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पहले परीक्षा के लिए कोर्ट तक लड़ाई, अब रिजल्ट पाने की जंग

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में एक ऐसी लड़की का आवेदन कर दिया जो काफी समय पहले स्कूल छोड़कर जा चुकी थी।

Dainik Bhaskar

Nov 25, 2017, 05:02 AM IST
poor and dalit families fighting  system and board

जयपुर . इसे सिस्टम की खामी कहें या शिक्षा व्यवस्था की गड़बड़ी। दलित बेलदार पिता की एक बेटी ने सालभर तक प्राइवेट स्कूल में नियमित दसवीं कक्षा की तैयारी की लेकिन स्कूल प्रशासन ने गलती से उसकी जगह माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में एक ऐसी लड़की का आवेदन कर दिया जो काफी समय पहले स्कूल छोड़कर जा चुकी थी। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने जब इस छात्रा को परीक्षा में सम्मिलित करने से इंकार कर दिया तो पहले तो इस परिवार ने बेटी को परीक्षा दिलाने के लिए हाईकोर्ट तक लड़ाई लड़ी। अब पिछले पांच माह से यह परिवार रिजल्ट की लड़ाई लड़ रहा है।

जानिए क्या है पूरा मामला
खातीपुरा रोड स्थित दुर्गा कॉलोनी विस्तार में रहने वाली कविता कुमारी बैरवा सोडाला की नवजीवन सीनियर सैकंडरी स्कूल में वर्ष 2016-17 में दसवी की नियमित छात्रा थी। इस स्कूल में कविता नाम की तीन छात्राएं थी जिनमें से एक बीच में स्कूल छोड़कर चली गई। स्कूल प्रशासन ने कविता बैरवा की जगह बीच में स्कूल छोड़ने वाली छात्रा का बोर्ड परीक्षा के लिए आवेदन कर दिया। कविता को परीक्षा से पांच दिन पहले तक प्रवेश पत्र नहीं मिला तो उन्होंने स्कूल में पूछताछ की। इसके बाद उन्हें पता चला कि उसका तो आवेदन ही नहीं किया गया है। पिता ने बेटी को परीक्षा में बैठने देने की अनुमति के लिए बोर्ड में भी गुहार लगाई लेकिन कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद इन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। परीक्षा से पांच दिन पहले हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को आदेश दिए कि कविता को परीक्षा में सम्मिलित किया जाए। इसके बाद कविता बिना किसी बाधा के परीक्षा में शामिल हुई। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 8 जून 2017 को माध्यमिक परीक्षा का परिणाम भी जारी कर दिया लेकिन कविता के परिणाम के सामने (आरडब्ल्यूएच) परीक्षा परिणाम रोका हुआ लिखा हुआ है जबकि बीच में स्कूल छोड़कर जाने वाली छात्रा के परीक्षा परिणाम के सामने अनुपस्थित लिखा हुआ है।

बोर्ड से मिलता है हर माह आश्वासन
परीक्षा परिणाम के लिए कविता का परिवार कई बार बोर्ड के अध्यक्ष, सचिव और माध्यमिक शिक्षा निदेशक से गुहार लगा चुका है लेकिन उन्हें हर बार अगले माह परिणाम जारी होने का आश्वासन मिलता है। रिजल्ट जारी नहीं होने से पूरा परिवार गहरे सदमे में है। परिवार ने मुख्यमंत्री से भी गुहार लगाई है।

इनका कहना है

कोर्ट के आदेशों के बाद हमने तो छात्रा को न केवल परीक्षा में बिठाया बल्कि उसके परिवार को हर्जाने के 10 हजार रुपए भी दिए हैं। बोर्ड अब रिजल्ट क्यों नहीं जारी कर रहा है, इसकी मुझे जानकारी नहीं है।
-सीताराम, निदेशक, नवजीवन सीनियर सैकंडरी स्कूल

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