्टों का सर्वनाश किया था। उन्होंने मनुष्यों को धर्म व कर्म के साथ सात्विक जीवन जीने की राह बताई। राम-जानकी विवाह प्रसंग में राम बारात निकाली।