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आधी रात...श्मशान...चिता...नंगी तलवारें लेकर नाचती महिलाएं…

एक विशेष अनुष्ठान के तहत शहर की कुछ महिलाएं आधी रात को श्मशान स्थल पहुंची और जमकर डांस किया।

Dainik Bhaskar

Mar 09, 2018, 12:28 PM IST
श्मशान स्थल पर आधी रात को डांस करती महिलाएं। श्मशान स्थल पर आधी रात को डांस करती महिलाएं।

जोधपुर। आधी रात...श्मशान...चिता... और हाथ में तलवार लेकर नाचती हुई औरतें। जिस श्मशान में दिन के समय जाने से लोग डरते हैं, उसमें रात को महिलाएं नाच रही हैं। यह नजारा अच्छे भले होंसले वाले इंसान के रोंगटे खड़े कर देने वाला है। यह किसी हॉरर फिल्म या उपन्यास का कथानक नहीं है, बल्कि एक ऐसी सच्ची घटना है जो जोधपुर के श्मशान में देखने को मिली। शहर की ये महिलाएं एक अनुष्ठान करने देर-रात नाचते-गाते श्मशान पहुंची थी। ऐसा था नजारा…

- जोधपुर के पुराने शहर का कुम्हारिया कुआं मोहल्ला। आधी रात होने को है, लेकिन मोहल्ले में खासी हलचल है। कुम्भेश्वर गणेश मंदिरे के बाहर महिलाएं जमा हैं। कुछ य़ुवक भी दिखाई पड़ते हैं। महिलाओं में ज्यादातर अधेड़ या बुजुर्ग हैं। वे एक आधे मटके के चारों तरफ जमा है जिसमें दीया जल रहा है और बोतल व अन्य वस्तुएं पड़ी हैं। युवक चंग पर थाप देते हैं और महिलाएं नाचने लगती है। उनके हाथों में नंगी तलवारें हैं। कुछ देर नाचने के बाद कुम्हार समाज की महिलाओं और युवकों का यह दल निकल पड़ता है एक विशेष अनुष्ठान के लिए।

- सबसे बुजुर्ग महिला चुकिया देवी आधे मटके को अपने सिर पर उठा लेती है। उनके एक हाथ में तलवार हैं। जोधपुर के पुराने शहर की गलियों में इस समय सन्नाटा छाया है। ज्यादातर रास्ते अंधेरे में डूबे हैं, कहीं-कही रोडलाइट है। कभी-कभी कोई वाहन गुजरता है तो उसका सवार इस टोली को देख कर घबरा जाता है। यह टोली पहुंचती है सिवांची गेट पर।

- युवक और महिलाएं घोष करते हुए चल रहे हैं- खेम कुसल-हाथ में मूसल, आई देवी चंडिका-माथे मोटी हंडिका। बीच-बीच में युवक होली के फाग गीत गाने लगते हैं। ज्यों-ज्यों श्मशान नजदीक आता जाता है, उनका जोश भी बढ़ता जाता है। साथ ही अंधेरा भी और घना हो जाता है। माहौल और ज्यादा डरावना होने लगता है।

- श्मशान पहुंचते ही सामने आता है, विश्राम घाट। अंतिम संस्कार के लिए लाई जाने वाली देह को यहां थोड़ी देर के लिए रखा जाता है। यह टोली इस मंडप में पहुच कर मटके को अर्थी रखने के चबूतरे पर रख देती है और महिलाएं नाचने लगती हैं। श्मशान के द्वार पर तलवार लिए महिलाओं के नाचने का नजारा बेहद डरा देने वाला है।

- श्मशान काफी अंदर जाने पर है। उसके सामने के एक श्मशान में अभी भी चिता जल रही है। यहां पूरी तरह अंधेरा है। महिलाओं और युवकों की टोली कुम्हार समाज के श्मशान के अंदर तक चली जाती है। यह काफी बड़ा परिसर है। इसके एक कोने पर चिता जलाने के चबूतरे बने हैं। ऐसे ही एक चबूतरे पर अनुष्ठान का अंतिम चरण आरंभ किया जाता है। सभी पुरुषों को वहां से दूर भेज दिया जाता है।

