--Advertisement--

दीपिका की पद्मावती देखने से पहले जान लीजिए असली रानी पद्मावती के बारे में 9 बातें

तथ्यों को खोजने के बाद इतिहासकार पद्मावती को कोरी कल्पना नहीं मान रहे हैं।

Danik Bhaskar | Nov 15, 2017, 07:52 PM IST

जयपुर। रानी पद्मावती को लेकर अलग-अलग मत हैं। अभी तक यही माना जाता रहा है कि पद्मावती का उल्लेख सबसे मलिक मोहम्मद जायसी ने अपनी रचना पद‌्मावत में किया था। लेकिन, इतिहास में इसके अलावा भी कुछ और है। कई तथ्यों को खोजने के बाद इतिहासकार पद्मावती को कोरी कल्पना नहीं मान रहे हैं।

मीरा शोध संस्थान से जुड़े चितौड़गढ़ के प्रो. सत्यनारायण समदानी बताते हैं कि जायसी की रचना 1540 की है। जायसी सूफी विचारधारा के थे, जो अजमेर दरगाह आया करते थे। इसी दौरान उन्होंने कवि बैन की कथा को सुना, जिसमें पद्मावती का उल्लेख था। इसका मतलब साफ है कि जायसी से पहले कवि हेतमदान की गोरा बादल कविता से भी जायसी ने अंश लिए थे।

क्या हकीकत में थी रानी

छिताई चरित : जायसी की पद्‌मावत से 14 साल पहले लिखी

प्रो.समदानी बताते हैं कि छिताई चरित ग्वालियर के कवि नारायणदास की रचना थी। इस हस्तलिखित ग्रंथ के संपादक ग्वालियर के हरिहरनाथ द्विवेदी आैर इनके अलावा अगरचंद नाहटा ने भी इसका रचनाकाल 1540 से पहले का माना है। अलाउदीन खिलजी देवगिरी पर आक्रमण किया था। वह वहां की रानी को पाना चाहता था। इस ग्रंथ के एक काव्य अंश में उल्लेख बताया गया है कि देवगिरी पर आक्रमण के समय अलाउद्‌दीन राघव चेतन को कहा है कि वह कहता है कि मैंने चित्तौड़ में पद्मावती के होने की बात सुनी। उवहां के राजा रतनसिंह को बंदी बनााया, लेकिन बादल उसे छुड़ा ले गया।

जायसी ने भी नहीं माना प्रेम प्रसंग, लिखा

पद्मावती बहुत सुंदर थीं, खिलजी बहक गया... सूफीकवि मलिक मोहम्मद जायसी ने 1540 ईस्वी में पद्मावत काव्य लिखा। जिसका अधिकांश किताबों में जिक्र आता है, लेकिन घटनाचक्र के सवा दो सौ साल बाद बाद काव्य रूप में लिखे जाने से कई लोग इसमें सच्चाई के साथ कल्पना का समावेश मानते हैं। उसने लिखा कि पद्मावती सुंदर थी। अल्लाउद्दीन ने उनके बारे में सुना तो देखना चाहा। खिलजी सेना ने चित्तौड़ को घेर लिया। रतन सिंह के पास संदेश भिजवाया- पद्मावती से मिलवाओ तो बिना हमला किए चितौड़ छोड़ दूंगा। रतन सिंह ने पद्मावती को बताया। रानी सहमत नहीं थीं। अंत में जौहर कर लिया।

आगे की स्लाइड में पढ़ें, पदमावती के 9 गुणों के बारे में