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माफिया ने 100 Cr. की लागत वाले टोंक पुल के 20 से ज्यादा पिलराें की खोद डालीं जड़ें

सड़क, पुल और रेल मार्ग से 45 मीटर परिधि तक नहीं हो सकता किसी तरह का खनन लेकिन बजरी माफिया ने बनास क्षेत्र में किया नियमों

Danik Bhaskar | Nov 22, 2017, 07:40 AM IST
देखिए...टोंक मेें बनास नदी पर बन देखिए...टोंक मेें बनास नदी पर बन

जयपुर. बजरी माफिया ने नियमों को किस तरह खोखला कर दिया, इसकी बानगी टोंक का नया पुल है। 100 करोड़ रुपए की लागत से बना यह पुल खनन माफिया की कारगुजारी के कारण खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियमावली 1986 के नियम 48 के तहत सड़क, पुल और रेल मार्ग से 45 मीटर परिधि तक किसी भी तरह का खनन कार्य नहीं किया जा सकता, लेकिन बजरी माफिया ने टोंक के नए पुल के पिलर ही खोखले कर दिए। बजरी के लालच में पुल के एक-दो पिलर नहीं बल्कि 20 से ज्यादा पिलर खोखले कर दिए गए हैं। इन पिलरों के पास करीब 40-50 फीट तक बजरी खनन किया गया है। सिर्फ टोंक के पुल के नीचे ही नहीं बल्कि पूरे बनास क्षेत्र में खनन माफिया ने लीज की हर शर्त का जमकर माखौल उड़ाया है। शर्तों के तहत खनन क्षेत्र में बजरी का अवैध भंडारण और स्टॉक किए जाने पर लीज राशि वसूले जाने का प्रावधान है। टोंक के नए पुल, भरनी, महुवा, छान, अमीरपुरा, महमदपुरा, लहन, टोंक बी, टोंक ए, सरवदाबाद और साइदाबाद इलाके में हजारों टन बजरी का स्टॉक किया गया, लेकिन इस पर खनिज विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की।

50 से ज्यादा जगह पर 30-30 फीट तक खोद डाली बनास नदी

नियमानुसार सतह से 3 मीटर से कम और पानी वाली जगह से कम से कम एक मीटर दूरी पर ही खनन हो सकता है लेकिन टोंक व सवाई माधोपुर जिलों में 50 से ज्यादा जगह ऐसी हैं जहां 30-30 फीट तक खनन किया गया है। कई जगह पानी के भीतर भी खनन किया गया। नदी की तीन चौथाई चौड़ाई में ही खनन किया जा सकता है। नदी की चौड़ाई के अलावा आस-पास के क्षेत्र को भी एलएनटी और जेसीबी मशीनों से खोद डाला गया । नदी की सतह पर मिट्‌टी से डेढ़ मीटर ऊपर बजरी छोड़नी होती है लेकिन अधिकांश जगहों पर मिट्‌टी की सतह को भी खोद दिया गया है।

सिर्फ नाम की कमेटी

नियमों की पालना के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में हर जिले में गठित कमेटियों को हर 15 दिन में बजरी के खनन और उठाव पर निगरानी रखनी होती है। लेकिन किसी भी जिले में कमेटियां नियमित दौरा नहीं करती। चौंकाने वाली हकीकत यह है टोंक और सवाई माधोपुर जिलों में पिछले एक साल में जिला कलेक्टर ने एक भी दौरा नहीं किया।

बीच नदी में सड़क बना डाली

नदी के बहाव क्षेत्र में एलओआई धारक किसी तरह का स्थायी और बहाव को प्रभावित करने वाला स्ट्रक्चर नहीं बना सकता लेकिन टोंक और सवाई माधोपुर जिलों में करीब 80 किलोमीटर क्षेत्र में हाइवे जैसी टू लेन सड़क बनाकर नदी के बहाव को पूरी तरह से पाट दिया गया है। इस सड़क के कारण कहीं बनास नदी दो हिस्सों में बंट गई है तो कहीं पर पूरा बहाव क्षेत्र ही रोक दिया गया है।

नदी में बन गए मौत के गड्‌ढे
एलओआई की शर्त है कि हर एक किमी क्षेत्र के बाद 50 मीटर खनन प्रतिबंधित रहेगा। खनन से निकलने वाले ग्रेवल-बोल्डर्स को हर 1 किमी बाद इकट्‌ठा कर पानी का बहाव के लिए दीवार बनेगी। हालात ये है, 30-30 किमी तक निर्बाध खनन हुआ। खनन के बाद क्षेत्र को समतल बनाए जाने का भी प्रावधान है लेकिन कहीं भी गड्‌ढों को समतल नहीं किया गया ऐसे ही गड्‌ढे में डूबकर कुछ दिन पहले चौथ का बरवाड़ा के निकट अभयपुरा गांव के एक आठ वर्षीय बालक की मौत हो गई थी।

जिन गांवों में लीज पट्‌टा नहीं था वहां भी ठेकेदार ने कर दिया खनन
बजरी के ठेकेदारों ने खनन की हर शर्तों का उल्लंघन किया है। फर्जी रसीदों के माध्यम से जमकर अवैध वसूली की है। सवाई माधोपुर और टोंक के करीब एक दर्जन गांव ऐसे होंगे जहां की लीज पट्‌टा किसी को नहीं दिया गया था, फिर भी ठेकेदार ने इन गांवों से बजरी का खनन कर दिया। हमने एक साल पहले जिला कलक्टर सवाई माधोपुर को फर्जी रसीदें तक दी थी। जिन पर सीएसटी, वैट, टीन नंबर कुछ भी अंकित नहीं है। इन रसीदों पर सरकार की ओर से तय दर से भी कई गुणा ज्यादा रायल्टी राशी लिखी गई थी। -किरोड़ीलाल मीणा, विधायक

एलओआई शर्ते और खनन नियमों की पालना के लिए कमेटी का गठन नहीं किया गया, क्योंकि अभी जो खनन हो रहा था वो अस्थाई खनन था। ठेकेदार ने लीज पट्‌टे के अलावा कहीं पर भी बजरी का खनन नहीं किया है। जहां पर लीज पट्‌टे के बाहर खनन हुआ है वो स्थानीय ग्रामीणों ने किया है। -केसी वर्मा, जिला कलक्टर, सवाई माधोपुर

जिला कलक्टर की अध्यक्षता गठित कमेटी लगातार खनन के मामलों की मॉनिटरिंग कर रही है। हमने सब डिवीजन लेवल पर भी कमेटी का गठन कर रखा है, ताकी प्रभावी मॉनिटरिंग हो सके। बनास पर बने नए पुल के नीचे से कोई बजरी खनन नहीं किया गया हैं। -सुबेसिंह यादव, जिला कलक्टर, टोंक