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विवादित बिल : सरकार ने पहले मोहलत मांगी, कोर्ट नाराज हुआ तो तुरंत पेश किया जवाब

​अफसरों को बचाने वाले बिल पर सरकार ने कहा- किसी के मूलभूत हकों का हनन नहीं।

Dainik Bhaskar

Nov 18, 2017, 07:33 AM IST
सिम्बॉलिक इमेज। सिम्बॉलिक इमेज।

जोधपुर. हाईकोर्ट के न्यायाधीश गोविंद माथुर व विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने सीआरपीसी में संशोधन के लिए लाए गए अध्यादेश के विरुद्ध दायर याचिका में सरकार के जवाब नहीं देने पर नाराजगी जताई। नाराजगी को देखते हुए सरकार ने दोपहर बाद सात पृष्ठ का जवाब पेश कर दिया। इसमें कहा गया कि यह कानून किसी के मूलभूत अधिकारों का हनन नहीं करता और याचिकाकर्ता का भी इससे कोई नुकसान नहीं हुआ। इसमें केंद्र सरकार को पक्षकार नहीं बनाया गया, इसलिए यह याचिका खारिज होने योग्य है। कोर्ट ने सरकार को जवाब पेश करने की आखिरी मोहलत देते हुए इसे अंतिम रूप से निबटाने के लिए 22 नवंबर को सुनवाई मुकर्रर की है।

- याचिकाकर्ता एजाज अहमद ने क्रिमिनल लाॅ राजस्थान अमेंडमेंट ऑर्डिनेंस 2017 को चुनौती दी है।
- याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह अवैधानिक है, इस कानून को डस्टबीन में डाल दिया जाना चाहिए। सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार व अधिवक्ता श्याम पालीवाल से पूछा कि सरकार का क्या कहना है। पालीवाल ने कहा कि जवाब की पूरी तैयारी है, बस थोड़ी मोहलत दी जाए।

- कोर्ट ने जवाब पेश नहीं करने पर नाराजगी जताई। इस पर सरकार ने दोपहर बाद जवाब पेश कर दिया।

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