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पाक बॉर्डर पर मिले बाज ने उड़ाई जांच एजेंसियों की नींद, अब सामने आई सच्चाई

Bhaskar News | Last Modified - Nov 26, 2017, 07:28 AM IST

केसरीसिंहपुर के अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर मिला बाज का मालिक यूएई का शेख है।
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    संदिग्ध बाज की बॉडी में एक ट्रांसमीटर लगा हुआ था। एक्स-रे में चिप होने की बात पता चली है।

    श्रीगंगानगर. केसरीसिंहपुर के पास इंटरनेशनल बॉर्डर के पास खेत में मिला बाज दुश्मन देश की खुफिया एजेंसियों का नहीं बल्कि, यूएई के एक शख्स का है। दुबई के शेख का यह बाज रास्ता भटककर यहां तक आ गया। पुलिस को बाज की तफ्तीश में एक ट्रांसमीटर मिला था, जिस पर लिखे नंबरों के आधार पर श्रीगंगानगर के पक्षी प्रेमी तीन दिन के अथक प्रयासों से इस बाज के असली मालिक तक पहुंच गए हैं। चूंकि मामला अंतरराष्ट्रीय संबंधों का है, इसलिए भारतीय खुफिया एजेंसियां और राजस्थान पुलिस अपने स्तर पर मामले की पड़ताल में जुटी है। फिलहाल बाज के शरीर में फिट किए माइक्रो चिप को लेकर क्रॉस-चेक किया जा रहा है। हालांकि पक्षी प्रेमियों ने साफ दावा कर दिया है कि इस बाज को पाकिस्तान अथवा अन्य किसी दुश्मन देश द्वारा भारतीय अंतरराष्ट्रीय सीमा की निगरानी के लिए उपयोग नहीं किया जाता है। ये बाज रास्ता भटककर यहां तक आ गया था।


    इससे पहले मंगोलिया प्रजाति के पक्षियों को पहुंचाया मालिक तक

    सुभाष शर्मा ने बताया कि वे इससे पहले चार प्रवासी पक्षियों की जानकारी उनके मालिकों तक पहुंचा चुके हैं। मंगोलिया से आया स्पेरोहॉक व डेमोसिल क्रेन, शिकारा बाज की प्रजातियों को भी मालिकों तक पहुंचाया गया है। इन प्रजातियों के पास ऐसे चिप या टैग थे, जिन पर मोबाइल नंबर लिखे थे। इस आधार पर इन्हें गंतव्य तक पहुंचाया।

    यूएई से भारत तक 2600 किमी एरिया ऐसा, जहां अकसर कई इलाकों के पक्षी करते हैं प्रवास

    डॉ. दाऊलाल वोहरा के अनुसार प्रिगरिन फॉल्कन नॉर्थ अमेरिका के टुंड्रा से साउथ अमेरिका तक लगभग 25 हजार किलोमीटर का एरिया प्रति वर्ष प्रवास करने के लिए जाना जाता है। यूएई से भारत तक करीब 2600 किमी का एरिया है। आईयूसीएन के रिसर्च बताते हैं कि इस एरिया में सर्दी के दौरान फॉल्कन अधिक प्रवास करते हैं। इसी दौरान इस एरिया में प्रजनन भी करते हैं। भारत में पूरे देश में इस प्रजातियों के लिए प्रजनन का माहौल बेहतर माना जा रहा है। प्रवासी पक्षियों से आदिकाल में मानव सभ्यता के विकास होना माना गया है। ऐसे प्रवासी पक्षियों को मारने के बजाय सरकारें बचाने के लिए योजना बनाएं तो पक्षियों के लिहाज से बेहतर होगा।

    ऑपरेशन कर बाहर निकाली जाएगी चिप

    केसरीसिंहपुर थानाधिकारी वेदप्रकाश लखोटिया ने बताया कि संदिग्ध बाज के शरीर में डाली गई माइक्रो चिप को बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन किया जाना है। इस संबंध में जयपुर मुख्यालय से अनुमति मांगी गई है। चिप के बाहर निकालने के बाद उसकी एफएसएल जांच करवाई जाएगी। उसकी रिपोर्ट तय करेगी कि बाज में डाली गई माइक्रो चिप किस काम के लिए है। जब तक एफएसएल रिपोर्ट नहीं मिल जाती तब तक बाज को वन विभाग की निगरानी में रखा जाएगा।

    सर्दी में भटक जाते हैं पक्षी रास्ता| इसलिए आती है समस्या,धुंध के कारण नहीं देख पाते

