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सभी सरकारी विश्वविद्यालय वर्ल्ड क्लास की दौड़ में शामिल होने से पहले ही बाहर

वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलना है लेकिन प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालय इस दौड़ से बाहर हो गए हैं।

Danik Bhaskar | Nov 25, 2017, 08:44 AM IST

जयपुर. देश के 10 सरकारी विश्वविद्यालयों को वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलना है लेकिन प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालय इस दौड़ से बाहर हो गए हैं। 20 नवंबर तक इसके लिए आवेदन करना था लेकिन कोई आगे नहीं आ सका है। शिक्षकों की कमी के चलते एक भी सरकारी विश्वविद्यालय ने इस दौड़ में शामिल होने के लिए आवेदन नहीं किया है। हालांकि इस मामले में राज्य सरकार ने मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय, उदयपुर और राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर का नाम प्रोजेक्ट करने का फैसला लिया था लेकिन इन दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने ये कहते हुए आवेदन करने से इंकार कर दिया है कि वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी की दौड़ में उनका नंबर नहीं आएगा। ऐसे में आवेदन के नाम पर एक करोड़ रुपए खर्च करना ठीक नहीं रहेगा। राजस्थान यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. आर.के. कोठारी ने बताया कि हम वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी के नियमों के दायरे में नहीं आते है। इसलिए हमने राज्य सरकार को अपने हालात बयां कर दिए है।

फेकल्टी की कमी सहित 3 बिंदुओं की वजह से नहीं कर पाए आवेदन

1 -आवेदन के समय विश्वविद्यालय का शिक्षक व छात्र का अनुपात 1:20 होना चाहिए था। राजस्थान यूनिवर्सिटी का 1:60 है। उदयपुर की सुखाड़िया यूनिवर्सिटी का रेशियो 1 :32 है।

2- आवेदन के समय किसी भी विश्वविद्यालय में कुल पदों की तुलना में 80 प्रतिशत पद भरे हुए होने चाहिए थे लेकिन इन दोनों विश्वविद्यालयों में सिर्फ 60 प्रतिशत पद ही भरे हुए थे।

3- पात्रता की एक सबसे अहम शर्त यह भी थी कि इन विश्वविद्यालयों से कॉलेजों का एफिलिएशन नहीं होना चाहिए, जबकि इन विश्वविद्यालयों के अंतर्गत हजारों प्राइवेट कॉलेज हैं।

वर्ल्ड क्लास का फायदा क्या होता?: पहली किश्त में ही 500 करोड़ रुपए मिलते
वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी का दर्जा अगर हमारे किसी भी एक विश्वविद्यालयों को मिल गया तो अंतरराष्ट्रीय पटल पर इन विश्वविद्यालयों की साख बढ़ती। साथ ही केंद्र से पहली किश्त की सेंक्शन में विकास कार्यों के लिए कम से कम 500 करोड़ रुपए मिलते। इसके बाद विभिन्न मदों में रुपए मिलने से लेकर कई फायदे होते।

40% तक क्लासेें गेस्ट फेक्लटी के हवाले
सरकारी कॉलेज और विश्वविद्यालयों में 38 से 40 प्रतिशत फेकल्टी की कमी है। इसकी पूर्ति गेस्ट फेकल्टी आदि की मदद से की जा रही है। सरकार और विश्वविद्यालय प्रति कालांश के हिसाब से ये भुगतान कर रहे हैं।