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90 नवजात की मौत मामले में सुनवाई, सरकार - सालभर में 32 हजार मौतें हुई

बांसवाड़ा के जिला अस्पताल में दो माह में 90 नवजात की मौत मामले में सुनवाई।

Danik Bhaskar | Nov 30, 2017, 05:20 AM IST
सिम्बॉलिक इमेज। सिम्बॉलिक इमेज।

जोधपुर. प्रदेश में पिछले एक साल में कुल 32002 नवजात बच्चों ने दम तोड़ दिया है। यह खुलासा खुद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में किया है। दरअसल, कोर्ट ने बांसवाड़ा के जिला अस्पताल में दो माह में 90 नवजात की मौतों के मामले की सुनवाई के दौरान पूरे प्रदेश में नवजातों की मौतों के आंकड़े मांगे थे। सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता केएल ठाकुर के जूनियर रिषभ ताहिल ने बुधवार को जस्टिस संगीत लोढा व जस्टिस विनीत माथुर की खंडपीठ में यह आंकड़े पेश किए।

- न्यायमित्र कुलदीप वैष्णव ने बताया कि सरकार ने 6-6 माह की रिपोर्ट पेश की है। इसके अनुसार अक्टूबर 2016 से अक्टूबर 2017 तक कुल 32002 नवजातों ने दम तोड़ा। सिर्फ अक्टूबर 2017 में 1751 की नवजात की मौत हुई है।
- आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2017 से सितंबर 2017 तक 12085 तथा अक्टूबर 2016 से मार्च 2017 तक 18,166 नवजातों की सांसें थम गईं। अब इस मामले में सात दिसंबर को अगली सुनवाई होगी।

- गौरतलब है कि बांसवाड़ा के जिला अस्पताल में दो माह में 90 नवजात की मौत की खबरें मीडिया में आने के बाद हाईकोर्ट विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष जस्टिस जीके व्यास ने बांसवाड़ा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से रिपोर्ट मांगी थी।

- रिपोर्ट मिलने के बाद सीजे प्रदीप नन्द्राजोग ने स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर जनहित याचिका दायर की थी। इसके बाद जस्टिस गोविंद माथुर की खंडपीठ ने प्रदेशभर में हुई नवजातों की मौतों के आंकड़े पेश करने के निर्देश दिए थे।

मौतों के पीछे मेडिकल स्टाफ की कमी को बताया बड़ा कारण
- रिपोर्ट में सरकार की ओर से मौत के जो सबसे बड़े कारण बताए गए हैं, उनमें मेडिकल स्टाफ की कमी के अलावा अशिक्षा, खस्ताहाल सड़कों को भी कारण बताया गया है।