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पहली बार दरगाह के पास फायरिंग, राजस्थान के 3 सपूतों सहित बीएसएफ के 4 जवान शहीद

जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर पाकिस्तानी रेंजरों की गोलीबारी में भारतीय सीमा...

Danik Bhaskar | Jun 14, 2018, 05:55 AM IST
जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर पाकिस्तानी रेंजरों की गोलीबारी में भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के असिस्टेंट कमांडर सहित चार जवान शहीद हो गए और पांच घायल हुए हैं। शहीदों में राजस्थान के अलवर, भरतपुर और सीकर जिले के 1-1 सपूत शामिल हैं। पाकिस्तान ने रामगढ़ के चाम्बिलियाल सीमा चौकी को निशाना बनाकर मंगलवार देर रात 10:30 बजे गोलीबारी शुरू की, जो बुधवार तड़के 4:30 बजे तक चली। इसके करीब ही चाम्बिलियाल दरगाह है, जहां 28 जून से मेला लगना है। बीएसएफ की ओर से मेले को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। उस समय बीएसएफ के जवान ट्राॅली में आईबी के पास ईंटों को छोड़ने के लिए आए थे। इतिहास में पहली बार दरगाह इलाके में फायरिंग की गई है। दरगाह करीब 350 साल पुरानी है। शेष | पेज 7

शहीदों के घरों में कोहराम, गांवों में चूल्हे तक नहीं जले

असि. कमांडर जितेंद्र, भरतपुर

माता-पिता को एक दिन पहले ही जयपुर की ट्रेन में बिठाया था

32 वर्षीय जितेंद्र भरतपुर के सलेमपुर कलां गांव के थे। उनके माता-पिता उनसे मिलने जम्मू गए थे, जिन्हें मंगलवार शाम जितेंद्र ने जयपुर के लिए ट्रेन में बिठाया था। वे जयपुर के मानसरोवर में रहते हैं।

एसआई रजनीश कुमार (32)

यूपी के एटा के रहने वाले थे। ये भी शहीद।

एएसआई रामनिवास, सीकर

26 साल तक बीएसएफ की सेवा, डाबला के पहले शहीद

45 वर्षीय सीकर जिले के बानावाली ढाणी तन डाबला निवासी थे। गुरुवार सुबह अंतिम संस्कार होगा। उनकी बीएसएफ में 26 साल की सेवा हो गई थी। वे डाबला के पहले शहीद हैं।


कांस्टेबल हंसराज, अलवर

2 दिन बाद घर आकर पहली बार बेटे का मुंह देखने वाले थे

अलवर के बानसूर के मुगलपुर निवासी 28 वर्षीय हंसराज की प|ी ने एक माह पहले ही बेटे को जन्म दिया था। हंसराज पहली बार उसे देखने 15 जून को घर आने वाले थे।