- दरअसल अनुष्ठान के इस सबसे महत्वपूर्ण चरण में एक महिला को अपने सभी कपड़े उतार देने होते हैं। लेकिन इस महत्वपूर्ण चरण को सम्पन्न करने वाली सबसे बुजुर्ग महिला चुकिया देवी अपने कपड़े ढीले कर देती हैं और अनुष्ठान को अंजाम देती है। इस अंतिम चरण में महिलाओं ने चिता के चबूतरे पर माली-पन्न चिपका कर देवी माता और भैरव की स्थापना की और उनकी पूजा-अर्चना की। उनको शराब, दूध, मिठाई व अन्य प्रसाद चढाए गए।

पांच साल बाद हुआ ऐसा आयोजन

- कु्हारिया कुआं के कुम्हार समाज की ये घरेलू महिलाएं और पढ़े लिखे युवक इसे अंधविश्वास नहीं मानते। उनका कहना है कि वे अपने पूर्वजों की एक परम्परा की पालना कर रहे हैं। इससे किसी का नुकसान नहीं कर रहे हैं। वे इस अनुष्ठान के जरिए अपने मोहल्ले के लोगों की ही नहीं भारत माता की कुशल क्षेम की कामना करते हैं। इस अनुष्ठान को इस बार पांच साल के बाद अंजाम दिया गया है। इस दौरान कुम्हारिया कुंआ मोहल्ले में कई बच्चों की असमय मौत हो गई थी। इसलिए मोहल्ले के लोगों ने पूर्वजों की परम्परा को निभाने की ठानी। इस अनुुष्ठान को अगर अंधविश्वास भी मान लिया जाए तो कुम्हार समाज की इन महिलाओं की हिम्मत की दाद देनी होगी जो अपनो को विपत्ति से बचाने के लिए आधी रात को श्मशान में भी जा सकती हैं।

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ऐसे आगे बढ़ी महिलाओं की टोली। ऐसे आगे बढ़ी महिलाओं की टोली।
एक महिला ने इस तरह हाथ में तलवार थाम आधी मटकी को सिर पर ले रखा था। एक महिला ने इस तरह हाथ में तलवार थाम आधी मटकी को सिर पर ले रखा था।
आधी र ात को शहर की गलियों से होकर निकलती महिलाएं। आधी र ात को शहर की गलियों से होकर निकलती महिलाएं।
श्मशान के लिए रवाना होने से पूर्व घणेस मंदिर के बाहर डांस करती महिलाएं। श्मशान के लिए रवाना होने से पूर्व घणेस मंदिर के बाहर डांस करती महिलाएं।
मंदिर के बाहर बैठी महिलाएं। मंदिर के बाहर बैठी महिलाएं।
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श्मशान स्थल पर आधी रात को डांस करती महिलाएं।श्मशान स्थल पर आधी रात को डांस करती महिलाएं।
ऐसे आगे बढ़ी महिलाओं की टोली।ऐसे आगे बढ़ी महिलाओं की टोली।
एक महिला ने इस तरह हाथ में तलवार थाम आधी मटकी को सिर पर ले रखा था।एक महिला ने इस तरह हाथ में तलवार थाम आधी मटकी को सिर पर ले रखा था।
आधी र ात को शहर की गलियों से होकर निकलती महिलाएं।आधी र ात को शहर की गलियों से होकर निकलती महिलाएं।
श्मशान के लिए रवाना होने से पूर्व घणेस मंदिर के बाहर डांस करती महिलाएं।श्मशान के लिए रवाना होने से पूर्व घणेस मंदिर के बाहर डांस करती महिलाएं।
मंदिर के बाहर बैठी महिलाएं।मंदिर के बाहर बैठी महिलाएं।
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