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वर्ल्ड क्लास की दौड़ में शामिल होने से पहले ही बाहर हुए प्रदेश के विवि

वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी की खिताबी दौड़ से पहले ही प्रदेश के सभी सरकारी विश्वविद्यालय बाहर हो गए।

Danik Bhaskar | Nov 25, 2017, 06:01 AM IST

जयपुर. वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी की खिताबी दौड़ से पहले ही प्रदेश के सभी सरकारी विश्वविद्यालय बाहर हो गए। दरअसल, केंद्र ने यह खिताब देने के लिए 20 नवंबर तक आवेदन मांगे थे। लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण सहित अन्य मापदंड पूरे नहीं करने से प्रदेश का एक भी सरकारी विश्वविद्यालय आवेदन नहीं कर पाया।

सरकार ने जयपुर के राजस्थान विवि और उदयपुर के मोहन लाल सुखाड़िया विवि का नाम भेजने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन इन दोनों के कुलपतियों ने भी ये कहते हुए आवेदन से इनकार कर दिया कि दौड़ में उनका नंबर नहीं आएगा। आवेदन के समय किसी भी विश्वविद्यालय का शिक्षक व छात्र का अनुपात 1:20 होना चाहिए था। लेकिन राजस्थान यूनिवर्सिटी का रेश्यो 1:60 व मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी का 1 :32 है। इनमें 80% पद भी भरे हुए होने चाहिए, लेकिन दोनों में सिर्फ 60% पद भरे हैं।

राजस्थान यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. आर.के. कोठारी ने बताया कि हम वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी के नियमों के दायरे में नहीं आते है। इसलिए हमने राज्य सरकार को अपने हालात बयां कर दिए हैं।


दौड़ से पहले ही पीछे हटने के ये कारण
- आवेदन के समय किसी भी विश्वविद्यालय का शिक्षक व छात्र का अनुपात 1:20 होना चाहिए था। लेकिन राजस्थान यूनिवर्सिटी का रेश्यो 1:60 व मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी का 1 :32 है।
- आवेदन के समय किसी भी विश्वविद्यालय में कुल पदों की तुलना में 80 प्रतिशत पद भरे हुए होने चाहिए थे, लेकिन इन दोनों विश्वविद्यालयों में सिर्फ 60 प्रतिशत पद ही भरे हैं।
- शर्त ये थी कि इन विश्वविद्यालयों से कॉलेजों का एफिलिएशन नहीं होना चाहिए, जबकि इन विश्वविद्यालयों के अंतर्गत हजारों प्राइवेट कॉलेज हैं।

अगर अगर हमारे किसी भी विश्वविद्यालय को वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल जाता तो केंद्र से पहली किस्त के रूप में विकास कार्यों के लिए कम से कम 500 करोड़ रु. मिलते। इसके बाद विभिन्न मदों में रुपए मिलने से लेकर कई फायदे होते। अंतरराष्ट्रीय पटल पर इन विश्वविद्यालयों की साख भी बढ़ती।