--Advertisement--

रोज 4000 नई साइकिलें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट में 5% हिस्सा... चलने की जगह 1% भी नहीं

शहर की सड़कों पर मोटर वाहनों की भीड़ में यूं किनारे हाे गई साइकिल

Dainik Bhaskar

Nov 29, 2017, 08:27 AM IST
जगह मिले तो बढ़े साइकिल। जगह मिले तो बढ़े साइकिल।

जयपुर. शहर को स्मार्ट बनाना है और किसी शहर को स्मार्ट बनाने की पहली सीढ़ी वहां साइकिल तक पर चलने वाले लोगों को सुगम और सुरक्षित रास्ता देना होती है। बदकिस्मती से जयपुर में ऐसा नहीं हो रहा और न ही शहर की सरकार इसे बेहतर करने के लिए कुछ कर पा रही है। जयपुर में 5 साल पहले 7-8 लाख साइकिल हर महीने बिकती थीं लेकिन समय के साथ साइकिल सड़कों से ओझल होने लग गई। इसके बावजूद आज जयपुर शहर में हर महीने 1.25 लाख तक साइकिलें बिक रही हैं। यह आंकड़ा पेट्रोल-डीजल से चलने वाले दोपहिया और चार पहिया के मुकाबले 8 गुना ज्यादा है।

जयपुर में हर महीने 15 हजार दोपहिया और चार पहिया वाहनों की बिक्री होती है लेकिन सड़क पर बड़ा कब्जा इन्हीं वाहनों का है। आंकड़ों की मानें तो आज भी 5% लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट में साइकिल का इस्तेमाल करते हैं लेकिन साइकिलों के चलने के लिए 1% जगह भी नहीं है। पूरे शहर में कहीं भी साइकिल ट्रैक नहीं है, जहां हैं वहां अतिक्रमण है। शहर को स्मार्ट बनाने के लिए चलाई जाने वाली साइकिल शेयरिंग स्कीम अभी तक शुरू हो पाई है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट में इसका हिस्सा ऑटो के बराबर

इसी साल एमएनआईटी के प्रोफेसर जे.के. जैन और एमिटी यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर पंकज शर्मा ने शहर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट को लेकर एक सर्वे किया। इसमें पाया गया कि जयपुर में आज भी 5%लोगों की सवारी साइकिल ही है। इसके अलावा पब्लिक ट्रांसपोर्ट में 24% टू-व्हीलर, 9% कार, 8% टैक्सी, 5% ऑटो और 23% पैदल की हिस्सेदारी है।

हर वर्ग में साइकिल का अलग-अलग उपयोग
ट्रांसपोर्ट : आज भी बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे और मजदूरी पेशा लोग आने-जाने के लिए साइकिल का ही इस्तेमाल करते हैं।
सेहत : इन दिनों खुद को फिट बनाए रखने के लिए लोग साइकिल का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें युवाओं की संख्या खासी है।
खेल : साइकिलिंग एक लोकप्रिय खेल भी है। बकायदा इसकी एसोसिएशन बनी हुई हैं और प्रतियोेेेेेेेेेगिताएं होती हैं।

साइकिल पर जीएसटी से हो गई टैक्स की दोगुनी मार
साइकिल को इस साल आए जीएसटी से भी काफी नुकसान हुआ है। जीएसटी सिस्टम से पहले प्रदेश में 5.5% वैट लगता था लेकिन जीएसटी के तहत अब इस पर 12% टैक्स लगता है। टायर-ट्यूब पर 5% तो साइकिल और इसके पार्ट्स पर 12% टैक्स है। इसके अलावा पंक्चर और अन्य पार्ट्स पर भी जीएसटी लगने से पार्ट्स महंगे हुए हैं।

साइकिल हो ज्यादा इस्तेमाल तो आधा रह जाए प्रदूषण
राजस्थान यूनिवर्सिटी के एनवारमेंटल एंड पॉपुलेशन स्टडीज विभाग के एचओडी टी.आई. खान के मुतािबक अगर हम लोग साइकिल को अपनी आदत बना लें तो प्रदूषण में आधी गिरावट आ जाएगी। क्योंकि 3 टन पेट्रोल जलने से पर्यावरण में 8 टन ऑक्सीजन खत्म होती है। जाहिर है साइकिल चलेगी तो प्रदूषण कम होगा।

सरकारें साइकिल तो दे रही लेकिन चलाएं कहां?

पिछले कुछ वर्षों से देशभर में कई सरकारों ने स्कूल के बच्चों को साइकिल बांटने की योजना शुरू की है। गांवों में तो बच्चे कच्ची सड़कों से साइकिल चला कर जैसे-तैसे स्कूल पहुंच जाते हैं लेकिन शहरों के भारी ट्रैफिक के बीच लाखों बच्चों को साइकिल चलानी पड़ रही है। एेसे में सवाल यह है कि वोट बैंक बढ़ाने के लिए सरकारें साइकिल तो बांट रही है लेकिन उन्हें चलाने के लिए जगह तक मुहैया नहीं करा पा रही।

X
जगह मिले तो बढ़े साइकिल।जगह मिले तो बढ़े साइकिल।
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..