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पद्मावती के ट्रेलर पर भड़के लोग, सिनेमा हॉल में तोड़फोड़, फिल्म पर रोक की मांग

फिल्म के प्रदर्शन पर रोक की मांग को लेकर राजस्थान से लेकर मुंबई, मध्यप्रदेश व गुजरात सहित देश के अन्य हिस्सों में विरोध।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 15, 2017, 05:38 AM IST

पद्मावती के ट्रेलर पर भड़के लोग, सिनेमा हॉल में तोड़फोड़, फिल्म पर रोक की मांग
जयपुर.राज्य में गुड गवर्नेंस और बेहतर पॉलिसी मेकिंग के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसरों की एक सीट पर कम से कम दो साल रखने के प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र ने बेशक अनिवार्य कर दिया हो, लेकिन उसका प्रदेश में क्रियान्वयन नहीं हो रहा। स्थिति यह है कि हर आईएएस का औसतन दस से 15 माह के भीतर एक से दूसरे पद पर तबादला कर दिया जाता है। दैनिक भास्कर ने राज्य में 20 साल की अवधि से अधिक सेवा पूरी करने वाले 65 आईएएस अफसरों के रिकाॅर्ड खंगाला, जिसमें चौंकाने वाली यह तस्वीर सामने आई।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार ने अखिल भारतीय सेवा नियम में संशोधन किया था। उसी के तहत राज्य में सिविल सर्विसेज बोर्ड का गठन किया गया था। उसमें यह प्रावधान किया गया था कि आईएएस, आईपीएस और आईएफएस का स्थानांतरण दो साल के बाद ही किया जाएगा। केवल विशेष परिस्थिति में ही किसी अफसर का तबादला किया जा सकता है।

उस स्थिति में भी तबादले की जद में आने वाले अफसर का पक्ष लिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। बोर्ड के बिना ही प्रशासनिक स्तर पर राज्य में स्थानांतरण किए जा रहे हैं। खास यह है कि कुछ अफसर तो कांग्रेस के पसंदीदा है, जिनका कांग्रेस कार्यकाल में कम स्थानांतरण होता है। पर ऐसे अफसर भाजपा की सरकार आते ही स्थानांतरण की जद में आ जाते है। इसी तरह भाजपा सरकार में भी कुछ अफसर प्राइम पोस्टिंग पा लेते है और वह तबादलों की जद से बाहर रहते है। पर कांग्रेस की सरकार आते ही एक से दूसरे सीट पर चक्कर काटते नजर आते हैं।
अफसर जिनके सबसे ज्यादा और सबसे कम तबादले हुए
संदीप वर्मा : ताबड़तोड़ तबादलों की जद में आते रहे, 24 साल की नौकरी, 42 तबादले
राज्य में 1993 बैच के आईएएस संदीप वर्मा एक मात्र ऐसे अफसर है, जिनका सबसे अधिक तबादला हुआ है। 24 साल की सेवा में वर्मा का 42 बार स्थानांतरण हुआ। हर सरकार के कार्यकाल में वर्मा ताबड़तोड़ तबादलों की जद में आते रहे। बजट सत्र के दौरान ही विधानसभा में पीएचईडी मंत्री सुरेंद्र गोयल के कमरे में भाजपा विधायक कैलाश चौधरी और वर्मा के बीच विवाद हो गया था। औसत निकाले तो वर्मा का छह माह में ही सरकारों एक से दूसरे सीट के लिए स्थानांतरण कर दिया।
मनजीत सिंह, रजत मिश्रा : इनका औसत सबसे ज्यादा
तबादलों के लिहाज से 1988 बैच के मनजीत सिंह और 1992 बैच के रजत मिश्रा का औसत सबसे अच्छा है। ये दो ऐसे अफसर है, जिनका एक सीट पर नौकरी करने का औसत 21 माह रहा है। मनजीत सिंह जहां 29 साल में 16 बार तबादला हुआ, वहीं रजत मिश्रा का 25 साल में 14 बार। इनके बाद प्रमुख सचिव गृह दीपक उप्रेती और केंद्र में सेवा दे रहे यादवेंद्र शामिल है, जिन्होंने औसतन एक सीट पर 20 माह का कार्यकाल पूरा किया है।
चार साल, 33 जिले, 130 कलेक्टर बदले
जिलों में भी सरकार के स्तर पर ताबड़तोड़ तबादले किए जा रहे हैं। पिछले चार साल में 33 जिलों में कलेक्टर पद पर 130 अलग-अलग अफसरों को लगाया गया है। इसके लिए अलग-अलग आदेश जारी करने पड़े। जिलों में भी कलेक्टर औसतन एक साल के आसपास ही नौकरी कर पा रहे हैं। चंद ही ऐसे कलेक्टर हैं, जिन्हें एक ही सीट पर दो या इससे अधिक साल सेवा करने का मौका मिल रहा हो।
अफसर को एक सीट पर दो साल काम करने का मौका मिले
किसी भी अफसर को एक सीट पर कम से कम दो साल काम करने का मौका मिलना ही चाहिए। अगर ऐसा नहीं होगा तो किसी भी अफसर के कार्य का मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है। केंद्र सरकार इसीलिए तो पांच साल के डेपुटेशन पर किसी अफसर को बुलाती है। सुप्रीम कोर्ट ने विनीत नारायण के मामले में 1996 में सीबीआई निदेशक और प्रवर्तन निदेशक का कार्यकाल दो साल का रखने का आदेश दिया था। राज्य सरकार को ऐसा करना चाहिए। - इंद्रजीत खन्ना, पूर्व मुख्यसचिव
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