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प्रेग्नेंट लेडी डॉक्टर गई थी अफसर से लीव मांगने, हुआ ऐसा सलूक कि बिगड़ी तबियत

अफसर बोले- दरवाजे के लात मारकर आई, मुझे बोलने ही नहीं दिया।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 24, 2017, 07:37 AM IST

  • प्रेग्नेंट लेडी डॉक्टर गई थी अफसर से लीव मांगने, हुआ ऐसा सलूक कि बिगड़ी तबियत
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    विवाद के बाद महिला डॉक्टर अस्पताल में भर्ती।

    जयपुर.एसएमएस अस्पताल के ब्लड बैंक में कार्यरत महिला डॉक्टर आशा लता अपनी छह माह की रुकी तनख्वाह पास कराने के लिए गुरुवार को स्वास्थ्य निदेशालय गई। डॉक्टर का आरोप है कि 5 दिन बाद उनकी डिलीवरी होने वाली है, लेकिन निदेशालय ने 8 चक्कर कटवाने के बाद भी तनख्वाह नहीं दी। फाइल पास कराने गई तो वहां कार्यरत ऐडिशनल डायरेक्टर मेडिकल हैल्थ गिरीश पाराशर (आरएएस) ने उनके साथ बदतमीजी की और कहा कि तुम महिलाएं आंसू बहाकर हम पर दबाव मत बनाओ, बाड़मेर दिखा दूंगा। जयपुर में नौकरी करना भूल जाओगी। तनख्वाह चाहिए तो खुद जाकर अपनी फाइल सचिवालय से पास करवा लो।


    - इस पर दो घंटे हंगामा चलता रहा और महिला डॉक्टर की तबियत बिगड़ने पर वे महिला अस्पताल सांगानेरी गेट में भर्ती हो गई।

    - दूसरी तरफ आरएएस अफसर और एडिशनल डायरेक्टर गिरीश पाराशर का कहना है कि प्रेग्नेंसी का 9 वां माह होने के बावजूद डॉ. आशा लता मेरे चेंबर में दरवाजे के लात मार कर घुसी और मेरे और मेरे बाबू कुलदीप पर चिल्लाती रही। मुझे 15 मिनट तक बोलने नहीं दिया तो मैं डायरेक्टर से मिलने का कहकर कुर्सी छोड़ चला गया। डेढ़ घंटे बाद लौटा तो कुछ डॉक्टरों के साथ आशा लता मेरे कमरे में काबिज थी। मैंने बाड़मेर भेजने जैसी कोई बात नहीं कही।

    - पाराशर वही अफसर है जिनको हटाने को लेकर पिछले दिनों डॉक्टर 7 दिन हड़ताल पर रहे जिसकी वजह से प्रदेश में मौतें भी हुईं। गुरुवार की घटना के बाद अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ ने आरोप लगाया है कि आरएएस पाराशर ने उनकी साथी प्रेग्नेंट डॉक्टर के साथ बदसलूकी की है।

    - पाराशर को एडिशनल डायरेक्टर के पद से हटाने के लिए 7 दिन प्रदेश व्यापी हड़ताल की थी। समझौते के 11 दिन बाद भी सरकार ने एमओयू के अनुसार एडिशनल डायरेक्टर के पद से गिरीश पाराशर को हटाया नहीं है। यही कारण है कि आरएएस अफसर और डाक्टर के बीच टकराव हुआ। संघ इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।

    यह है मामला

    - एसएमएस के ब्लड बैंक में कार्यरत डॉ. आशा लता मई-जून में पीजी की डिग्री ली। डॉक्टर का कहना है कि पीजी डिग्री के बाद की जून से अब तक की 6 माह की तनख्वाह निदेशालय ने रोक रखी है।

    - उसके लिए इसी माह चार बार और अब तक 8 बार निदेशालय गई। एक बाबू बार बार फाइल घूमा रहा है और पाराशर उसका साथ दे रहे हैं। गुरुवार को गई तो बाबू उनकी फाइल को लेकर हंसने लगा। इस कारण गुस्सा भड़का। - डॉक्टर का कहना है कि वे प्रेग्नेंट होने के कारण परेशानी से रोती रही, लेकिन पाराशर चिल्लाते रहे। फिर उनको धमकाया। दूसरी तरफ निदेशालय के अफसरों के अनुसार उनकी एपीओ अवधि के दौरान की सैलेरी बकाया है, जिसके लिए वे 17 नवंबर को भी आई थी।

    मेरे साथ निदेशालय में इतना बुरा सलूक हुआ कि मेरी तबियत बिगड़ गई। मुझे शाम को महिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। मेरे पति अलवर पोस्टेड है और 29 नवंबर को मेरी डिलीवरी है, लेकिन मुझे छह माह की सैलेरी पास करने की बजाय पाराशर द्वारा धमकाया गया। मैं प्रेग्नेंसी में रोती रही लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
    -डॉ. आशा लता, पीड़ित डॉक्टर


    मेरे पास आशा लता के साथ वार्तालाप की रिकॉर्डिंग है। मैंने कोई बदसलूकी नहीं की। उनको समझाया, लेकिन उन्होंने मुझे बोलने तक का मौका नहीं दिया। मैं एडिशनल डायरेक्टर की पोस्ट पर पांच मिनट भी नहीं रहना चाहता। सरकार ने लगा रखा है तो कहां जाऊं। नौकरी कर रहा हूं। डॉक्टर मुझे टार्गेट नहीं करें।
    -गिरीश पाराशर, एडिशनल डायरेक्टर, मेडिकल एंड हेल्थ

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    पीड़ित डॉक्टर डॉ. आशा लता।
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    मेडिकल एंड हेल्थ एडिशनल डायरेक्टर गिरीश पाराशर।
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Web Title: Pregnent Lady Doctor Alligations Against Officer
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