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रामगढ़ बांध के बहाव क्षेत्र में अवैध बने निम्स विश्वविद्यालय के हॉस्टल व बिल्डिंगों पर चला जेडीए का बुलडोजर

रामगढ़ बांध के बहाव क्षेत्र में अवैध बने निम्स विश्वविद्यालय के हॉस्टल व बिल्डिंगों पर चला जेडीए का बुलडोजर

Shyam Raj | Last Modified - Nov 17, 2017, 06:09 PM IST

जयपुर। रामगढ़ बांध के बहाव क्षेत्र व सरकारी जमीन पर बने 4 हॉस्टल व 10 छोटी बिल्डिंगों पर कार्रवाई करते हुए जेडीए ने शुक्रवार को बुलडोजर चला दिया। जेडीए की जोन और प्रवर्तन विंग की संयुक्त कार्रवाई में 10 जेसीबी और 4 ब्रेकर मशीन चलीं। जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम बलदेव धोजक भी मौजूद थे। वहीं जेडीए ने 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात कर रखे हैं। जानिए और इस बारे में ....

- बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के कारण निम्स प्रशासन की ओर से विरोध भी मुखर नहीं हो पाया। हालांकि कार्रवाई के दौरान विश्वविद्यालय में हड़कंप मचा रहा।

- रामगढ़ बांध के बहाव क्षेत्र व सरकारी जमीन पर बने निम्स विश्वविद्यालय के 4 छात्रावास सहित अन्य बिल्डिंग को तोड़ने की प्लानिंग को लेकर तकनीकी विशेषज्ञ शरद बी सरवटे, जेडीए के पुलिस अधीक्षक राहुल जैन व लोकंडा सिस्टम के विशेषज्ञ महेश लोकंडा ने डिप्टी कमिश्नर व प्रवर्तन अधिकारी के साथ मौका मुआयना किया था। अब आगे इन हॉस्टलों को बारूद से उड़ाया जाएगा। जेडीए के पुलिस अधीक्षक राहुल जैन का कहना है कि कार्रवाई जारी रहेगी।

निम्स के नक्शा की मंजूरी पर भी कंफ्यूजन
- निम्स विश्वविद्यालय दिल्ली रोड पर चंदवाजी के पास बनी हुई है। यहां बने कई बिल्डिंग का नक्शा जेडीए से मंजूर ही नहीं किया हुआ है। हालांकि दबाव में जेडीए कुछ हिस्से पर ही कार्रवाई कर रहा है। जेडीए के अधिकारियों का कहना है कि बिल्डिंग के नक्शा को लेकर कंफ्यूजन है। जब पूरी स्थिति साफ हो जाएगी, तो आला अफसरों के निर्देशानुसार काम करेंगे।

आसपास की बिल्डिंग खाली करने में दिक्कत
- बड़ी बिल्डिंगों को तोड़ने के लिए बारूद से इस्तेमाल करना पड़ेगा। ऐसे में 200 मीटर तक की बिल्डिंगों को खाली करवाना पड़ेगा, लेकिन निम्स प्रशासन क्वार्टर व दूसरे छात्रावास को खाली करने में आनाकानी कर रहा है। निम्स की दलील है कि लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट करवाने में दिक्कत है। दूसरी जगह कोई इतनी बड़ी खाली बिल्डिंग नहीं मिल रही है।

यह है मामला

- जेडीए ने दो साल पहले उनके स्वामित्व की करीब 35 बीघा भूमि पर बगैर स्वीकृति अवैध निर्माण करने को लेकर नोटिस जारी किए थे। ये नोटिस 27 बहुमंजिला और निर्माणाधीन इमारतों के लिए जारी किए गए थे। तब जेडीए की ओर से संबंधित जोन-13 के तहसीलदार, एनफोर्समेंऑफिसर, टाउनप्लानिंग के जरिए पीटी सर्वे के माध्यम से आटो कैड सॉफ्टवेयर से की गई गणना में यह सामने आया था। जेडीए ने उनके स्वामित्व की भूमि पर बनाई गई 11 बहुमंजिला इमारतों के विरुद्ध धारा 72 के नोटिस (सरकारी भूमि पर कब्जा और अतिक्रमण) और बिना रूपांतरण एवं भू-उपयोग परिवर्तन कराई गई खातेदारी भूमि पर बनाई गई कुल 16 बहुमंजिला और निर्माणाधीन इमारतों के विरुद्ध तोड़फोड़ और सील) के नोटिस जारी किए थे। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह 30 नवंबर से पहले 4 अवैध बिल्डिंग व दूसरे छोटे निर्माण को तोड़ने के निर्देश थे।

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फाटो : श्याम राज

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