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ये हैं सरकारी स्कूल के होनहार; हालात विपरीत थे, हार नहीं मानी, सभी बने टॉपर

मन में अगर कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो कोई भी सफलता असंभव नहीं। दृढ़ ईच्छा शक्ति से किया गया काम कभी असफल नहीं...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 13, 2018, 05:30 AM IST

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    मन में अगर कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो कोई भी सफलता असंभव नहीं। दृढ़ ईच्छा शक्ति से किया गया काम कभी असफल नहीं होता। यह कहना है नोहर तहसील के छोटे से गांव झेदासर की सुनीता मेघवाल का। दसवीं बोर्ड के परीक्षा परिणाम में सुनीता मेघवाल ने 95.67 प्रतिशत अंक हासिल कर तहसील में अव्वल स्थान प्राप्त किया है। सुनीता ने बताया कि माता-पिता की प्ररेणा व अध्यापकों के दिशा निर्देशन के बलबूते पर ही उसने यह सफलता हासिल की है। सुनीता ने कहा कि कम पढ़ो लेकिन अपनी रुचि का पढ़ो ताकि वह भविष्य में काम आए। सुनीता भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाकर देश सेवा करनी चाहती है। सुनीता के पिता लिछमण राम मेघवाल व माता सुदेश देवी ने बताया कि उनकी पुत्री शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रही है।

    बहुत घंटे नहीं पढ़ी, लेकिन रुचि से पढ़ी, मकसद- कलेक्टर बनना

    पिता की कैंसर से मौत, मां ने मनरेगा में मजदूरी कर पढ़ाया, पिछले साल भाई टॉपर बना तो इस साल छोटा लाया 91.67%

    यह है नोहर तहसील के गांव मलवानी के सुरेंद्र कुमार। सुरेंद्र इस बार 10वीं बोर्ड में 91.67 प्रतिशत अंक लाकर अपने गांव और मां दोनों का नाम रोशन किया है। सुरेंद्र ने बताया कि मां अनपढ़ है, फिर भी मेरे साथ पढ़ाई में दिन-रात सहयोग करती है। पिता भागीरथ की 2012 में कैंसर से देहांत हो गया था। पिता के जाने के बाद परिवार पूरी तरह टूट चुका था। मां हमें पढ़ाने के लिए कभी मनरेगा में मजदूरी करती तो कभी खेती। मां की बस एक ही इच्छा थी हम दोनों भाई कामयाब हो गया। पिछले साल मेरे बड़े भाई ने भी गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ते हुए 95.83 प्रतिशत अंक लाया था। मां ने जो भी सपने हमारे लिए देखे है वो एक दिन जरूर पूरे करेंगे।

    पल्लवी सुथार

    94%

    राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नोहर की छात्रा पल्लवी सुथार पुत्री शिशपाल ने 94 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। खास बात ये है कि पल्लवी ही एक मात्र ऐसी छात्रा है जिसने स्कूल में यह सफलता पाई है। पल्लवी ने बताया कि लगन और कुछ करने गुजरने का जज्बा ही मेरी मंजिल बना। भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य रखने वाले छात्रा पल्लवी ने बताया कि नियमित अध्ययन व शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन व अध्यापन से सफलता हासिल की है। छात्रा पल्लवी के पिता शिशपाल गांव में ही किराना की दुकान चलाते हैं। पिता कहते हैं कि यह बेटी की खुद की मेहनत है। हमने तो बस साथ दिया हालांकि हालात विपरीत थे फिर भी बेटी की यह उपलब्धि काबिलेतारीफ है।

    स्कूल की एकमात्र छात्रा, जिसके इतने नंबर आए, आईएएस बनना चाहती है

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