    - पक्षी विशेषज्ञ डॉ दाऊलाल वोहरा ने बताया कि अक्सर सर्दी शुरू होने के दौरान ही ऐसे मामले सबसे अधिक सामने आते हैं। सर्दी बढ़ने के साथ ही पक्षियों के शरीर में बने सेल काम करना कम कर देते हैं। दूसरा धुंध के कारण भी पक्षी रास्ता भटक जाते हैं।

    - श्रीगंगानगर में सेल टैक्स विभाग से सेवानिवृत सुभाष गोगी शर्मा करीब 30 सालों से इंडियन बर्ड्स कंजरवेशन नाम की अंतरराष्ट्रीय संस्था से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह बाज यूएई की सबसे अधिक मशहूर प्रेगरिन फॉल्कन प्रजाति का है। इसे शिकार में माहिर के तौर पर विश्व में जाना जाता है। यूएई में शिकार करना वहां का कल्चर है। वहां कोई प्रतिबंध नहीं है। इसलिए वहां के अमीर लोग इस प्रजाति के बाज को शिकार के लिए पालते हैं। - केसरीसिंहपुर के निकट 6 वी के खेत से बरामद किया गया बाज कतर देश के शेख मोहम्मद अल मंसूरी का है। बाज के पास से बरामद किए गए ट्रांसमीटर और पैरों में पहनाए गए छल्लों पर मोहम्म्द अल मंसूरी का मोबाइल नंबर और नाम अंकित है।

    - इस संबंध में यूएई की प्रवासी पक्षियों पर रिसर्च कर रही अंतरराष्ट्रीय संस्था कतर नेचर हिस्ट्री ग्रुप से जब उन्होंने मैसेंजर और ई मेल से जानकारी भेजकर संपर्क किया तो उनका तत्काल जवाब आया। बाज के पास से बरामद हुए मोबाइल नंबर पर बात की तो वह मोहम्मद अल मंसूरी के बेटे पास था।

    - उसने ग्रुप को बताया कि उसके पिता पाकिस्तान में शिकार करने गए हुए हैं। यह बाज उन्हीं का है और उनसे बलूचिस्तान में शिकार पर निकलते समय उड़ा था जो वापस नहीं पहुंचा।

    प्रेगरिन फॉल्कन प्रजाति का है बाज, डक हॉक भी कहते हैं, 390 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ने की ताकत

    - बीकानेर के पक्षी वैज्ञानिक आईयूसीएन के सदस्य डॉ. दाऊलाल वोहरा बताते हैं कि केसरीसिंहपुर के पास से बरामद किया गया बाज फॉल्कन प्रजाति का प्रेगरिन फॉल्कन है। इसे डक हॉक भी कहा जाता है। इसे अरब देशों के लोग शिकार करने, आपस में लड़ाने और जुआ खेलने के काम लेते हैं।

    - कोहरे की वजह से भी यह बाज रास्ता भटककर सीमाएं लांघ जाते हैं। इनके द्वारा खुफिया निगरानी नहीं होती, क्योंकि अब तक जितने भी बाज इस तरह माइग्रेट होकर भारतीय सीमा में आए हैं उनके पास से यूएई के मोबाइल नंबर और नाम लिखे ट्रांसमीटर व माइक्रो चिप मिले हैं।

    - ये इन पक्षियों के मालिकों के होते हैं जो इनके स्वामित्व का आधार होते हैं। इस प्रजाति को बहुत कुशल शिकारी माना जाता है। ये 390 किमी प्रति घंटा की रफ्तार तक उड़ते हैं तो पक्षियों में सबसे तेज उड़ने वाली प्रजाति है। इस कारण शेख लोग इसे बहुत बड़ी संख्या में पालते हैं।

    आगे की स्लाइड्स में जानिए, कुछ खास बातें जो जुड़ी हैं इस बाज से...

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    1.बाज की पहचान बनाए रखने को पैरों में छल्ले, ट्रांसमीटर और शरीर में माइक्रो चिप लगाई जाती है।
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    2. शरीर में डाली गई माइक्रो चिप चावल के दाने से दो गुना बड़े आकार जितनी ही होती है।
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    3. यह चिप करीब 1600 डॉलर खर्च कर ट्रांसप्लांट करवाई जाती है।
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    4.लंदन की आरएसटीबी संस्था के 2011 के सर्वे में यह बाज यूके में केवल 1402 ही बचे थे।
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    5.3000 साल पहले से भी इन बाज का प्रयोग शिकार के लिए किया जाता रहा है।
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    6. ये माइक्रो चिप बाहर लगे ट्रांसमीटर की मदद से जीपीएस सिस्टम से बाज की उसके मालिक तक लोकेशन पहुंचाती है।
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    7.इस बाज का वजन एक से डेढ़ किलोग्राम तक होता है।
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