जयपुर

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भंसाली की पद्मावती के विरोध में अब कांग्रेस-भाजपा, सब एक, न्यायिक जांच कराने की उठी मांग

पद्मावती फिल्म को लेकर राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में हंगामामचा हुआ है।

Dainik Bhaskar

Nov 18, 2017, 08:23 AM IST
political groups togeather on padmavati controversy

जयपुर. पद्मावती फिल्म को लेकर राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में हंगामा मचा हुआ है। राजपूत समाज से जुड़े संगठन इस फिल्म पर रोक की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि चित्तौड़ की रानी पद्मिनी पर बनी इस फिल्म में कई तथ्य गलत हैं। फिल्म को तभी रिलीज किया जाए, जब इतिहासकारों, समाज के प्रबुद्ध लोग इसे देखकर सही बता दें।

- राजपूत नेताओं ने फिल्म के विरोध में 30 नवंबर को राजस्थान बंद व एक दिसंबर को भारत बंद का ऐलान भी किया है। दूसरी ओर, फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े अधिकांश लोग जहां इस फिल्म के समर्थन में हैं, वहीं राजनेता सधे हुए बयान दे रहे हैं। इस फिल्म में उन्हें राजपूत समाज का बड़ा वोट बैंक दिखाई दे रहा है। इस कारण अधिकांश दल समाज के समर्थन में बोल रहे हैं।

- फिल्म के पर्दे पर आने से पहले चल रहे इस बवाल पर भास्कर ने राजस्थान के राजपूत समाज के प्रतिनिधियों, मंत्रियों, विधायकों और इतिहासविदों से बात की। फिल्मी पद्मावती के विरोध में सारे नेता एक दिखाई दिए।

- कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दलों से जुड़े नेताओं ने फिल्म में तथ्य न सुधारे जाने तक रिलीज को रोकने की मांग की है। इतना ही नहीं, नेताओं ने विशेष स्क्रीनिंग रखने की भी मांग रखी है।

- खुद गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ नहीं होने देंगे। कटारिया ने बताया- पद्मावती के इतिहास को लेकर कई जगह कई संस्थाओं ने ज्ञापन दिए हैं। इन्हे लेकर संबंधित विभाग से राय मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे कार्रवाई तय की जाएगी। पढ़िए...फिल्मी पद्मावती ने कैसे सत्ता और विपक्ष काे कर दिया एकजुट.....।

विरोध की एकता ; गृहमंत्री तक बोले-इतिहास से छेड़छाड़ नहीं होने देंग

भाजपा| मंत्री-विधायक बोले : फिल्म का प्रदर्शन तभी हो, जब तथ्य पूरे सही हो

पदमावती राजपूत ही नहीं सभी समाजों के लिए भी गौरव का विषय है। सेंसर बोर्ड से फिल्म बाहर आने दीजिए। उसके बाद हम कुछ कह सकेंगे। लोग कानून हाथ में न लें। -गुलाब चंद कटारिया, गृहमंत्री

इसे सिर्फ ऐतिहासिक नहीं भावनात्मक रूप से भी देखा जाना चाहिए। अगर फिल्म से किसी की भावना को ठेस पहुंचती है तो रिलीज नहीं होनी चाहिए। -गजेंद्र सिंह, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री

पद्मावती व चित्तौड़गढ़ राजस्थान का गौरवशाली इतिहास हैं। फिल्म का प्रदर्शन उसी स्थिति में होना चाहिए, जब इसके तथ्य सही हों। -राजेंद्र राठौड़, पंचायती राज मंत्री

फिल्म में कुछ आपत्तिजनक है तो उसे हटाकर रिलीज होनी चाहिए। फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग क्यों नहीं की जा सकती? -मानवेंद्र सिंह- भाजपा विधायक

कांग्रेस | सीएम को हस्तक्षेप करना था, अब केंद्र और राज्य रिलीज पर रोक लगाए

मामला सामने आते ही सीएम को हस्तक्षेप करना था। फिल्म निर्माता को हक नहीं कि जनभावना को आहत करे। राज्य व केंद्र रिलीज पर रोक लगाएं। -सचिन पायलट, कांग्रेस प्रदेश अघ्यक्ष

राजस्थान का गौरवशाही इतिहास रहा है। यदि राज्य के इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है तो रोक लगानी चाहिए। -भंवर जितेंद्र सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री

मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच हो। यह फिल्म साजिश के तहत बनाई है, जिससे भाजपा या भंसाली को फायदा होने वाला है। -दीपेंद्र सिंह शेखावत, पूर्व विधानसभा अघ्यक्ष

राजस्थान के पूर्व राजपरिवार पहले ही विरोध में

गौरतलब है कि राजस्थान के पूर्व राजपरिवार पहले ही फिल्म के विरोध में हैं। इन सभी ने फिल्म को रिलीज से पहले मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार को दिखाने और तथ्य सुधारने की मांग रखी हुई है।

राजपूत नेता बोले : केंद्र तुरंत पद्मावती फिल्म पर रोक लगाए

फिल्म को किसी भी सूरत में रिलीज नहीं होने दिया जाएगा। यह केवल राजपूत समाज नहीं बल्कि देश की महिलाओं के सम्मान का सवाल है। -लोकेंद्र कालवी, संस्थापक, राजपूत करणी सेना फिल्म में पद्मावती व चित्तौड़गढ़ के इतिहास को तोड़मरोड़ कर बताया जा रहा है। फिल्म को किसी भी सूरत में रिलीज नहीं होने देंगे। -सुखदेव सिंह गोगामेडी, अध्यक्ष, श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना

इतिहासविद् बोले: न पद्मिनी ने कभी खिलजी से प्रेम किया, न जायसी ने लिखा

पदमावती का खिलजी के साथ प्रेम-प्रसंग होता तोवह हजारों महिलाओं के साथ जौहर क्यों करती? खिलजी ने यह युद्ध पदमावती से ज्यादा राजनीतिक फायदे के लिए किया था। इतिहास पर फिल्में जरूर बननी चाहिए, लेकिन पूरे अनुसंधान के साथ। रिसर्च के बाद ही गांधीजी पर फिल्म बनी थी। कोई विवाद नहीं हुआ। फिल्मकार इतिहास से तोड़- मरोड़ करेंगे तो समाज गलत दिशा में चला जाएगा। इससे पहले भी जोधा-अकबर फिल्म में काफी कुछ गलत तथ्य पेश हो चुके है। {प्रो. आरएस खंगारोत, इतिहासकार

सूफी कवि मलिक मोहम्मद जायसी ने 1540 ईस्वी में अवधी भाषा में चित्तौड़ पर हुए 1303 ईस्वी के आक्रमण पर पदमावत काव्य लिखा। इस काव्य में साफ लिखा है कि पद्मिनी के कभी अलाउद्दीन खिलजी के साथ प्रेम प्रसंग नहीं रहे। चित्तौड़ मनुष्य के शरीर का प्रतीक है। रावल रतन सिंह उसकी आत्मा और पदमावती उसकी बुद्धि। खिलजी माया या भ्रम है, जो बुद्धि को भटकाने का प्रयास है। यह युद्ध केवल राजनीतिक फायदे के लिए हुआ था। {प्रो. के.जी. शर्मा, हिस्ट्री डिपार्टमेंट, राज. व

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