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दिव्यांग किसान की मौत के बाद 2 लाख का कर्जा माफ कुर्की के आदेश भी निरस्त होंगे, 28 घंटे बाद उठाया शव

Nawa News - भास्कर संवाददाता | कुचामन सिटी चितावा थाना क्षेत्र में हुडील ग्राम पंचायत के चारणवास गांव में बैंक का कर्ज नहीं...

Dainik Bhaskar

Aug 07, 2018, 06:30 AM IST
दिव्यांग किसान की मौत के बाद 2 लाख का कर्जा माफ कुर्की के आदेश भी निरस्त होंगे, 28 घंटे बाद उठाया शव
भास्कर संवाददाता | कुचामन सिटी

चितावा थाना क्षेत्र में हुडील ग्राम पंचायत के चारणवास गांव में बैंक का कर्ज नहीं चुका पाने के कारण फंदे पर झूलकर किसान के जान देने के मामले में सोमवार को दिनभर वार्ताओं का दौर चलने के बाद शाम को प्रशासन और किसान नेताओं के बीच सहमति बन पाई। किसान परिवार के लिए की जा रही मांगों पर सहमति बनने के बाद परिजन शव उठाने के लिए राजी हो गए। इधर, 28 घंटे तक धरना-प्रदर्शन और वार्ताओं के दौर के बाद हुई सहमति के बाद सोमवार शाम प्रशासन ने भी राहत की सांस ली। दरअसल चारणवास गांव का मंगलचंद (30) पुत्र गिरधारीराम मेघवाल शनिवार रात्रि घर में ही फंदे पर झूलता मिला। इस पर परिजनों ने बैंक अधिकारियों पर कर्ज चुकाने के लिए प्रताड़ित करने और एसडीएम ऑफिस से जमीन कुर्की व नीलामी के आदेश जारी करने पर आत्महत्या के लिए मजबूर होने का आरोप लगाया। मामले की जानकारी मिलने के बाद आस-पास के किसान नेता पहुंच गए और कुकनवाली सीएचसी पर पोस्टमार्टम के बाद शव उठाने से इनकार कर दिया। विभिन्न मांगों को लेकर करीब 28 घंटे तक किसान और परिजन कुकनवाली में मौके पर डटे रहे। इस दौरान माकपा नेता व पूर्व विधायक अमराराम भी कुकनवाली पहुंच गए। उन्होंने अपने संबोधन में केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों को जमकर कोसा। उनका कहना था कि किसान विरोधी नीतियों के चलते किसान कर्ज में डूबकर आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहे हैं। जबकि सरकार विकास के जश्न में डूबी हुई है। प्रशासन की ओर से सुबह से ही दूसरे दिन भी नावां एसडीएम रामसुख गुर्जर, कुचामन एसडीएम अभिलाषा पूनिया, तहसीलदार महावीरप्रसाद शर्मा, डीएसपी मकराना रामचंद्र नेहरा और चितावा थानाधिकारी धर्मपाल मीणा, मौलासर एसएचओ राजेंद्रसिंह और पीएनबी बैंक अधिकारी मुकेश आदि समझाइश में जुट गए। पुलिस-प्रशासन और किसान नेताओं से पहले और दूसरे दौर की वार्ता के बाद भी सहमति नहीं बन पाई। दोपहर बाद यहां डीडवाना एडीएम बीएल मीणा पहुंच गए। उन्होंने भी समझाइश की। हालांकि एकबारगी तो कोई सहमति बनती नजर नहीं आई। बाद में शाम 5 बजे प्रशासन ने सभी मांगों को मानने का ऐलान किया तो धरना समाप्ति की घोषणा की गई। इसके बाद परिजनों ने शव लेने की सहमति दी।

कुचामन सिटी. सहमति के बाद मांगों को लेकर घोषणा करते एडीएम बीएल मीणा।

भास्कर संवाददाता | कुचामन सिटी

चितावा थाना क्षेत्र में हुडील ग्राम पंचायत के चारणवास गांव में बैंक का कर्ज नहीं चुका पाने के कारण फंदे पर झूलकर किसान के जान देने के मामले में सोमवार को दिनभर वार्ताओं का दौर चलने के बाद शाम को प्रशासन और किसान नेताओं के बीच सहमति बन पाई। किसान परिवार के लिए की जा रही मांगों पर सहमति बनने के बाद परिजन शव उठाने के लिए राजी हो गए। इधर, 28 घंटे तक धरना-प्रदर्शन और वार्ताओं के दौर के बाद हुई सहमति के बाद सोमवार शाम प्रशासन ने भी राहत की सांस ली। दरअसल चारणवास गांव का मंगलचंद (30) पुत्र गिरधारीराम मेघवाल शनिवार रात्रि घर में ही फंदे पर झूलता मिला। इस पर परिजनों ने बैंक अधिकारियों पर कर्ज चुकाने के लिए प्रताड़ित करने और एसडीएम ऑफिस से जमीन कुर्की व नीलामी के आदेश जारी करने पर आत्महत्या के लिए मजबूर होने का आरोप लगाया। मामले की जानकारी मिलने के बाद आस-पास के किसान नेता पहुंच गए और कुकनवाली सीएचसी पर पोस्टमार्टम के बाद शव उठाने से इनकार कर दिया। विभिन्न मांगों को लेकर करीब 28 घंटे तक किसान और परिजन कुकनवाली में मौके पर डटे रहे। इस दौरान माकपा नेता व पूर्व विधायक अमराराम भी कुकनवाली पहुंच गए। उन्होंने अपने संबोधन में केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों को जमकर कोसा। उनका कहना था कि किसान विरोधी नीतियों के चलते किसान कर्ज में डूबकर आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहे हैं। जबकि सरकार विकास के जश्न में डूबी हुई है। प्रशासन की ओर से सुबह से ही दूसरे दिन भी नावां एसडीएम रामसुख गुर्जर, कुचामन एसडीएम अभिलाषा पूनिया, तहसीलदार महावीरप्रसाद शर्मा, डीएसपी मकराना रामचंद्र नेहरा और चितावा थानाधिकारी धर्मपाल मीणा, मौलासर एसएचओ राजेंद्रसिंह और पीएनबी बैंक अधिकारी मुकेश आदि समझाइश में जुट गए। पुलिस-प्रशासन और किसान नेताओं से पहले और दूसरे दौर की वार्ता के बाद भी सहमति नहीं बन पाई। दोपहर बाद यहां डीडवाना एडीएम बीएल मीणा पहुंच गए। उन्होंने भी समझाइश की। हालांकि एकबारगी तो कोई सहमति बनती नजर नहीं आई। बाद में शाम 5 बजे प्रशासन ने सभी मांगों को मानने का ऐलान किया तो धरना समाप्ति की घोषणा की गई। इसके बाद परिजनों ने शव लेने की सहमति दी।

