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हर अवैध निर्माण को पट्टे देने की तैयारी में सरकार, शहरी भूमि का किस्म ही खत्म

सरकार शहरी भूमि की किस्म को खत्म करने संबंधी अध्यादेश लागू करने की तैयारी में है।

Danik Bhaskar | Nov 18, 2017, 07:44 AM IST
सिम्बॉलिक इमेज। सिम्बॉलिक इमेज।

जयपुर. मास्टर प्लान के उल्लंघन को लेकर पिछले एक साल से हाईकोर्ट के कठघरे में खड़ी सरकार शहरी भूमि की किस्म को खत्म करने संबंधी अध्यादेश लागू करने की तैयारी में है। 190 शहरों के एक जैसे विकास के लिए रीजनल प्लान लाया जा रहा है। इससे शुल्क देने पर सरकार हर प्रकार की अवैध बसावट या अवैध निर्माण को नियमित कर सकेगी। प्लान को लागू करने की सरकार को इतनी जल्दबाजी है कि इसका बिल विधानसभा में लाने की बजाय सीधे मंत्रियों के हस्ताक्षर करवा अध्यादेश से लागू करने के निर्देश हैं।


हर अवैध निर्माण, सरकार चाहेगी उसी दिन हो जाएगा किसी भी एरिया का नियमन

नए द राजस्थान रीजनल एंड अरबन प्लानिंग ऑर्डिनेंस 2017 में ऐसे प्रावधान किए गए हैं कि हर शहर के क्षेत्र विशेष के लिए जोनल प्लान बन सकेगा। सरकार जब चाहेगी रीजनल प्लान और जोनल प्लान में बदलाव कर सकेगी। पहले रेजीडेंशियल बस्ती है वहां बड़े कॉम्पलैक्स की अनुमति हो, चाहे औद्योगिक क्षेत्र में आवास पट्टे दिए जा सकेंगे। केवल एक नोटिफिकेशन व गजट प्रकाशन करना होगा।

घरों में दुकानों का भी हो सकेगा नियमन, अवैध निर्माण का भी पट्टा
रीजनल प्लान में लैंड यूज की बाध्यता के प्रावधान खत्म किए जाने से मकानों में दुकानों का नियमन जब सरकार चाहेगी आदेशों के माध्यम से कर सकेंगी। अब तक मास्टर प्लान में मिक्स लैंड यूज के प्रावधान नहीं किए जाने के कारण मानसरोवर जैसी दर्जनों कॉलोनियों में मकानों में दुकानों के नियमन पर कोर्ट ने रोक लगा दी थी।

रीजनल प्लान के जोनल प्लान को संबंधित प्राधिकरण, यूआईटी या सरकार एक आदेश से बदल सकेगी, जिससे हर प्रकार के अवैध निर्माण के पट्टे दिए जा सकेंगे। इतना ही नहीं अब सरकार जोनल प्लान में पूर्व से तय इकोलॉजिकल जोन को भी खत्म कर सकेगी।

हाई डेनसिटी एरिया होते ही मंजिलों की संख्या बढ़ाने की मिल सकेगी अनुमति
अब शहरों में केवल हाई डेनसिटी और लो डेनसिटी एरिया होंगे। हालांकि 80 फीट और उससे चौड़ी सड़कों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन रीजनल व जोनल प्लान में हाई डेनसिटी एरिया घोषित होने के बाद हाई राइज बिल्डिंग बनाने की अनुमति आसानी से मिलेगी। अब तक जिन भीड़ भाड़ वाले इलाकों में 15 मीटर तक ही ऊंचाई (4 मंजिल) तक निर्माण की अनुमति मिलती थी अब 8 मंजिल तक भी अनुमति मिल सकेगी। इसी तरह जो शहरों के बाहरी इलाके होंगे उनको लो डेनसिटी एरिया में रखा जाएगा, केवल वहीं बहुमंजिला इमारतों पर पाबंदी रहेगी।

न रेजीडेंशियल भूमि रहेगी, न कॉमर्शियल, हाई डैंसिटी व लो डैंसिटी एरिया रहेंगे
अध्यादेश लागू होने के बाद शहरों में रेजीडेंशियल, कॉमर्शियल या मिक्स लैंड यूज जैसे भूमि के प्रकार ही खत्म हो जाएंगे। शहरों में केवल हाई डैंसिटी और लो-डैंसिटी एरिया रहेंगे। लैंड यूज फ्री जोन बना कर शहरों में बसावट को नियमित किया जाएगा, जिसमें अवैध बस्तियों के लोगों को आसानी से पट्टे मिल जाएंगे। रेजीडेंशियल इलाके में किसी भी मकान के पास फैक्ट्री भी खोली जा सकेगी और स्कूल, सिनेमा घर भी खोला जा सकेगा।

एक समान विकास के लिए लाए प्लान
अब रीजनल प्लान में सभी शहरों के लिए एकरूपता लाने का प्रयास है। स्पेशल कंडीशन में नियमों में बदलाव किए जा सकेंगे। रीजन विशेष में यदि 60 फीट चौड़ी सड़कें नहीं भी हैं तो वहां लोकल अथॉरिटी नियम बदलकर रूल बना सकेगी। -मुकेश शर्मा, एसीएस, यूडीएच