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युवा उद्यमी; ग्वारपाठे की खेती शुरू की, खुद की संस्था बनाई, अब बेच रहे हैं 45 तरह के उत्पाद, दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा

Nohar News - जितेंद्र शर्मा | परलीका (हनुमानगढ़) हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील में गांव परलीका के 30 वर्षीय किसान अजय स्वामी ने...

Dainik Bhaskar

Jun 02, 2018, 05:40 AM IST
युवा उद्यमी; ग्वारपाठे की खेती शुरू की, खुद की संस्था बनाई, अब बेच रहे हैं 45 तरह के उत्पाद, दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा
जितेंद्र शर्मा | परलीका (हनुमानगढ़)

हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील में गांव परलीका के 30 वर्षीय किसान अजय स्वामी ने एलोवेरा (ग्वारपाठे) की खेती कर खुद को किसान उद्यमी के रूप में स्थापित किया है। महज 8वीं कक्षा तक शिक्षित इस किसान ने एक बीघा कृषि भूमि से शुरुआत की थी। आज 50 बीघा जमीन पर एलोवेरा का उत्पादन कर रहे हैं और दूसरे किसानों से भी करवा रहे हैं। उन्होंने बारमंडीसिस नामक प्रजाति के ग्वारपाठे का जूस अपने ही घर में बनाना शुरू किया जो अब पूरे राजस्थान सहित पंजाब, हरियाणा में बेचा जा रहा है। अब इन्हें प्रतिवर्ष 50 से 60 हजार रुपए की शुद्ध आमदनी हो रही है। हाल ही इन्होंने राजस्थान रो हर्बल उत्पाद नाम से भी संस्था पंजीकृत करवाई है। इसमें वे ग्वारपाठे से जुड़े अन्य 45 तरह के उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इनके तैयार उत्पाद किसान मेलों की स्टालों में भी प्रदर्शित किए जाते हैं। इसके लिए वे जिला व राज्य स्तर पर पुरस्कृत हो चुके हैं।

नोहर तहसील में गांव परलीका के 30 वर्षीय किसान अजय स्वामी कई बार हुए पुरस्कृत

यूं करते हैं खेती : पहली बार 2009 में इन्होंने एक बीघा में 7500 पौधे लगाए। इसमें 15 टन ग्वारपाठा हुआ। इसके बाद प्रति वर्ष औसतन 10 टन ग्वारपाठा होता रहा। खेती का सिलसिला अब भी जारी है। पहली बार में महज 25 हजार रु. खर्च किए थे। इसके बदले हर वर्ष प्रति बीघा लगभग 50 से 80 हजार रुपए आमदनी ले रहे हैं। पौधों में ट्यूबवैल और नहरी पानी माह में दो बार देना पड़ता है। बारिश अच्छी होने पर प्रति बीघा उत्पादन भी बढ़ जाता है।

ये हैं उत्पाद : एलोवेरा जूस, एलोवेरा साबुन, एलोवेरा क्रीम, एलोवेरा शैंपू, हेयर पाउड, स्किन जैल व अन्य तरह के उत्पाद शामिल हैं। वे कई तरह की हर्बल, जड़ी-बूटियों को एलोवेरा के साथ प्रयोग कर नए उत्पाद तैयार करते हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र से ली प्रेरणा : स्वामी ने बताया कि उन्होंने इस खेती की प्रेरणा कृषि विज्ञान केंद्र संगरिया के डॉ. अनूप कुमार से ली। फिर घर में ही जूस तैयार किया, जिससे आज उन्हें यह मुकाम हासिल हुआ है। कई लोगों ने कहा कि इसमें आमदनी नहीं होगी लेकिन मैं नहीं रुका और सफलता हासिल की। कृषि विज्ञान अधिकारी डॉ. अनूप कुमार का कहना है कि अजय युवा किसान उद्यमी है, जिन्होंने आर्थिक तंगी के दौरान जूझते हुए सफलता के पायदान को छुआ है। इनके उत्पाद ने कृषि क्षेत्र में नए आयाम बनाए हैं। दूसरे किसान भी इनसे प्रेरणा ले रहे हैं।

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