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ननिहाल में खाे गई थी 11 साल की ज्योति, बच्ची को रोता देख कानाराम ने नावां घर तक पहुंचाया

भास्कर संवाददाता | नावां सिटी शहर के वार्ड संख्या 3 के मोहनपुरिया गुर्जरों का मोहल्ला निवासी दादी लिछमा देवी के...

Dainik Bhaskar

May 14, 2018, 05:40 AM IST
ननिहाल में खाे गई थी 11 साल की ज्योति, बच्ची को रोता देख कानाराम ने नावां घर तक पहुंचाया
भास्कर संवाददाता | नावां सिटी

शहर के वार्ड संख्या 3 के मोहनपुरिया गुर्जरों का मोहल्ला निवासी दादी लिछमा देवी के लिए मदर्स डे का सबसे बड़ा तोहफा था। क्योंकि उनकी 11 साल की पोती ज्योति जो सुबह अपने ननिहाल लूणवा गांव में खो गई थी। वह 3 घंटे बाद ही युवक कानाराम प्रजापत की सूझबूझ और सजगता से वह सकुशल अपने परिजनों तक पहुंच पाई है।

जानकारी के अनुसार वार्ड संख्या 3 के मोहनपुरिया गुर्जरों का मोहल्ला निवासी 11 साल की ज्योति अपनी मां ममता देवी के साथ ननिहाल लूणवा गांव गई थी। वहां से उसकी मां नमक श्रमिक ममता देवी तो वापस नावां लौट आई। इसके कुछ देर बाद ही ज्योति अपनी मां को तलाशते हुए घर से रवाना हो गई। लेकिन वह रास्ता भूल गई। जैसे-तैसे वह बस स्टैंड पहुंच गई। यहां पर वह काफी देर तक रोने लगी। छोटी सी बच्ची को बस स्टैंड पर रोता देख युवक कानाराम प्रजापत की नजर उस बच्ची पर पड़ी। उसे तसल्ली से पूछा तो सामने आया कि वह नावां की रहने वाली है। इस पर कानाराम उसे लेकर नावां पहुंचा। जहां परिजनों ने कानाराम का आभार जताया। परिवार की बुजुर्ग सदस्य लिछमा देवी ने बताया कि उसकी 4 बहनें और है। यह तीसरे नंबर की पोती है। ज्योति के पिता मालूराम नमक से भरे ट्रैक्टर चलाते है। ज्योति के सकुशल घर लौटने पर परिवार में खुशियों का माहौल छा गया। सभी ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया तो आस-पास के बच्चे भी उससे बातें करने घर पहुंचे। परिवार में खुशियाें का माहौल नजर आया। परिजनों ने कानाराम का आभार जताया।

नावां सिटी. परिवार के साथ में ज्योति और उसकी दादी व युवक कानाराम प्रजापत।

सिटी हीरो

बच्ची को घर का पता पूछा, 24 किमी दूर घर पहुंचाया

मैं बस स्टैंड पर था तो वहां 10-11 साल की बच्ची रो रही थी। बच्ची को पानी पिलाकर तसल्ली से उससे बातचीत शुरू की। जिसमें उसके रोने का कारण पूछा तो वह कुछ नहीं बता पाई। उसने बताया कि वह नावां की रहने वाली है। इस पर वह 24 किमी दूर उसे लेकर उसके घर तक पहुंचा। ज्योति के घर पहुंचने पर परिवार में खुशियां छा गई।

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