किसान नेता बोले

माकपा नेता अमराराम ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के निर्णय किसानों के कल्याण के लिए नहीं पूंजीवादियों के लिए कल्याणप्रद है। किसान विरोधी नीतियों का ही नतीजा है कि किसान कर्ज चुकाने में सक्षम नहीं है और इसी कारण आत्महत्या को मजबूर हो रहे हैं। इससे भाजपा के सुशासन के दावों की भी पोल खुल रही है। उन्होंने कहा कि किसानों का कर्जा माफ होना बड़ा प्रश्न नहीं है, बल्कि किसान कर्ज चुकाने में समर्थ बने ऐसा प्रयास सरकार करें, तब सही मायने में किसानों का कल्याण हो पाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीनें कुर्क की जा रही है, ऐसे में वह कैसे अपना परिवार का पेट पालेगा और कैसे बैंक का कर्ज चुका पाएगा। अमराराम ने मृतक मंगलचंद के परिवार को संबल देने के लिए सरकार से मुआवजा देने, कर्ज माफ करने और सभी किसानों के कुर्की आदेश वापस लेने की मांग की। इस दौरान किसान सभा के नेता भागीरथ यादव, इंद्राराम, मोतीलाल शर्मा, नाथूराम, मनोहर पचार, रघुनाथ बनाथला सरपंच, नारायणराम दहिया, नारायण डूडी, जीवनराम शेषमा, कानाराम बिजारणिया, अब्बास खान आदि ने भी संबोधित किया।

आत्महत्या जैसी घटनाएं सरकार की किसान विरोधी नीतियों का नतीजा है

बैंक अधिकारियों के खिलाफ जांच भी होगी

किसान मंगलचंद की आत्महत्या के प्रकरण में प्रशासन पहले दिन किसी भी मांग को लेकर गंभीर नहीं रहा। दूसरे दिन सोमवार को भी पहले मांगों पर कोई सहमति बनती नजर नहीं आई। लेकिन जब दोपहर बाद मामले ने तूल पकड़ा तो बाद में शाम 5 बजे एडीएम बीएल मीणा ने किसान मंगलचंद का जो भी बैंक कर्ज है वह ब्याज समेत माफ करने, जमीन नीलामी और कुर्की के जो आदेश जारी किए गए, उन्हें निरस्त करने की घोषणा की। इसके अलावा मृतक किसान के परिवार को मुआवजे के लिए सरकार के पास प्रस्ताव भिजवाकर यथासंभव सहायता दिलाई जाएगी। बैंक अधिकारियों के विरुद्ध जांच की मांग भी मानी गई है। एडीएम ने इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना में मृतक के परिजनों के मकान बनाने और परिवार के शिक्षित सदस्य को आंगनबाड़ी-मनरेगा आदि में रोजगार के अवसर उपलब्ध करा दिए जाएंगे। हालांकि पहले किसानों की ओर से 20 लाख रुपए मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की गई थी।

अधिकारियों पर दर्ज हो मुकदमा: हनुमान बेनीवाल

खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल ने कहा कि अनुसूचित जाति का दिव्यांग किसान बैंक अधिकारियों की मनमानी से परेशान होकर खुदकुशी कर लेता है। इससे बड़ी संवेदनहीनता क्या होगी। सरकार कर्ज माफी की बात करती है। मंगलचंद ने बैंक से 2.98 लाख ऋण लिया और उसमें से 1.75 लाख रुपए जमा भी करवा दिए। उसके हालात को समझे बिना तंग किया गया। बैंक के जिम्मेदारों और प्रशासनिक अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज हो। परिजनों को 10 लाख मुआवजा, एक आश्रित को सरकारी नौकरी दी जाए। किसान के प्रति संवेदनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

दिव्यांग किसान की मौत के बाद 2 लाख का कर्जा माफ कुर्की के आदेश भी निरस्त होंगे, 28 घंटे बाद उठाया शव
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