Hindi News »Rajasthan »Jodhpur »News» Hearing Not Completed Deer Hunting Case

हिरण शिकार मामला : सलमान के वकील ने जांच अफसर की रिपोर्ट में गिनाई कमियां

कांकाणी हिरण शिकार मामले में सीजेएम ग्रामीण कोर्ट में शुक्रवार को अंतिम बहस अधूरी रही।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 18, 2017, 07:58 AM IST

हिरण शिकार मामला : सलमान के वकील ने जांच अफसर की रिपोर्ट में गिनाई कमियां

जोधपुर. बहुचर्चित कांकाणी हिरण शिकार मामले में सीजेएम ग्रामीण कोर्ट में शुक्रवार को बचाव पक्ष की ओर से अंतिम बहस हुई, लेकिन समयाभाव के चलते यह अधूरी रही। अब अगली अंतिम बहस 20 नवंबर को होगी। आरोपी अभिनेता सलमान खान के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने इस मामले के सबसे महत्वपूर्ण गवाह जांच अधिकारी तत्कालीन उप वन संरक्षक (वन्यजीव) मांगीलाल सोनल के बयानों का विवेचन किया।

उन्होंने कोर्ट के समक्ष तर्क देते हुए कहा, कि इस गवाह ने अपने बयान में बताया, कि जो रिपोर्ट उसके सामने पेश हुई, उस पर पूनमचंद व छोगाराम के ही हस्ताक्षर थे, जबकि पत्रावली में जो रिपोर्ट लगाई गई, उस पर आठ व्यक्तियों के हस्ताक्षर हैं। इससे स्पष्ट है, कि पूनमचंद और छोगाराम द्वारा जो रिपोर्ट सबसे पहले पेश की गई, उसे हटाकर दूसरी रिपोर्ट पत्रावली में डाली गई। इस तथ्य से अभियोजन की संपूर्ण कहानी संदिग्ध हो जाती है।

अधिवक्ता ने कहा, कि सोनल ने जिरह में पहले तो यह कहा कि वह एफआईआर की प्रतियां जारी करवाने के लिए रिपोर्ट कार्यालय में देकर गया था। फिर कह दिया, कि वह एफआईआर की प्रतियां जारी कर घटनास्थल पर साथ लेकर गया था, जबकि वन विभाग के कर्मचारी सागरराम ने जिरह में कहा, कि रिपोर्ट तो घटनास्थल पर पेश हुई थी और वहीं दर्ज की गई थी।

सारस्वत ने कहा, कि मौके पर जो भी फर्द बनाई गईं, उनमें किसी में भी एफआईआर के नंबर अंकित नहीं किए गए, बल्कि बाद में अंकित किए गए। इससे यह स्पष्ट है, कि घटनास्थल पर की गई कार्यवाही तक एफआईआर में दर्ज ही नहीं की गई थी, बल्कि बाद में दर्ज की गई।


अधिवक्ता ने कहा, कि सोनल ने जिरह में यह स्वीकार किया, कि एफआईआर की प्रतियों में रिपोर्ट के मुख्य तथ्यों का इंद्राज किया जाता है। इस गवाह ने जिरह में यह भी स्वीकार किया, कि यदि रिपोर्ट में शिकार के काम में लिए गए हथियार का जिक्र आता है तो उसे एफआईआर की प्रति में अंकित किया जाता है। अधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष एफआईआर की प्रतियां पेश करते हुए तर्क दिया, कि इनमें बंदूक से शिकार किया जाना अंकित नहीं है। इससे स्पष्ट है, कि एफआईआर की प्रतियां जारी होने तक बंदूक से शिकार करने की बात सामने ही नहीं आई थी।

उन्होंने कहा, कि 8 अक्टूबर को अदालत में एफआईआर की प्रति भेजने के पश्चात पुन: रिपोर्ट को बदला गया और उसमें बंदूक से शिकार करना अंकित कर दिया गया। इसलिए ऐसी एफआईआर पर कतई विश्वास नहीं किया जा सकता है।

सारस्वत ने कहा, कि सोनल ने सबसे पहले अनुसंधान किया था और घटनास्थल पर महत्वपूर्ण कार्यवाही उसके द्वारा की गई थी। इसमें कहीं भी सलमान द्वारा शिकार करना अंकित नहीं किया। यहां तक कि नक्शा-मौका में न तो यह दर्शित किया गया, कि कथित चश्मदीद गवाहों के मकान घटनास्थल से कितने दूर थे और न ही वह स्थान दर्शित किया गया जहां खड़े होकर कथित गवाहों ने शिकार होते देखा। वह भी स्थान नक्शा-मौके पर दर्शित नहीं किया गया जहां जिप्सी को खड़ी करके शिकार किया गया। इसलिए ऐसे नक्शा-मौके का कानून की नजर में कोई महत्व नहीं है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×