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बस के ब्रेक फेल : ड्राइवर हॉर्न पर हाथ रख चिल्लाता रहा, सवारियां भी चिल्लाने लगीं

खटारा होती लो-फ्लोर बसों से शहर को डराने वाला हादसा हो गया।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 30, 2017, 02:06 AM IST

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    इस बस के ब्रेक फेल। इनसेट में ड्राइवर चन्द्रभान।

    जयपुर. खटारा होती लो-फ्लोर बसों के मेंटेनेंस को लेकर जेसीटीएसएल और संचालन कंपनी के बीच विवाद के बीच बुधवार शाम शहर को डराने वाला हादसा हो ही गया। बड़ी चौपड़ पर शाम साढ़े सात बजे भारी गहमागहमी और ट्रैफिक के बीच आमेर से आई लो-फ्लोर बस RJ 14 PC 4382 के ब्रेक फेल हो गए। बस चालक ने हॉर्न पर हथेली रख दी और खुद जोर-जोर से ब्रेक फेल-ब्रेक फेल चिल्लाने लगा। ड्राइवर को चिल्लाता देख बस में बैठी करीब 25 सवारियां भी घबरा गईं और चिल्लाने लगीं। बस का लगातार हॉर्न और शोर सुन सड़क पर चल रहे वाहनों ने बस को जितनी जगह दे सकते थे, दी। इसके बाद बस ड्राइवर ने सूझबूझ दिखाते हुए बड़ी चौपड़ पर हो रही मेट्रो परियोजना की बेरिकेडिंग से अपनी बस को भिड़ाते हुए आगे बढ़ाया, इससे बस की स्पीड काफी हद तक कम हो गई। फिर बस चालक ने सामने आ रहे स्कूटर-बाइक को बचाने के लिए आगे चल रही नगरीय परिवहन की सिटी बस को टक्कर मार दी। इससे बस रुक गई और बड़ा हादसा टल गया। इसमें सबसे ज्यादा ताज्जुब की बात यह है कि जिस बस के ब्रेक फेल हुए वह बस खराब है और इसे ठीक कराने के लिए ड्राइवर रोजाना कहता है।

    एवरेज के साथ सवारी-समय का टार्गेट, बसें खटारा...हादसा हो तो हम जिम्मेदार!

    मेरा नाम चन्द्रभान है। बड़ी चौपड़ पर जिस बस के ब्रेक फेल हुए मैं उसका ड्राइवर हूं। मैं आमेर से बस लेकर आया था। हवामहल के सामने बड़ी चौपड़ की चढ़ाई पर बस चल रही थी। जैसे ही चौपड़ पर पहुंची मैंने ब्रेक लगाया...लगा ही नहीं। बाजार में ट्रैफिक बहुत था, इसलिए बस की स्पीड भी कम थी, मगर रोक नहीं पा रहा था। सबसे पहले मैंने नोन-स्टॉप हॉर्न बजाया और अपनी खिड़की की ओर चल रहे वाहनों को चेताया कि बस के ब्रेक फेल हो चुके हैं। बस के यात्री डर गए थे, वो भी चिल्ला रहे थे। मेरे भी हाथ-पैर फूल रहे थे। तभी मुझे मेट्रो बेरिकेडिंग तक पहुंचने जितना स्पेस मिल गया। मैंने बस को सीधे बेरिकेडिंग के साथ कर लिया और बेरिकेडिंग के साथ बस को रगड़ते हुए चलाया, ताकि वह रुक जाए। बस की स्पीड बिल्कुल कम हो गई मगर फूल वाले खंदे की तरफ बढ़ती रही। वहां कई लोग खड़े थे तो मैंने बस को आगे चल रही सिटी बस से टकरा दिया।

    हमारे लिए यह पहला हादसा नहीं था। ऐसे दुर्घटनाओं के लिए हम विशेष सतर्क रहते हैं। जो बस मैं चला रहा था, वह खराब ही थी। उसे ठीक कराने के लिए लगभग रोजाना ही कहते हैं, कोई असर ही नहीं होता। लो-फ्लोर के ड्राइवर को कंपनी ने एवरेज निकालने का टार्गेट दे रखा है, यानी कम डीजल में ज्यादा चलो। ज्यादा सवारियां उठाने का टार्गेट दे रखा है, यानी बस को खचाखच भरकर चलो। इसके अलावा बस को एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक तय समय पर चलने का टार्गेट भी है। ...और इन सब टार्गेट के बीच बसें खटारा। चारदीवारी में भारी ट्रैफिक और बाजारों के बीच से इन बसों को सभी टार्गेट ध्यान में रखते हुए निकालना...इस चुनौती को लो-फ्लोर का ड्राइवर ही जानता है। बसें सुधरवाते नहीं। टार्गेट पूरा न करो तो तनख्वाह काट लेते हैं। ...और बस से कोई हादसा हो जाए तो अंतिम जिम्मेदार भी ड्राइवर ही होता है। जेसीटीएसएल ध्यान दे।

    जेसीटीएसएल चेयरमैन बोले- खटारा बसों को जल्द ही हटा देंगे

    जेसीटीएसएल चेयरमैन अशोक लाहोटी ने कहा है- खटारा बसों की रिपोर्ट हमारे पास है। 70 बसें खरीदी हैं। खटारा बसों को हटा देंगे।

    चिंता की बात
    जिस जगह हादसा हुआ, वहां से दुर्घटना थाना 100 मीटर दूर है, लेकिन पुलिस को इस घटनाक्रम का पता ही नहीं लगा।

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Web Title: Bus Break Fail Accident
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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